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हाईकोर्ट ने एक पद पर दो प्रिंसिपल मामले का हफ्ते में निपटारा करने के दिए आदेश
Updated Thu, 29 Nov 2018 11:12 PM IST
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हमीरपुर। प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) गौना करौर नादौन में बीते नौ महीनों से एक पद पर सेवाएं दे रहे दो प्रिंसिपल के मामले को एक हफ्ते के भीतर निपटाने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस अजय मोहन गोयल की अदालत ने प्रदेश शिक्षा विभाग के सचिव को एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने और रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। डाइट गौना करौर में 13 मार्च 2018 से एक पद पर दो प्रधानाचार्य सेवाएं दे रहे हैं।
प्रधानाचार्य जगदीश कौशल का शिमला और शिमला से राजेंद्र पाल का हमीरपुर के गौना करौर डाइट के लिए तबादला आदेश हुए थे। लेकिन पुराने प्रधानाचार्य जगदीश कौशल ने प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से स्टे ले लिया था। गत 19 नवंबर को प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने नए पारित आदेश में राजेंद्र पाल को वापस शिमला स्कूल में ज्वाइन करने और जगदीश कौशल को डाइट में ही तैनाती के आदेश दिए थे। लेकिन इस फैसले को राजेंद्र पाल ने प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में एक हफ्ते के भीतर निर्णय लेने के आदेश पारित किए हैं। इसके साथ ही प्रदेश उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर के प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया है। बता दें कि बहुचर्चित इस मामले में जहां प्रदेश सरकार को राजस्व के तौर पर नुकसान हो रहा है। वहीं डाइट में मौजूदा स्टाफ भी दो प्रधानाचार्यों के आदेशों से काफी परेशान हैै।
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प्रधानाचार्य जगदीश कौशल का शिमला और शिमला से राजेंद्र पाल का हमीरपुर के गौना करौर डाइट के लिए तबादला आदेश हुए थे। लेकिन पुराने प्रधानाचार्य जगदीश कौशल ने प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से स्टे ले लिया था। गत 19 नवंबर को प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने नए पारित आदेश में राजेंद्र पाल को वापस शिमला स्कूल में ज्वाइन करने और जगदीश कौशल को डाइट में ही तैनाती के आदेश दिए थे। लेकिन इस फैसले को राजेंद्र पाल ने प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में एक हफ्ते के भीतर निर्णय लेने के आदेश पारित किए हैं। इसके साथ ही प्रदेश उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर के प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया है। बता दें कि बहुचर्चित इस मामले में जहां प्रदेश सरकार को राजस्व के तौर पर नुकसान हो रहा है। वहीं डाइट में मौजूदा स्टाफ भी दो प्रधानाचार्यों के आदेशों से काफी परेशान हैै।
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