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Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल कॉलेेज के 50 साल पुराने भवनों को नई तकनीक से किया पक्का
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दंत रोग और एचसीटीएस लैब के भवन का कार्य 90 फीसदी पूरा
आपदा आने पर नहीं गिरेंगे, मरीजों को मिलेगी सुविधा
लोक निर्माण विभाग ने नई तकनीक से भवनों की दीवारों को किया पक्का
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ब्लॉक-ए एचसीटीएस लैब और ब्लॉक बी भवन की दीवारों को नई तकनीक से पक्का करने का कार्य (रेट्रो फिटिंग) 90 फीसदी पूरा कर लिया गया है। रेट्रो फिटिंग का मतलब पुराने भवन में नई तकनीक के साथ निर्माण कार्य को करना होता है ताकि इन भवनों के जीवनकाल को बढ़ाया जा सके। मेडिकल कॉलेज में ये दोनों भवन 50 वर्ष से भी पुराने थे। ऐसे में यह भवन भूकंपरोधी नहीं थे। अगर भूकंप जैसी आपदा होती तो यह भवन ढह सकते थे। ऐसे में इन भवनों की लाइफ को बढ़ाने के लिए रेट्रो फिटिंग कार्य किया गया है। इससे अब मरीजों को भी इलाज करवाने में सुविधा मिलेगी।
इन भवनों में नई तकनीक से सरिया और पत्थर लगाकर प्लास्टर किया गया है। वहीं, ब्लॉक बी में दंत रोग ओपीडी चलाई जाती है। यह कार्य केंद्रीय आपदा प्रबंधन के तहत करवाया गया। इस पर 40 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया। लोक निर्माण विभाग ने यह कार्य किया। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल के यह दोनों भवन बहुत पुराने थे। ऐसे में इन भवनों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए यह कार्य किया गया।
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आपदा आने पर नहीं गिरेंगे, मरीजों को मिलेगी सुविधा
लोक निर्माण विभाग ने नई तकनीक से भवनों की दीवारों को किया पक्का
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ब्लॉक-ए एचसीटीएस लैब और ब्लॉक बी भवन की दीवारों को नई तकनीक से पक्का करने का कार्य (रेट्रो फिटिंग) 90 फीसदी पूरा कर लिया गया है। रेट्रो फिटिंग का मतलब पुराने भवन में नई तकनीक के साथ निर्माण कार्य को करना होता है ताकि इन भवनों के जीवनकाल को बढ़ाया जा सके। मेडिकल कॉलेज में ये दोनों भवन 50 वर्ष से भी पुराने थे। ऐसे में यह भवन भूकंपरोधी नहीं थे। अगर भूकंप जैसी आपदा होती तो यह भवन ढह सकते थे। ऐसे में इन भवनों की लाइफ को बढ़ाने के लिए रेट्रो फिटिंग कार्य किया गया है। इससे अब मरीजों को भी इलाज करवाने में सुविधा मिलेगी।
इन भवनों में नई तकनीक से सरिया और पत्थर लगाकर प्लास्टर किया गया है। वहीं, ब्लॉक बी में दंत रोग ओपीडी चलाई जाती है। यह कार्य केंद्रीय आपदा प्रबंधन के तहत करवाया गया। इस पर 40 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया। लोक निर्माण विभाग ने यह कार्य किया। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल के यह दोनों भवन बहुत पुराने थे। ऐसे में इन भवनों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए यह कार्य किया गया।
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