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हिमाचल: पौंग झील में दिखे दुर्लभ रेड-टेल्ड और रेड-बैक्ड श्राइक, डॉ. अभिनव चौधरी ने कैमरे में किए कैद
Thu, 08 Oct 2026 09:18 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 08 Oct 2026 09:18 AM IST
सार
धर्मशाला के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव चौधरी ने पौंग झील के नगरोटा सूरियां में दो दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की तस्वीरें खींची हैं। रेड-टेल्ड श्राइक और रेड-बैक्ड श्राइक को हिमाचल में पहली बार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों की पुष्टि के बाद दोनों प्रजातियों को आधिकारिक पक्षी रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया है।
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डॉ. अभिनव चौधरी द्वारा खींची गई पक्षियों की तस्वीरें।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव चौधरी ने पौंग झील के नगरोटा सूरियां क्षेत्र में दो दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की है। उन्होंने रेड-टेल्ड श्राइक (Red-tailed Shrike) और रेड-बैक्ड श्राइक (Red-backed Shrike) को कैमरे में कैद किया। दोनों प्रजातियों की हिमाचल प्रदेश में पहली मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि हुई है। डॉ. अभिनव ने 13 सितंबर को रेड-टेल्ड श्राइक की तस्वीरें ली थीं। इसके बाद 20 सितंबर को उन्होंने इसी क्षेत्र में रेड-बैक्ड श्राइक को भी देखा और कैमरे में रिकॉर्ड किया।
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दोनों पक्षी कम उम्र के थे, जिसके कारण उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण रहा। इनके स्वरूप में इसाबेलाइन श्राइक (Isabelline Shrike) से काफी समानता दिखाई दे रही थी। ऐसे में प्रजाति की सही पहचान के लिए तस्वीरें देश और विदेश के पक्षी विशेषज्ञों को भेजी गईं। विशेषज्ञों के विस्तृत विश्लेषण के बाद दोनों पक्षियों की प्रजाति की पुष्टि हुई। इसके साथ ही दोनों को हिमाचल प्रदेश के आधिकारिक पक्षी रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया है।
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जानकारी के अनुसार, रेड-टेल्ड श्राइक और रेड-बैक्ड श्राइक जैसी प्रवासी प्रजातियां यूरोप, साइबेरिया और मध्य एशिया से अफ्रीका की ओर प्रवास करती हैं। इनके सामान्य प्रवास मार्ग में पश्चिमी भारत और कभी-कभार लद्दाख के क्षेत्र शामिल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में इन दोनों पक्षियों की पहली मौजूदगी पौंग झील और इसके आसपास के वेटलैंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। इससे यह संभावना भी बढ़ी है कि भविष्य में पौंग झील क्षेत्र इन दुर्लभ प्रवासी पक्षियों के नए प्रवास मार्ग के रूप में सामने आ सकता है।
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