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श्राद्ध पक्ष में एक तो महंगाई उपर से मंदी की मार
Updated Wed, 26 Sep 2018 11:06 PM IST
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अवाहदेवी (हमीरपुर)। श्राद्ध पक्ष में महंगाई और मंदी की मार से लोग परेशान हैं। शास्त्रों के अनुसार 24 सितंबर से 8 अक्तूबर तक श्राद्ध पक्ष मनाया जा रहा है। जिसके चलते सभी शुभकार्य वर्जित हैं। जिस कारण बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। जिले के बाजारों में ज्वेलरी, कपड़ा, भवन निर्माण समेत अन्य दुकानों में मंदी छाई है। बिक्री कम होने से कारोबारी परेशान हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ गया है। महंगाई के चलते श्राद्ध छोड़ने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंडितों का कहना है कि 9 अक्तूबर को सुबह श्राद्ध समाप्त हो जाएंगे और 9 अक्तूबर से ही शरद नवरात्र का आगाज हो जाएगा। उसके बाद व्यापारिक संस्थानों में कार्य में तेजी आ जाएगी। तारा अस्त होने से दो माह तक विवाह-शादियां नहीं होंगी। जिसमें फिर व्यापारियों को थोड़ी मंदी की मार झेलनी पड़ेगी।
पंडित संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार पित्तर पूजन यानी श्राद्ध कर्म से पित्तर संतुष्ट होकर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में प्रत्येक मनुष्यों को अपने पित्तरों की संतुष्टि और उनकी तृप्ति तथा उनका शुभाशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनका श्राद्ध श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। जो लोग अपने पूर्वजों यानी पित्तर की संपत्ति का उपभोग तो करते हैं लेकिन, उनका श्राद्ध नहीं करते हैं, ऐसे लोग अपने ही पित्तर से अभिशापित होकर नाना प्रकार के दुखों का भाजन करते हैं। इस कार्य में साफ-सफाई तथा शांत चित और धैर्य से पूजा पाठ करें। पूजन के लिए तिल, चावल, फल आदि का उपयोग किया जाता है। श्राद्ध अपने ही घर में किया जाना चाहिए। तीर्थ स्थानों की अपेक्षा घर में श्राद्ध करने का अधिक पुण्य मिलता है। इससे पित्तरों का घर के साथ बना घनिष्ठ संबंध समाप्त होने में भी सहायता होती है।
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पंडित संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार पित्तर पूजन यानी श्राद्ध कर्म से पित्तर संतुष्ट होकर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में प्रत्येक मनुष्यों को अपने पित्तरों की संतुष्टि और उनकी तृप्ति तथा उनका शुभाशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनका श्राद्ध श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। जो लोग अपने पूर्वजों यानी पित्तर की संपत्ति का उपभोग तो करते हैं लेकिन, उनका श्राद्ध नहीं करते हैं, ऐसे लोग अपने ही पित्तर से अभिशापित होकर नाना प्रकार के दुखों का भाजन करते हैं। इस कार्य में साफ-सफाई तथा शांत चित और धैर्य से पूजा पाठ करें। पूजन के लिए तिल, चावल, फल आदि का उपयोग किया जाता है। श्राद्ध अपने ही घर में किया जाना चाहिए। तीर्थ स्थानों की अपेक्षा घर में श्राद्ध करने का अधिक पुण्य मिलता है। इससे पित्तरों का घर के साथ बना घनिष्ठ संबंध समाप्त होने में भी सहायता होती है।
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