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तीन फिल्टर बैड खराब, बिना फिल्ट्रेशन हो रही पेयजल आपूर्ति
Updated Thu, 23 Nov 2017 10:36 PM IST
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बड़सर(हमीरपुर)। उपमंडल के तहत आईपीएच विभाग की घंघोट पेयजल योजना में बिना फिल्टरेशन के ही पेयजल सप्लाई हो रही है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन आईपीएच विभाग के अधिकारी इस बारे में अनजान बने हुए हैं। आश्चर्य है कि घंघोट पेयजल योजना के तीनों फिल्टर बंद पड़े हैं तथा बिना पानी के यह सूखे पड़े हुए हैं। तय समय के भीतर फिल्टर बेड की साफ सफाई करना अनिवार्य है। हालत यह है फिल्टर बेड की रेत तक सूख गई तथा काफी बड़ी घास व झाड़ियां उग आई हैं।
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सालों से फिल्टर बेड का इस्तेमाल ही नहीं किया गया है या फिर कागजों में सिमट कर रह गया है। पेयजल योजना में नाले से सीधी सप्लाई भंडारण टैंक में की जा रही है तथा इसमें कचरा पड़ा हुआ साफ दिख रहा है। लोगों के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही होने से आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। राजधानी शिमला व अन्य क्षेत्रों में फिल्टरेशन व गंदे पानी की सप्लाई से पीलिया फैलने के मामले आए थे तथा कई लोगों की मौत तक हो गई थी। इस योजना में फिल्टर बेड सूखे पाए जाने से आईपीएच विभाग की लापरवाही उजागर हुई थी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस पेयजल सप्लाई योजना की जांच करने व कार्रवाई करने की मांग की है।
तीन पंचायतों की प्यास बुझा रही योजना
घंघोट पेयजल स्कीम से तीन पंचायतों घंघोट, उसनाड़ कलां तथा झंझयाणी पंचायत के दर्जन भर गांवों घंघोट, बडू, गुतियाना, बटियाना, टगैन, जजल, घटा पंगा, धर्मशाला पिंड, नयन, तप्पा तथा रपड़ के लोगों को पानी की सप्लाई की जाती है। इतना ही नहीं आईपीएच विभाग के अधिकारी योजना का निरीक्षण तक करने नहीं गए हैं तथा इस बारे में अनजान बने हुए हैं। हालत यह है कि जिस नाले से पानी स्टोर किया जाता है। उसे फिल्टर बेड में डालने की बजाए सीधा लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है। जो आईपीएच विभाग की लापरवाही को दिखा रहा है। बिना फिल्टर व क्लोरीनेशन के पेयजल सप्लाई करने से कई बीमारियां फैल सकती हैं।
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आईपीएच विभाग बड़सर के सहायक अभियंता सुशील कुमार का कहना है कि विभाग द्वारा योजनाओं में समय समय पर फिल्टरेशन की जाती है लेकिन इस योजना में फिल्टरेशन नहीं होने के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने योजना का निरीक्षण करने तथा फिल्टर बेड की साफ सफाई करने का आश्वासन दिया है।
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ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सालों से फिल्टर बेड का इस्तेमाल ही नहीं किया गया है या फिर कागजों में सिमट कर रह गया है। पेयजल योजना में नाले से सीधी सप्लाई भंडारण टैंक में की जा रही है तथा इसमें कचरा पड़ा हुआ साफ दिख रहा है। लोगों के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही होने से आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। राजधानी शिमला व अन्य क्षेत्रों में फिल्टरेशन व गंदे पानी की सप्लाई से पीलिया फैलने के मामले आए थे तथा कई लोगों की मौत तक हो गई थी। इस योजना में फिल्टर बेड सूखे पाए जाने से आईपीएच विभाग की लापरवाही उजागर हुई थी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस पेयजल सप्लाई योजना की जांच करने व कार्रवाई करने की मांग की है।
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तीन पंचायतों की प्यास बुझा रही योजना
घंघोट पेयजल स्कीम से तीन पंचायतों घंघोट, उसनाड़ कलां तथा झंझयाणी पंचायत के दर्जन भर गांवों घंघोट, बडू, गुतियाना, बटियाना, टगैन, जजल, घटा पंगा, धर्मशाला पिंड, नयन, तप्पा तथा रपड़ के लोगों को पानी की सप्लाई की जाती है। इतना ही नहीं आईपीएच विभाग के अधिकारी योजना का निरीक्षण तक करने नहीं गए हैं तथा इस बारे में अनजान बने हुए हैं। हालत यह है कि जिस नाले से पानी स्टोर किया जाता है। उसे फिल्टर बेड में डालने की बजाए सीधा लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है। जो आईपीएच विभाग की लापरवाही को दिखा रहा है। बिना फिल्टर व क्लोरीनेशन के पेयजल सप्लाई करने से कई बीमारियां फैल सकती हैं।
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आईपीएच विभाग बड़सर के सहायक अभियंता सुशील कुमार का कहना है कि विभाग द्वारा योजनाओं में समय समय पर फिल्टरेशन की जाती है लेकिन इस योजना में फिल्टरेशन नहीं होने के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने योजना का निरीक्षण करने तथा फिल्टर बेड की साफ सफाई करने का आश्वासन दिया है।