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उपचार पूरा किए बिना ही टांडा मेडिकल कॉलेज से पीड़ित को घर भेजा
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:54 PM IST
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा
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नादौन (हमीरपुर)। करीब छह दिन पूर्व थाना क्षेत्र नादौन के अंर्तगत आग की चपेट में आने से झुलसे करौर गांव निवासी एक व्यक्ति के परिजनों ने टांडा मेडिकल कॉलेज पर इलाज में कोताही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार घटना के दिन नादौन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद जब वह टांडा पहुंचे, तो पीड़ित को कुछ देर रखने के बाद वापस घर भेज दिया गया, परंतु रविवार को जब हालत बिगड़ी तो नादौन अस्पताल से एक बार फिर से उन्हें टांडा रेफर कर दिया गया है।
पीड़ित 54 वर्षीय यशपाल के पुत्र सोनू कुमार ने बताया कि गत 20 नवंबर को तड़के उसके पिता चूल्हे के पास आग सेंक रहे थे। इसी दौरान उन्हें चक्कर आ गया और वह चूल्हे में ही गिर गए। कुछ देर बाद उनके चिल्लाने पर परिजनों ने उन्हें बाहर निकाला और नादौन अस्पताल ले आए। सोनू ने बताया कि उसके पिता के शरीर का पिछला हिस्सा बुरी तरह से झुलस गया था। उन्हें गंभीर हालत में नादौन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद टांडा रेफर कर दिया गया। सोनू ने बताया कि टांडा में पहुंचने पर चिकित्सकों ने दवाइयां देकर उन्हें घर भेज दिया। उसने बार-बार आग्रह किया कि उसके पिता को कुछ दिनों के लिए अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाए, परंतु चिकित्सकों पर इसका कोई असर नहीं हुआ और उन्हें मजबूरन उसी दिन वापस घर आना पड़ा। गत दस दिनों में उसके पिता की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती गई और रविवार को तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें नादौन अस्पताल लाया गया। वहां, प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसके पिता को दोबारा टांडा रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस में मुल्ख राज तथा सचिन ने पीड़ित को टांडा पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। सोनू ने बताया कि वह इस बड़े अस्पताल की लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई करेगा। उधर, नादौन अस्पताल के चिकित्सक डॉ. चंद्रशेखर का कहना है कि रविवार सुबह यशपाल को गंभीर हालत में नादौन अस्पताल लाया गया था, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद टांडा रेफर कर दिया गया है।
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पीड़ित 54 वर्षीय यशपाल के पुत्र सोनू कुमार ने बताया कि गत 20 नवंबर को तड़के उसके पिता चूल्हे के पास आग सेंक रहे थे। इसी दौरान उन्हें चक्कर आ गया और वह चूल्हे में ही गिर गए। कुछ देर बाद उनके चिल्लाने पर परिजनों ने उन्हें बाहर निकाला और नादौन अस्पताल ले आए। सोनू ने बताया कि उसके पिता के शरीर का पिछला हिस्सा बुरी तरह से झुलस गया था। उन्हें गंभीर हालत में नादौन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद टांडा रेफर कर दिया गया। सोनू ने बताया कि टांडा में पहुंचने पर चिकित्सकों ने दवाइयां देकर उन्हें घर भेज दिया। उसने बार-बार आग्रह किया कि उसके पिता को कुछ दिनों के लिए अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाए, परंतु चिकित्सकों पर इसका कोई असर नहीं हुआ और उन्हें मजबूरन उसी दिन वापस घर आना पड़ा। गत दस दिनों में उसके पिता की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती गई और रविवार को तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें नादौन अस्पताल लाया गया। वहां, प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसके पिता को दोबारा टांडा रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस में मुल्ख राज तथा सचिन ने पीड़ित को टांडा पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। सोनू ने बताया कि वह इस बड़े अस्पताल की लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई करेगा। उधर, नादौन अस्पताल के चिकित्सक डॉ. चंद्रशेखर का कहना है कि रविवार सुबह यशपाल को गंभीर हालत में नादौन अस्पताल लाया गया था, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद टांडा रेफर कर दिया गया है।
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