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सुबह से लेकर शाम तक चलता रहा दुकान तोड़ने का नाटक
Updated Fri, 09 Feb 2018 10:37 PM IST
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बाल स्कूल के सामने अवैध कब्जे को हटाते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। जिला मुख्यालय हमीरपुर में शिक्षा विभाग की जमीन पर बने अवैध भवन को गिराने की मुहिम शुक्रवार को फेल हो गई। सिंगल ईंटों की दीवारों पर खड़ी दोमंजिला दुकान को तोड़ने के लिए लोनिवि की जेसीबी ने सात घंटे तक खूब धुआं उड़ाया, लेकिन शाम तक दुकान नहीं तोड़ पाए। सुबह दस बजे तहसीलदार, कानूनगो, लोक निर्माण विभाग, नगर परिषद समेत भारी संख्या में पुलिस बल दुकान को तुड़वाने के लिए मौके पर पहुंच चुका था, लेकिन दिनभर जिस नाटकीय अंदाज में दुकान को तोड़ने का कार्य किया गया, उसकी लोगों में खूब चर्चा हो रही है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जेसीबी सात घंटे में क्यों दुकान को नहीं तोड़ पाई?
शाम चार बजे पीड़ित दुकानदार हमीरपुर न्यायालय से स्टे के ऑर्डर ले आया। इसके बाद दुकान को आधा तोड़ने के बाद बीच में ही काम रोकना पड़ा। हालांकि, मामूली तोड़फोड़ के बाद दोमंजिला भवन जर्जर हो गया है, जिससे गांधी चौक पर टहलने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है। हालांकि, प्रशासन ने रात भर पुलिस का एक जवान जर्जर भवन के बाहर तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
बाक्स:
डीसी ने जारी किए थे अवैध भवन को तोड़ने के आदेश
शिक्षा विभाग की जमीन पर नगर परिषद ने दोमंजिला भवन का निर्माण करने के बाद इसे एक कारोबारी को मासिक किराये पर आवंटित किया था। शिक्षा विभाग की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने राजस्व विभाग से जमीन की निशानदेही करवाई। इसमें पूरी जमीन शिक्षा विभाग की निकली। इसके बाद उपायुक्त हमीरपुर ने दुकान को तोड़ने के आदेश जारी किए। लेकिन, दुकानदार ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी, जो शुक्रवार को खत्म हो गई। इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी समेत टीम को संबंधित दुकान को तोड़ने के लिए भेज दिया।
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सीएम कार्यालय से दनदनाते रहे दिनभर फोन
नगर परिषद द्वारा निर्मित दुकान को तोड़ने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय तक फोन किए गए। दिनभर फोन आते रहे, लेकिन न तो दुकानें टूटीं और न ही दुकानों को तोड़ने की प्रक्रिया रुकी। नगर परिषद के कुछ पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों पर इसकी गाज गिर सकती है। इस गाज से बचने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे अधिकारियों तक संपर्क किया गया। दुकानों को तोड़ने से बचाने के लिए प्रशासन के ऊपर भी खूब दबाव डाला गया।
नक्शा, पानी और बिजली कनेेक्शन पर भी उठे सवाल
इस सारे मामले को लेकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग की जमीन पर वर्षों पहले दुकान बनाने के लिए नगर परिषद ने कैसे नक्शा पास कर दिया। इसके बाद इस भवन में पानी और बिजली के कनेक्शन भी दे दिए गए। मलकीयती जमीन होने के बावजूद लोगों को नक्शा पास करवाने और बिजली तथा पानी का कनेक्शन लेने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है लेकिन यहां आसानी से अवैध निर्माण होने के बाद नगर परिषद कई सालों तक दुकानदार से किराया भी वसूलती रही। दुकानदार ने नगर परिषद से नुकसान की भरपाई करने के साथ मुआवजे की मांग की है।
एसडीएम हमीरपुर अरिंदम चौधरी ने कहा कि प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग पर बनी दुकानों की निशानदेही करवाई थी। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में दुकानें अवैध पाई गईं थीं। इसके बाद एक हफ्ते का अल्टीमेटम भी दिया गया था, लेकिन शुक्रवार को मोहलत खत्म हो चुकी थी। इसके बाद लोनिवि, नगर परिषद और राजस्व विभाग की टीम अवैध निर्माण तोड़ने पहुंची थी, लेकिन शाम को कोर्ट से स्टे ऑर्डर मिलने के कारण प्रक्रिया रोकनी पड़ी है।
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हमीरपुर। जिला मुख्यालय हमीरपुर में शिक्षा विभाग की जमीन पर बने अवैध भवन को गिराने की मुहिम शुक्रवार को फेल हो गई। सिंगल ईंटों की दीवारों पर खड़ी दोमंजिला दुकान को तोड़ने के लिए लोनिवि की जेसीबी ने सात घंटे तक खूब धुआं उड़ाया, लेकिन शाम तक दुकान नहीं तोड़ पाए। सुबह दस बजे तहसीलदार, कानूनगो, लोक निर्माण विभाग, नगर परिषद समेत भारी संख्या में पुलिस बल दुकान को तुड़वाने के लिए मौके पर पहुंच चुका था, लेकिन दिनभर जिस नाटकीय अंदाज में दुकान को तोड़ने का कार्य किया गया, उसकी लोगों में खूब चर्चा हो रही है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जेसीबी सात घंटे में क्यों दुकान को नहीं तोड़ पाई?
