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मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रहे पेन किलर व सॉफ्ट प्लास्टर रोल
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हमीरपुर। डॉ. राधा कृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में दर्द निवारक दवा और सॉफ्ट प्लास्टर रोल नहीं मिल रहे हैं। हालांकि, सरकार ने अस्पतालों में 330 दवाइयां निशुल्क उपलब्ध करवाई हैं लेकिन, हमीरपुर अस्पताल में मरीजों को पेन किलर और सॉफ्ट प्लास्टर रोल नहीं मिल रहे हैं। इस कारण उन्हें बाहरी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर प्लास्टर रोल और दवाई खरीदनी पड़ रही है। बाहरी निजी मेडिकल स्टोर पर 250 से 280 रुपये तक प्लास्टर रोल मिल रहा है। इस कारण गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को आर्थिक हानि झेलनी पड़ रही है। प्लास्टर का सामान भी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध रहता है लेकिन, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में लोगों को इसके लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बीते बुधवार को टांग में फ्रेक्चर की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे एक मरीज को जब चिकित्सक ने दवाइयां लिखीं और प्लास्टर करवाने के लिए अस्पताल में निशुल्क मिलने वाले प्लास्टर के सामान को लाने के लिए कहा तो उसने अपने भतीजे को दवाई काउंटर पर भेजा लेकिन, काउंटर पर उसे सॉफ्ट प्लास्टर रोल नहीं दिया गया। इसके साथ ही जो पेन किलर चिकित्सक ने लिखी थी, वह भी मरीज को उपलब्ध नहीं हुई। इस पर लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर रोष व्यक्त किया है। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन से दवाइयां उपलब्ध करवाने की मांग की है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि इस बारे में निशुल्क दवाइयों के इंचार्ज ही कुछ कह सकते हैं। वहीं, अस्पताल के निशुल्क दवाइयों के इंचार्ज डॉ. मोहन ने कहा कि हो सकता है कि जिस प्रकृति की पेन किलर चिकित्सक ने लिखी हो वह निशुल्क मिलने वाली 330 दवाइयों की श्रेणी में न आती हो। उन्होंने कहा कि सॉफ्ट प्लास्टर रोल के बारे में जांच की जाएगी। मार्च माह में दवाई कंपनी के साथ टेंडर समाप्त हुए हैं, अभी तक नए टेंडर नहीं हुए हैं। इसलिए कुछेक दवाइयों की कमी बन सकती है। यदि मरीज गरीब हों और आयुष्मान कार्ड धारक या हिम केयर कार्ड धारक हों तो उन्हें बाहर से खरीदकर भी दवाइयां या प्लास्टर रोल अस्पताल के अंदर निशुल्क उपलब्ध करवा दिए जाते हैं।
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बीते बुधवार को टांग में फ्रेक्चर की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे एक मरीज को जब चिकित्सक ने दवाइयां लिखीं और प्लास्टर करवाने के लिए अस्पताल में निशुल्क मिलने वाले प्लास्टर के सामान को लाने के लिए कहा तो उसने अपने भतीजे को दवाई काउंटर पर भेजा लेकिन, काउंटर पर उसे सॉफ्ट प्लास्टर रोल नहीं दिया गया। इसके साथ ही जो पेन किलर चिकित्सक ने लिखी थी, वह भी मरीज को उपलब्ध नहीं हुई। इस पर लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर रोष व्यक्त किया है। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन से दवाइयां उपलब्ध करवाने की मांग की है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि इस बारे में निशुल्क दवाइयों के इंचार्ज ही कुछ कह सकते हैं। वहीं, अस्पताल के निशुल्क दवाइयों के इंचार्ज डॉ. मोहन ने कहा कि हो सकता है कि जिस प्रकृति की पेन किलर चिकित्सक ने लिखी हो वह निशुल्क मिलने वाली 330 दवाइयों की श्रेणी में न आती हो। उन्होंने कहा कि सॉफ्ट प्लास्टर रोल के बारे में जांच की जाएगी। मार्च माह में दवाई कंपनी के साथ टेंडर समाप्त हुए हैं, अभी तक नए टेंडर नहीं हुए हैं। इसलिए कुछेक दवाइयों की कमी बन सकती है। यदि मरीज गरीब हों और आयुष्मान कार्ड धारक या हिम केयर कार्ड धारक हों तो उन्हें बाहर से खरीदकर भी दवाइयां या प्लास्टर रोल अस्पताल के अंदर निशुल्क उपलब्ध करवा दिए जाते हैं।
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