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हरकत में आया विभाग, फिल्टर बेड की सफाई
Updated Fri, 24 Nov 2017 11:01 PM IST
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बड़सर (हमीरपुर)। घंघोट पेयजल योजना में बिना फिल्ट्रेशन के पेयजल सप्लाई करने के बाद आईपीएच विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने आधा-अधूरे साफ किए हुए फिल्टर बेड में पानी डाल दिया है। विभाग के फिल्टर बेड को नियमित साफ करने के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, आईपीएच विभाग पांच माह पहले टैंकों की सफाई करने का दावा कर रहा है लेकिन टैंकों की स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। ऐसा लग रहा है कि कागजों में ही टैंकों के फिल्टर बेड साफ किए गए। टैंकों की सफाई करने को लेकर घोटाला सामने आने का संदेह हो रहा है।
घंघोट पेयजल योजना में बिना फिल्ट्रेशन के पेयजल सप्लाई करने की खबर के बाद शुक्रवार को आईपीएच ने आनन-फानन में सफाई करवा दी। फिल्टर बेड में आधी-अधूरी सफाई करने के बाद पानी डाल दिया गया। विभाग ने ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर दिया लेकिन सेडिमेशन टैंक को पूरी तरह से साफ नहीं किया गया। इन टैंकों की हालत यह है कि सफाई करने के बावजूद शैवाल जमा हुआ साफ दिख रहा है। विभाग का कहना है कि कर्मचारियों ने बिना विभाग को बताए ही सीधा पानी उठाना शुरू कर दिया, जबकि फिल्टर टैंकों को पांच माह पहले साफ किया था। लेकिन फिल्टर टैंक में उगी घास व झाड़ियां कुछ और ही बयां कर रही हैं। तीन फिल्टर टैंकों में से दो बिल्कुल सूखे पाए गए थे, जबकि एक टैंक में गंदा पानी जमा था तथा उसमें शैवाल जमा हुआ था। ऐसा लग रहा है कि विभाग के सफाई के दावे मात्र कागजों तक ही सीमित हैं।
वहीं, लोगों का कहना है कि आईपीएच विभाग को लोगों के स्वास्थ्य की बिल्कुल परवाह नहीं है। विभाग उन्हें गंदा पानी पिलाता रहा है। विभाग का कोई अधिकारी इस योजना तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने विभाग से इस पूरे मसले की जांच करने की मांग की है। आईपीएच विभाग बड़सर सहायक अभियंता सुशील कुमार का कहना है कि घंघोट पेयजल योजना में फिल्टर बेड को पांच महीने पहले ही साफ किया था। बिना फिल्ट्रेशन के पानी की सप्लाई करना बिल्कुल गलत है। योजना का निरीक्षण किया जाएगा और लोगों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उधर, अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार का कहना है कि साफ किए बिना पानी की सप्लाई नहीं हो सकती है। अगर बिना फिल्टर से सीधे सप्लाई हुई होगी तो कार्रवाई होगी। उन्होंने इस बारे में एसडीओ से लिखित में जवाब तलब करने की बात कही है।
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घंघोट पेयजल योजना में बिना फिल्ट्रेशन के पेयजल सप्लाई करने की खबर के बाद शुक्रवार को आईपीएच ने आनन-फानन में सफाई करवा दी। फिल्टर बेड में आधी-अधूरी सफाई करने के बाद पानी डाल दिया गया। विभाग ने ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर दिया लेकिन सेडिमेशन टैंक को पूरी तरह से साफ नहीं किया गया। इन टैंकों की हालत यह है कि सफाई करने के बावजूद शैवाल जमा हुआ साफ दिख रहा है। विभाग का कहना है कि कर्मचारियों ने बिना विभाग को बताए ही सीधा पानी उठाना शुरू कर दिया, जबकि फिल्टर टैंकों को पांच माह पहले साफ किया था। लेकिन फिल्टर टैंक में उगी घास व झाड़ियां कुछ और ही बयां कर रही हैं। तीन फिल्टर टैंकों में से दो बिल्कुल सूखे पाए गए थे, जबकि एक टैंक में गंदा पानी जमा था तथा उसमें शैवाल जमा हुआ था। ऐसा लग रहा है कि विभाग के सफाई के दावे मात्र कागजों तक ही सीमित हैं।
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वहीं, लोगों का कहना है कि आईपीएच विभाग को लोगों के स्वास्थ्य की बिल्कुल परवाह नहीं है। विभाग उन्हें गंदा पानी पिलाता रहा है। विभाग का कोई अधिकारी इस योजना तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने विभाग से इस पूरे मसले की जांच करने की मांग की है। आईपीएच विभाग बड़सर सहायक अभियंता सुशील कुमार का कहना है कि घंघोट पेयजल योजना में फिल्टर बेड को पांच महीने पहले ही साफ किया था। बिना फिल्ट्रेशन के पानी की सप्लाई करना बिल्कुल गलत है। योजना का निरीक्षण किया जाएगा और लोगों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उधर, अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार का कहना है कि साफ किए बिना पानी की सप्लाई नहीं हो सकती है। अगर बिना फिल्टर से सीधे सप्लाई हुई होगी तो कार्रवाई होगी। उन्होंने इस बारे में एसडीओ से लिखित में जवाब तलब करने की बात कही है।
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