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मर्ज हो सकते हैं बिझड़ी शिक्षा खंड के दर्जनभर स्कूल
Updated Sun, 11 Mar 2018 10:24 PM IST
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बिझड़ी (हमीरपुर)। उपमंडल बड़सर के एक दर्जन स्कूलों पर मर्ज होने की तलवार लटक गई है। प्राथमिक शिक्षा खंड बिझड़ी के स्कूलों में नए सत्र में बच्चों की संख्या अगर शिक्षा विभाग के अनुरूप नहीं रहती है तो एक दर्जन के करीब प्राथमिक स्कूल बंद हो सकते हैं। शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के अनुसार जिले में जो प्राथमिक स्कूल एक अध्यापक के सहारे चल रहे हैं या फिर जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या 12 से कम है, ऐसे स्कूलों का ब्योरा जिला उपनिदेशक कार्यालय से भेज दिया गया है। वर्तमान में विकास खंड बिझड़ी के करीब एक दर्जन स्कूलों में बच्चों की संख्या 12 से भी कम है।
नए सत्र में यदि इन स्कूलों में छात्रों की संख्या में इजाफा नहीं होता है तो प्रदेश सरकार और भी कई स्कूलों को मर्ज करने का फैसला ले सकती है। शिक्षा खंड बिझड़ी के तहत 15 प्राथमिक स्कूल एक-एक अध्यापक के सहारे चल रहे हैं। बिझड़ी खंड में कुल 107 प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 25 स्कूलों में बच्चों की संख्या दो दर्जन से कम है, तो चार स्कूलों में बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। ऐसे में एक अध्यापक के हवाले पांच कक्षाओं का जिम्मा बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है।
बिझड़ी के आठ स्कूलों लोहारड़ा, चंबेह, चलसाई, नलबाड़, मतकर, अंबोटा, बतलाऊ और सकरोह में बच्चों की संख्या 5 से 12 तक ही है। इसके अलावा 17 स्कूलों में बच्चों की संख्या 14 तक ही है। ऐसे में यदि इन स्कूलों की संख्या बरकरार नहीं रही तो इन स्कूलों के मर्ज होने की तलवार लटक सकती है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा अधिकारी राजकुमार का कहना है कि अध्यापकों के तबादले और सेवानिवृत्ति के बाद कई प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों के पद रिक्त हुए हैं। स्कूलों में चल रही अध्यापकों की कमी की रिपोर्ट और बच्चों की संख्या और स्कूलों की भौगोलिक स्थिति रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।
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नए सत्र में यदि इन स्कूलों में छात्रों की संख्या में इजाफा नहीं होता है तो प्रदेश सरकार और भी कई स्कूलों को मर्ज करने का फैसला ले सकती है। शिक्षा खंड बिझड़ी के तहत 15 प्राथमिक स्कूल एक-एक अध्यापक के सहारे चल रहे हैं। बिझड़ी खंड में कुल 107 प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 25 स्कूलों में बच्चों की संख्या दो दर्जन से कम है, तो चार स्कूलों में बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। ऐसे में एक अध्यापक के हवाले पांच कक्षाओं का जिम्मा बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है।
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बिझड़ी के आठ स्कूलों लोहारड़ा, चंबेह, चलसाई, नलबाड़, मतकर, अंबोटा, बतलाऊ और सकरोह में बच्चों की संख्या 5 से 12 तक ही है। इसके अलावा 17 स्कूलों में बच्चों की संख्या 14 तक ही है। ऐसे में यदि इन स्कूलों की संख्या बरकरार नहीं रही तो इन स्कूलों के मर्ज होने की तलवार लटक सकती है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा अधिकारी राजकुमार का कहना है कि अध्यापकों के तबादले और सेवानिवृत्ति के बाद कई प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों के पद रिक्त हुए हैं। स्कूलों में चल रही अध्यापकों की कमी की रिपोर्ट और बच्चों की संख्या और स्कूलों की भौगोलिक स्थिति रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।
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