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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   मनरेगा में गोलमाल, पंचायत प्रतिनिधियों पर गिरेगी गाज

मनरेगा में गोलमाल, पंचायत प्रतिनिधियों पर गिरेगी गाज

Thu, 22 Feb 2018 11:35 PM IST
Updated Thu, 22 Feb 2018 11:35 PM IST
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भोरंज(हमीरपुर)। उपमंडल की ग्राम पंचायत में वर्ष 2006 में हुए गोलमाल की लोकपाल मनरेगा हमीरपुर द्वारा की गई जांच के बाद पंचायत के तमाम पूर्व नुमाइंदों और सचिव पर गाज गिरने की संभावनाएं हैं। इस संबंध में लोकपाल ने जो जांच रिपोर्ट अडिशनल डायरेक्टर ग्रामीण विकास विभाग शिमला को सौंपी है, उसमें गोलमाल के लिए पंचायती राज एक्ट 1994 के तहत सभी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की टिप्पणी की गई है। जांच रिपोर्ट की प्रतियां संयुक्त सचिव ग्रामीण विकास विभाग, जिला पंचायत अधिकारी और बीडीओ भोरंज को प्रेषित की गई हैं।
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पंचायत के ग्रामीण बख्शी राम पुत्र चुन्नी लाल ने 3 मार्च 2014 को एक शिकायत पत्र बीडीओ भोरंज को दिया। जिसके मुताबिक साल 2006 में उपमंडल की पंचायत के तत्कालीन और वर्तमान उपप्रधान ने अपने पद का दुरुपयोग करके जाली मास्टररोल तैयार करके 12,295 रुपये की धनराशि का गोलमाल किया है।
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उसने इस मास्टररोल में अपने भाई को मजदूर दिखाया जो 20 जनवरी 2004 से 20 जनवरी 2008 तक लोअर भांवला के एक निजी स्कूल में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्य कर रहा था। उस मास्टररोल में उसकी हाजरियां और हस्ताक्षर फर्जी तौर पर करके उसे 12,295 रुपये की अदायगी की गई। दिए गए तमाम साक्ष्यों के साथ बीडीओ ने जब इस मामले की जांच की तो शिकायत सही पाई गई। जिस पर डीपीओ हमीरपुर ने तत्कालीन प्रधान और उपप्रधान को शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया। इससे पहले की रिकवरी भरने को किसी अथॉरिटी के नोटिस आते तत्कालीन प्रधान ने 12,295 की धनराशि एक फरवरी 2016 को रसीद नंबर 15,474 के तहत पंचायत के खाते में जमा करवा दी और मामला शांत हो गया। इसके बाद ग्रामीणों बृजलाल, धर्म सिंह, रोशन और कमलजीत ने एक संयुक्त शिकायत उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को भेजी। जिस पर कोर्ट ने विभाग से रिपोर्ट तलब की। जांच में लोकपाल मनरेगा ने पाया कि इस सारे मामले में तत्कालीन प्रधान और उपप्रधान ने पद का दुरुपयोग करके जाली मास्टररोल तैयार किए। लोकपाल के मुताबिक सभी ने अपने बयानों में कबूल किया है कि मास्टररोल पर हस्ताक्षर जाली हैं। सचिव ने भी जांच के दौरान माना है कि अदायगी से पहले मास्टररोल की जांच नहीं की गई। उधर, लोकपाल मनरेगा विद्यासागर शर्मा ने कहा कि मामले की जांच पूर्ण हो चुकी है। पंचायत में वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं, जिसकी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक को भेज दी गई है।
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