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सर्वोच्च न्यायालय में कौशल की याचिका खारिज
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हमीरपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) गौन करौर के प्रिंसिपल पद की लड़ाई देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई। लेकिन, यहां पहुंचते ही प्रिंसिपल जगदीश कौशल की याचिका पहली ही पेशी में ही खारिज हो गई। शायद प्रदेश में यह पहला ट्रांसफर मामला होगा जो दिल्ली तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई 3 जनवरी को हुई। जिसमें न्यायाधीश उदय उमेश ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा कि इस मामले में कोई ऐसा भी कारण इंटरफेयर करने का नहीं दिख रहा। इसलिए एलएलपी इज एकॉरडिंगली डिसमिस्ड।
ट्रिब्यूनल कोर्ट में करीब 8 माह तक यह केस चला, जिसमें प्रिंसिपल जगदीश कौशल के पक्ष में अंतिम फैसला आया। लेकिन, शिमला से ट्रांसफर होकर आए प्रिंसिपल राजेंद्र पाल के हाईकोर्ट में जाने से वहां ट्रिब्यूनल का फैसला ही बीते माह पलट गया। उच्च न्यायालय ने इस मामले में नवंबर माह में प्रदेश शिक्षा सचिव और निदेशक को एक हफ्ते में उचित निर्णय लेने के आदेश दिए थे। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने राजेंद्र पाल को ही डाइट का प्रिंसिपल नियुक्त किया। हाईकोर्ट के फैसले पर कौशल सुप्रीम कोर्ट तक राहत पाने के लिए पहुंच गए थे। अगर सुप्रीम कोर्ट में यह एसएलपी दायर हो जाती तो कई साल यह केस चलता और पांच साल रहने का नियम जो बताया जा रहा, उससे भी ज्यादा समय यहीं गुजर जाता। उधर, प्रधानाचार्य राजेंद्र पाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में जगदीश कौशल की याचिका खारिज हो गई है।
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ट्रिब्यूनल कोर्ट में करीब 8 माह तक यह केस चला, जिसमें प्रिंसिपल जगदीश कौशल के पक्ष में अंतिम फैसला आया। लेकिन, शिमला से ट्रांसफर होकर आए प्रिंसिपल राजेंद्र पाल के हाईकोर्ट में जाने से वहां ट्रिब्यूनल का फैसला ही बीते माह पलट गया। उच्च न्यायालय ने इस मामले में नवंबर माह में प्रदेश शिक्षा सचिव और निदेशक को एक हफ्ते में उचित निर्णय लेने के आदेश दिए थे। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने राजेंद्र पाल को ही डाइट का प्रिंसिपल नियुक्त किया। हाईकोर्ट के फैसले पर कौशल सुप्रीम कोर्ट तक राहत पाने के लिए पहुंच गए थे। अगर सुप्रीम कोर्ट में यह एसएलपी दायर हो जाती तो कई साल यह केस चलता और पांच साल रहने का नियम जो बताया जा रहा, उससे भी ज्यादा समय यहीं गुजर जाता। उधर, प्रधानाचार्य राजेंद्र पाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में जगदीश कौशल की याचिका खारिज हो गई है।
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