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गृह क्षेत्र में सेवाएं दे रहे लोनिवि और राजस्व विभाग के अधिकारी
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:17 PM IST
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर में नियुक्ति एवं पदोन्नति नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। सख्त नियमों के बावजूद जिला के कई सरकारी विभागों में अधिकारी अपने गृह क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। नियमों के मुताबिक कई ऐसे अधिकारी हैं, जो अपने गृह क्षेत्र में सेवाएं नहीं दे सकते। इनमें राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मुख्य रूप से शामिल हैं।
वहीं कई सरकारी अधिकारियों ने पैतृक गांव का स्थायी पता दर्शाकर नियुक्ति वाले जिले में मकान बना रखे हैं। मकान में बिजली और पानी के मीटर तक उनके नाम पर हैं। बावजूद वह कार्मिक विभाग में पैतृक गांव का निवास दर्शाकर कई तरह के लाभ उठा रहे हैं। राजस्व विभाग में कानूनगो अपने गृह क्षेत्र में 25 किलोमीटर के दायर के भीतर सेवाएं नहीं दे सकते। इसी तरह नायब तहसीलदार और तहसीलदार व एसडीएम की भी अपने गृह क्षेत्र में नियुक्ति नहीं हो सकती। लेकिन हमीरपुर में इन नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। इसी तरह लोक निर्माण विभाग में भी कई अधिकारी अपने गृह क्षेत्र में सेवाएं देकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। लेकिन राजनीतिक आकाओं का बर्दहस्त होने के चलते उच्च अधिकारी भी कार्रवाई करने से गुरेज कर रहे हैं।
यह हैं नियुक्तियों के नियम-
पटवारी अपने गृह पटवार सर्किल में, कानूनगो अपनी तहसील में, नायब तहसीलदार और तहसीलदार अपने सब डिवीजन में सेवाएं नहीं दे सकते हैं। इसी तरह लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड और आईपीएच विभाग में अधीक्षण अभियंता अपने जिला में सेवाएं नहीं दे सकते। सरकार का मानना है कि गृह क्षेत्र में नियुक्तियों से परिवार व रिश्तेदारों को अनावश्यक फायदा पहुंचाने की संभावना अधिक रहती है।
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जिला राजस्व अधिकारी पवन शर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग में आरएंडपी नियमों के तहत कोई भी अधिकारी अपने गृह क्षेत्र में सेवाएं नहीं दे सकता। हमीरपुर जिला में कई जगह अधिकारियों के अपने गृह पटवारी सर्किल, तहसील व उपमंडल में सेवाएं देने की सूचना मिली है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा का कहना है कि उनके सेवाकाल के दौरान राजस्व विभाग में कोई भी नई नियुक्ति संबंधित अधिकारी व कर्मचारी की गृह क्षेत्र में नहीं हुई है। पुरानी नियुक्तियों की जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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वहीं कई सरकारी अधिकारियों ने पैतृक गांव का स्थायी पता दर्शाकर नियुक्ति वाले जिले में मकान बना रखे हैं। मकान में बिजली और पानी के मीटर तक उनके नाम पर हैं। बावजूद वह कार्मिक विभाग में पैतृक गांव का निवास दर्शाकर कई तरह के लाभ उठा रहे हैं। राजस्व विभाग में कानूनगो अपने गृह क्षेत्र में 25 किलोमीटर के दायर के भीतर सेवाएं नहीं दे सकते। इसी तरह नायब तहसीलदार और तहसीलदार व एसडीएम की भी अपने गृह क्षेत्र में नियुक्ति नहीं हो सकती। लेकिन हमीरपुर में इन नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। इसी तरह लोक निर्माण विभाग में भी कई अधिकारी अपने गृह क्षेत्र में सेवाएं देकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। लेकिन राजनीतिक आकाओं का बर्दहस्त होने के चलते उच्च अधिकारी भी कार्रवाई करने से गुरेज कर रहे हैं।
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यह हैं नियुक्तियों के नियम-
पटवारी अपने गृह पटवार सर्किल में, कानूनगो अपनी तहसील में, नायब तहसीलदार और तहसीलदार अपने सब डिवीजन में सेवाएं नहीं दे सकते हैं। इसी तरह लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड और आईपीएच विभाग में अधीक्षण अभियंता अपने जिला में सेवाएं नहीं दे सकते। सरकार का मानना है कि गृह क्षेत्र में नियुक्तियों से परिवार व रिश्तेदारों को अनावश्यक फायदा पहुंचाने की संभावना अधिक रहती है।
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जिला राजस्व अधिकारी पवन शर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग में आरएंडपी नियमों के तहत कोई भी अधिकारी अपने गृह क्षेत्र में सेवाएं नहीं दे सकता। हमीरपुर जिला में कई जगह अधिकारियों के अपने गृह पटवारी सर्किल, तहसील व उपमंडल में सेवाएं देने की सूचना मिली है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा का कहना है कि उनके सेवाकाल के दौरान राजस्व विभाग में कोई भी नई नियुक्ति संबंधित अधिकारी व कर्मचारी की गृह क्षेत्र में नहीं हुई है। पुरानी नियुक्तियों की जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।