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'ड्रैगन' का सीमा पर नया खेल: तिब्बत में एलएसी के पास रेल लाइन बना रहा चीन, भारत के लिए मुसीबत
Mon, 13 Oct 2025 06:17 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: विजय पुंडीर
Updated Mon, 13 Oct 2025 06:17 AM IST
सार
तिब्बती विशेषज्ञों का कहना है कि यह रेल मार्ग चीन की सैन्य आवाजाही और रसद क्षमता को काफी बढ़ा देगा। इस रेल लाइन के पांच साल में पूरी होने की उम्मीद है। यह बीजिंग के 5,000 किलोमीटर लंबे पठारी रेल नेटवर्क के विस्तार का हिस्सा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
चीन ने तिब्बत से ल्हासा को जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नई रेल लाइन का निर्माण शुरू कर दिया है। यह रेल लाइन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बेहद नजदीक से गुजरेगी। इस परियोजना ने भारत के लिए नई सैन्य और सुरक्षा चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
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तिब्बती विशेषज्ञों का कहना है कि यह रेल मार्ग चीन की सैन्य आवाजाही और रसद क्षमता को काफी बढ़ा देगा। इस रेल लाइन के पांच साल में पूरी होने की उम्मीद है। यह बीजिंग के 5,000 किलोमीटर लंबे पठारी रेल नेटवर्क के विस्तार का हिस्सा है। यह क्षेत्र खास तौर पर संवेदनशील है, क्योंकि अक्साई चिन में सीमा को लेकर भारत-चीन के बीच विवाद है।
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तिब्बत पॉलिसी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता त्सेवांग दोरजे ने कहा, चीन सीमा के पास रेल और हाईवे निर्माण को हाल के सुरक्षा घटनाक्रमों से जोड़कर देख रहा है। अरुणाचल प्रदेश की दिशा में जहां चीन जल संसाधनों को नियंत्रण में लेना चाहता है। अब लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड के पास नई रेल लाइन बना रहा है। दोरजे के मुताबिक, नागचू से नगारी के बीच बनने वाला हाईवे भी चीन की सैन्य गतिशीलता को बढ़ाएगा।
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हिमालय के समानांतर रेल लाइन
तिब्बती लेखक व कार्यकर्ता तेनजिन त्सुंदे ने कहा, यह चीन की सबसे महत्वाकांक्षी और उकसाने वाली परियोजनाओं में से एक है। यह रेल शिगात्से से होकर कैलाश पर्वत और नगारी के पास से गुजरेगी। कुछ हिस्से लद्दाख के देमचोक क्षेत्र से महज 20–30 किलोमीटर दूर होंगे।