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लावारिस पशुओं के आतंक के कारण दो हजार कनाल भूमि पर छोड़ी खेती
Updated Sat, 03 Mar 2018 10:00 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जाहू (हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज में दो गोसदन होने के बावजूद लावारिस पशुओं की तादाद कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। फसलों पर इन पशुओं के कहर ने किसानों की कमर तोड़ दी है। उपमंडल के जाहू, मुंडखर, भलवाणी, धमरोल, भुक्कड़, अमरोह, कक्कड़, बडैहर और धिरड़ सहित करीब नौ पंचायतों में करीब दो हजार कनाल भूमि पर किसानों ने खेती करना छोड़ दिया। इससे यह उपजाऊ भूमि बंजर बन गई है। पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से किसानों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। उपमंडल की एक दर्जन पंचायतें सीर और सुनैहल खड्ड के किनारे हैं। इन खड्डों में सालभर पानी रहने की वजह से लावारिस पशुओं के झुंड इनके किनारे घूमते रहते हैं। वहीं, इन पंचायतों की भूमि गेहूं, धान और मक्की की फसल की उत्पादकता के लिए मशहूर है। सबसे ज्यादा परेशान किसान जाहू पंचायत के हैं। मुंडखर में बने पुल से लेकर जाहू में सुनैहल खड्ड तक करीब आठ सौ कनाल भूमि बिना बिजाई से बंजर बन चुकी है। इसी तरह मुंडखर पंचायत की करीब दो सौ कनाल भूमि लावारिस पशुओं के नुकसान से बंजर हो चुकी है। धमरोल पंचायत में करीब तीन सौ कनाल भूमि तीन साल से बिना बिजाई से बंजर बन गई है। धिरड़, कक्कड़, भुक्कड़ और अमरोह पंचायत की करीब पांच सौ कनाल भूमि पर किसानों ने लावारिस पशुओं के डर से खेतीबाड़ी करनी छोड़ दिया है। खेतों की बिजाई, खाद और बीज से पैसे भी न निकलने की वजह से किसान इस काम से पीछे हटने लगे हैं। किसान उद्यम सिंह, कर्म चंद, सुरजीत सिंह, चमेल सिंह, कांशी, कमलदेव, चिरंजी लाल, सुरेंद्र कुमार, शक्ति चंद, बलदेव सिंह, सुंदर सिंह, बंशी लाल, धर्म चंद, वीर सिंह, खजाना राम, धर्मपाल डोगरा, दलीप सिंह, मुंशी राम, रतन चंद, सुरेश कुमार, पवन कुमार, कृष्ण चंद, अजय कुमार, रमेश चंद, प्रकाश चंद आदि का कहना है कि लावारिस पशुओं की वजह से उन्होंने अब खेती करना छोड़ दी है। किसानों का कहना है कि किसान अनाज के लिए डिपुओं और दुकानों पर निर्भर हो गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लावारिस पशुओं की समस्या के निजात के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। मुंडखर पंचायत प्रधान प्रकाश चंद का कहना है कि पंचायतों में सरकारी भूमि की कमी है। ऐसे में गोसदनों का निर्माण करना मुश्किल है। मुंडखर पंचायत के लोग लावारिस पशुओं से परेशान हैं। इससे किसान खेतीबाड़ी करना छोड़ रहे हैं। जाहू में गोसदन होने के बावजूद लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए पशुओं को टैग लगाने की योजना सरकार को प्रभावी ढंग से लागू करनी चाहिए।
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जाहू (हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज में दो गोसदन होने के बावजूद लावारिस पशुओं की तादाद कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। फसलों पर इन पशुओं के कहर ने किसानों की कमर तोड़ दी है। उपमंडल के जाहू, मुंडखर, भलवाणी, धमरोल, भुक्कड़, अमरोह, कक्कड़, बडैहर और धिरड़ सहित करीब नौ पंचायतों में करीब दो हजार कनाल भूमि पर किसानों ने खेती करना छोड़ दिया। इससे यह उपजाऊ भूमि बंजर बन गई है। पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से किसानों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। उपमंडल की एक दर्जन पंचायतें सीर और सुनैहल खड्ड के किनारे हैं। इन खड्डों में सालभर पानी रहने की वजह से लावारिस पशुओं के झुंड इनके किनारे घूमते रहते हैं। वहीं, इन पंचायतों की भूमि गेहूं, धान और मक्की की फसल की उत्पादकता के लिए मशहूर है। सबसे ज्यादा परेशान किसान जाहू पंचायत के हैं। मुंडखर में बने पुल से लेकर जाहू में सुनैहल खड्ड तक करीब आठ सौ कनाल भूमि बिना बिजाई से बंजर बन चुकी है। इसी तरह मुंडखर पंचायत की करीब दो सौ कनाल भूमि लावारिस पशुओं के नुकसान से बंजर हो चुकी है। धमरोल पंचायत में करीब तीन सौ कनाल भूमि तीन साल से बिना बिजाई से बंजर बन गई है। धिरड़, कक्कड़, भुक्कड़ और अमरोह पंचायत की करीब पांच सौ कनाल भूमि पर किसानों ने लावारिस पशुओं के डर से खेतीबाड़ी करनी छोड़ दिया है। खेतों की बिजाई, खाद और बीज से पैसे भी न निकलने की वजह से किसान इस काम से पीछे हटने लगे हैं। किसान उद्यम सिंह, कर्म चंद, सुरजीत सिंह, चमेल सिंह, कांशी, कमलदेव, चिरंजी लाल, सुरेंद्र कुमार, शक्ति चंद, बलदेव सिंह, सुंदर सिंह, बंशी लाल, धर्म चंद, वीर सिंह, खजाना राम, धर्मपाल डोगरा, दलीप सिंह, मुंशी राम, रतन चंद, सुरेश कुमार, पवन कुमार, कृष्ण चंद, अजय कुमार, रमेश चंद, प्रकाश चंद आदि का कहना है कि लावारिस पशुओं की वजह से उन्होंने अब खेती करना छोड़ दी है। किसानों का कहना है कि किसान अनाज के लिए डिपुओं और दुकानों पर निर्भर हो गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लावारिस पशुओं की समस्या के निजात के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। मुंडखर पंचायत प्रधान प्रकाश चंद का कहना है कि पंचायतों में सरकारी भूमि की कमी है। ऐसे में गोसदनों का निर्माण करना मुश्किल है। मुंडखर पंचायत के लोग लावारिस पशुओं से परेशान हैं। इससे किसान खेतीबाड़ी करना छोड़ रहे हैं। जाहू में गोसदन होने के बावजूद लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए पशुओं को टैग लगाने की योजना सरकार को प्रभावी ढंग से लागू करनी चाहिए।