हिमाचल प्रदेश: बिना मंजूरी धड़ल्ले से बिक रहे फ्लैट, रेरा ने कसा शिकंजा, 75 को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने बिना आवश्यक अनुमति और पंजीकरण के फ्लैटों की खरीद-फरोख्त करने वाले बिल्डरों और भू स्वामियों पर कड़ा शिकंजा कसा है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने बिना आवश्यक अनुमति और पंजीकरण के फ्लैटों की खरीद-फरोख्त करने वाले बिल्डरों और भू स्वामियों पर कड़ा शिकंजा कसा है। पिछले डेढ़ वर्ष में प्रदेशभर में बिना मंजूरी फ्लैट बेचने के सैकड़ों मामले सामने आने के बाद प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। प्राधिकरण की जांच में नियमों की अनदेखी कर आवासीय कॉलोनियां व बहुमंजिला भवन विकसित करने के मामलों में कांगड़ा जिला सबसे आगे निकला है। जिले में सर्वाधिक अनियमितताएं पाए जाने पर अब तक 40 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें नगरोटा में 14, टिक्की-जदरांगल में 9, शाहपुर में 8, डमटाल में 4 तथा कंडवाड़ी, भवारना, पालमपुर और बैजनाथ में 1-1 नोटिस शामिल हैं।
25 नए नोटिस जारी होने की भी बात
वहीं, रेरा अध्यक्ष ने हाल ही में 25 नए नोटिस जारी होने की भी बात कही है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र सोलन के बद्दी, नालागढ़ व कसौली तथा सिरमौर के नाहन, कालाअंब व पांवटा साहिब में भी धड़ल्ले से बिना पंजीकरण फ्लैट बेचने के मामले पकड़े गए हैं। शिमला, हमीरपुर और ऊना जिले भी प्राधिकरण के राडार पर हैं। रेरा ने स्पष्ट किया है कि नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग से नक्शा व प्रोजेक्ट पास कराने के बाद ही रेरा में पंजीकरण मान्य होगा। निर्धारित समय सीमा में औपचारिकताएं पूरी न करने और नियमों की अवहेलना जारी रखने पर संबंधित बिल्डरों के खिलाफ रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पंजीकरण के कड़े नियम, 10 फीसदी जुर्माने का प्रावधान
प्रदेश में अब तक करीब 280 रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। इनमें 140 प्लॉटिंग और शेष फ्लैट निर्माण से जुड़ी हैं। नोटिस जारी कर बिल्डरों को औपचारिकताएं पूरी करने का मौका दिया जा रहा है। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ संबंधित विभागों के माध्यम से आगामी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -आरडी धीमान, अध्यक्ष, रेरा
शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर या आठ से अधिक फ्लैट वाली आवासीय परियोजनाओं के लिए रेरा में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। ग्रामीण इलाकों में 1000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर आठ से अधिक फ्लैट बनाने पर टीसीपी की मंजूरी और रेरा पंजीकरण दोनों जरूरी हैं। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर प्राधिकरण परियोजना की कुल लागत का 10 प्रतिशत तक भारी जुर्माना लगा सकता है।