शाम चार बजे पीड़ित दुकानदार हमीरपुर न्यायालय से स्टे के ऑर्डर ले आया। इसके बाद दुकान को आधा तोड़ने के बाद बीच में ही काम रोकना पड़ा। हालांकि, मामूली तोड़फोड़ के बाद दोमंजिला भवन जर्जर हो गया है, जिससे गांधी चौक पर टहलने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है। हालांकि, प्रशासन ने रात भर पुलिस का एक जवान जर्जर भवन के बाहर तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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डीसी ने जारी किए थे अवैध भवन को तोड़ने के आदेश
शिक्षा विभाग की जमीन पर नगर परिषद ने दोमंजिला भवन का निर्माण करने के बाद इसे एक कारोबारी को मासिक किराये पर आवंटित किया था। शिक्षा विभाग की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने राजस्व विभाग से जमीन की निशानदेही करवाई। इसमें पूरी जमीन शिक्षा विभाग की निकली। इसके बाद उपायुक्त हमीरपुर ने दुकान को तोड़ने के आदेश जारी किए। लेकिन, दुकानदार ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी, जो शुक्रवार को खत्म हो गई। इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी समेत टीम को संबंधित दुकान को तोड़ने के लिए भेज दिया।
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सीएम कार्यालय से दनदनाते रहे दिनभर फोन
नगर परिषद द्वारा निर्मित दुकान को तोड़ने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय तक फोन किए गए। दिनभर फोन आते रहे, लेकिन न तो दुकानें टूटीं और न ही दुकानों को तोड़ने की प्रक्रिया रुकी। नगर परिषद के कुछ पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों पर इसकी गाज गिर सकती है। इस गाज से बचने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे अधिकारियों तक संपर्क किया गया। दुकानों को तोड़ने से बचाने के लिए प्रशासन के ऊपर भी खूब दबाव डाला गया।
नक्शा, पानी और बिजली कनेेक्शन पर भी उठे सवाल
इस सारे मामले को लेकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग की जमीन पर वर्षों पहले दुकान बनाने के लिए नगर परिषद ने कैसे नक्शा पास कर दिया। इसके बाद इस भवन में पानी और बिजली के कनेक्शन भी दे दिए गए। मलकीयती जमीन होने के बावजूद लोगों को नक्शा पास करवाने और बिजली तथा पानी का कनेक्शन लेने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है लेकिन यहां आसानी से अवैध निर्माण होने के बाद नगर परिषद कई सालों तक दुकानदार से किराया भी वसूलती रही। दुकानदार ने नगर परिषद से नुकसान की भरपाई करने के साथ मुआवजे की मांग की है।
एसडीएम हमीरपुर अरिंदम चौधरी ने कहा कि प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग पर बनी दुकानों की निशानदेही करवाई थी। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में दुकानें अवैध पाई गईं थीं। इसके बाद एक हफ्ते का अल्टीमेटम भी दिया गया था, लेकिन शुक्रवार को मोहलत खत्म हो चुकी थी। इसके बाद लोनिवि, नगर परिषद और राजस्व विभाग की टीम अवैध निर्माण तोड़ने पहुंची थी, लेकिन शाम को कोर्ट से स्टे ऑर्डर मिलने के कारण प्रक्रिया रोकनी पड़ी है।