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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Gandhi Jayanti Today: The problems in Shimla that Bapu had observed persist even after a hundred years.

गांधी जयंती आज: सौ साल बाद भी कायम हैं शिमला की वे समस्याएं, जिन्हें बापू ने किया था महसूस, पढ़ें रोचक जानकारी

Fri, 02 Oct 2026 06:30 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, शिमला।
विश्वास भारद्वाज, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Oct 2026 06:30 AM IST
सार

शिमला में करीब सौ साल पहले महात्मा गांधी ने पानी की किल्लत, संकरी सड़कों और भीड़-भाड़ जैसी जिन समस्याओं को उजागर किया था वे आज भी बरकरार हैं। अंग्रेजों ने जो रेलवे ट्रैक शिमला पहुंचाया था, वो एक सदी बाद भी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सका है। आज भी शहर के लोग पीने के पानी की किल्लत से परेशान हैं। 

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Gandhi Jayanti Today: The problems in Shimla that Bapu had observed persist even after a hundred years.
गांधी जयंती विशेष। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में करीब सौ साल पहले महात्मा गांधी ने पानी की किल्लत, संकरी सड़कों और भीड़-भाड़ जैसी जिन समस्याओं को उजागर किया था वे आज भी बरकरार हैं। अंग्रेजों ने जो रेलवे ट्रैक शिमला पहुंचाया था, वो एक सदी बाद भी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सका है। आज भी शहर के लोग पीने के पानी की किल्लत से परेशान हैं। सड़क की समस्या का भी समाधान नहीं हुआ, बल्कि ट्रैफिक जाम के रूप में यह और विकराल हो चुकी है। वर्ष 1921 में मोहन दास कर्मचंद गांधी(महात्मा गांधी) एक सप्ताह(12 से 18 मई) के शिमला प्रवास पर आए थे। दसी दाैरान गांधी ने संस्मरण लिखा, जिसमें उन्होंने 7,500 फीट की ऊंचाई पर बसे शिमला को 500वीं मंजिल कहा था।  22 मई 1921 को नवजीवन के गुजराती अंक में छपे इस संस्मरण में उन्होंने शासन को जनता की पहुंच से दूर बताते हुए इस समस्याओं का समाधान करने के लिए कहा था। 

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 महात्मा गांधी ने संस्मरण में ये लिखा था
 गांधी इन शिमला पुस्तक के लेखक विनोद भारद्वाज के अनुसार, सौ साल बाद भी शिमला के सामने वही चुनौतियां बरकरार हैं, जिनसे महात्मा गांधी चिंतित थे। महात्मा गांधी ने लिखा था कि ऊंचाई पर स्थित शिमला से देश का शासन चलाया जा रहा है, जबकि करोड़ों लोग नीचे गरीबी और भूख से जूझ रहे हैं। गांधी ने लिखा कि पानी करीब 2,000 फीट नीचे से ऊपर लाया जाता था। जिस भवन में गांधी ठहरे, वहां पानी उपलब्ध था, लेकिन मशक ढोने वाले मजदूर मीलों दूर से पानी लाते थे। गांधी ने जिक्र किया कि एक लोटा पानी इस्तेमाल करने में भी उन्हें झिझक हुई।

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गांधी दस बार शिमला आए थे
खड़ी और संकरी सड़कों पर उस दौर में नाममात्र की कारों की आवाजाही थी। घोड़े और रिक्शे परिवहन के प्रमुख साधन थे। शारीरिक कमजोरी के कारण गांधी को भी रिक्शे की सवारी करनी पड़ी। रिक्शा खींचने वाले मजदूरों की स्थिति पर भी उन्होंने सवाल उठाया और इन्सान को बोझा ढोने वाला जानवर बनाने पर आपत्ति दर्ज की। 15 मई को उन्होंने ईदगाह मैदान में करीब 15 हजार लोगों की सभा को संबोधित किया। गांधी दस बार शिमला आए थे।

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लाला लाजपत राय की प्रतिमा से गांधी का संबंध
27 दिसंबर 1929 को महात्मा गांधी और पंडित मोतीलाल नेहरू ने लाहौर के गोल बाग में लाला लाजपत राय की प्रतिमा के शिलान्यास की नींव रखी थी। 1 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 44वें लाहौर अधिवेशन में विट्ठलभाई पटेल ने इसका अनावरण किया। विभाजन के समय प्रतिमा लाहौर से भारत लाई गई और बाद में स्कैंडल प्वाइंट पर स्थापित गई। प्रतिमा के नीचे लगे शिलालेख के पिछले हिस्से पर इस इतिहास का उल्लेख है।

नहीं चाहिए ऐसा शिमला जहां विकास कम और विनाश ज्यादा
आजादी से पहले 1936 में जन्मे पूर्व आईएएस अधिकारी श्रीनिवास जोशी का कहना है कि ऐसा शिमला नहीं चाहिए जहां विकास कम और विनाश ज्यादा हो। अवैज्ञानिक तरीके से सड़कें बन रही हैं और घरों में दरारें पड़ रही हैं।

शहर की ऐतिहासिक पहचान और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रखने का प्रयास
शिमला शहर के महापौर सुरेंद्र चौहान का कहना है कि शिमला की पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए हम प्रयासरत हैं। पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकार और निगम मिलकर काम कर रहे हैं।
 

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