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ऐसे आवास बांटे दिए जो रहने लायक नहीं : महासंघ
Updated Thu, 06 Dec 2018 11:42 PM IST
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हमीरपुर। जिलाभर के कर्मचारियों ने आवासीय भवनों के गलत आवंटन को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के प्रधान अरविंद मोदगिल और महासचिव मिलाप शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी आवास समिति ने कर्मचारियों को ऐसे आवास आवंटित किए, जो रहने लायक नहीं हैं। पूल कॉलोनी में कर्मचारियों को दिए गए आवासों में लकड़ी के फर्श को दीमक लगी है। बिजली की वायरिंग खराब है।
खिड़कियों और दरवाजों की लकड़ी बारिश के पानी से सड़ चुकी हैं। महासंघ ने कहा कि हर साल प्रशासन ने भवनों की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, इसके बावजूद आवासीय भवनों की हालत खराब है। मोदगिल और शर्मा ने कहा कि इन आवासों के आवंटन से पहले इसकी लोक निर्माण विभाग की ओर से फिजिकल वेरिफिकेशन और मरम्मत करवाना जिला प्रशासन का दायित्व बनता था। लेकिन, खेद है कि आवासीय आवंटन समिति की बैठकों में समिति के सदस्य महज औपचारिकताएं निभा रहे हैं। पूल कॉलोनी में अधिकतर आवासों को अनसेफ घोषित किया जा चुका है। बावजूद इसके कर्मचारियों के परिवार को खतरे में डालकर उन्हें वहां रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने असुरक्षित भवनों को गिराकर उनकी जगह नये आवासीय भवनों के निर्माण की मांग उठाई है। महासंघ ने उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा से मांग की है कि पूर्व में आवंटित आवासों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए और कर्मचारियों की वरिष्ठता के आधार पर नये सिरे से आवासों का आवंटन हो। ताकि भविष्य में किसी कर्मचारी को अपना हक पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा न खटखटाना पड़े। इसके साथ महासंघ ने प्रदेश सरकार से हर वर्ष आवासीय भवनों की मरम्मत पर खर्च की जाने वाली करोड़ों रुपये की धनराशि की जांच करवाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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खिड़कियों और दरवाजों की लकड़ी बारिश के पानी से सड़ चुकी हैं। महासंघ ने कहा कि हर साल प्रशासन ने भवनों की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, इसके बावजूद आवासीय भवनों की हालत खराब है। मोदगिल और शर्मा ने कहा कि इन आवासों के आवंटन से पहले इसकी लोक निर्माण विभाग की ओर से फिजिकल वेरिफिकेशन और मरम्मत करवाना जिला प्रशासन का दायित्व बनता था। लेकिन, खेद है कि आवासीय आवंटन समिति की बैठकों में समिति के सदस्य महज औपचारिकताएं निभा रहे हैं। पूल कॉलोनी में अधिकतर आवासों को अनसेफ घोषित किया जा चुका है। बावजूद इसके कर्मचारियों के परिवार को खतरे में डालकर उन्हें वहां रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने असुरक्षित भवनों को गिराकर उनकी जगह नये आवासीय भवनों के निर्माण की मांग उठाई है। महासंघ ने उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा से मांग की है कि पूर्व में आवंटित आवासों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए और कर्मचारियों की वरिष्ठता के आधार पर नये सिरे से आवासों का आवंटन हो। ताकि भविष्य में किसी कर्मचारी को अपना हक पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा न खटखटाना पड़े। इसके साथ महासंघ ने प्रदेश सरकार से हर वर्ष आवासीय भवनों की मरम्मत पर खर्च की जाने वाली करोड़ों रुपये की धनराशि की जांच करवाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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