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धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन: सुक्खू बोले- सुशासन के लिए ई-गवर्नेंस जरूरी, तकनीक से आमजन का जीवन हो सरल
Fri, 16 Oct 2026 08:01 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 16 Oct 2026 08:01 PM IST
सार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि किसी भी सरकार के संचालन के लिए सुशासन अनिवार्य है। ई-गवर्नेंस की वास्तविक सफलता तकनीकी जटिलता में नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को सरल बनाने की क्षमता में निहित है।
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राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पर्यटन नगरी धर्मशाला में शुक्रवार को प्रशासनिक सुधार एवं ई-गवर्नेंस विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि किसी भी सरकार के संचालन के लिए सुशासन अनिवार्य है। ई-गवर्नेंस की वास्तविक सफलता तकनीकी जटिलता में नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को सरल बनाने की क्षमता में निहित है। इस सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। सीएम ने कहा कि सरकार ने ई-गवर्नेंस के माध्यम से जनसेवाओं को बेहतर बनाने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।
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स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण के तहत राज्य सरकार ने कई ऐसे व्यवस्था परिवर्तन संबंधी निर्णय लिए हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है।
हमें पारंपरिक नौकरशाही व्यवस्था से आगे बढ़कर पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली की ओर बढ़ना होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र को दूसरी सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य के चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू की गई हैं। प्रदेश सरकार ने गाय और भैंस के दूध का देश में सर्वाधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिटीजन पोर्टल के माध्यम से नागरिक सेवाओं का विस्तार किया है। इसके जरिये लोग घर बैठे अथवा लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शिकायत निवारण पोर्टल ने अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रबंधन प्रणाली और राजस्व लोक अदालतों जैसे कदम उठाए, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने व हजारों लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिली है। उन्होंने राष्ट्रीय विकास में पहाड़ी राज्यों के योगदान का निष्पक्ष आकलन करने तथा जलविद्युत परियोजनाओं, रॉयल्टी, जल उपकर और केंद्रीय वित्तीय सहायता के मामलों में उनके हितों पर न्यायसंगत विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन एक समावेशी डिजिटल शासन व्यवस्था विकसित करने में सहायक साबित होगा, जिससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
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नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नियमित संवाद जरूरी : वर्मा
पहले दिन सम्मेलन में तीन सत्र आयोजित किए गए। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएजीआरपीजी) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्य प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नियमित संवाद और विचारों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रदेश के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने नागरिकों को पारदर्शी और उत्तरदायी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रौद्योगिकी को नियमित अंतराल पर उन्नत करने की आवश्यकता बताई। सचिव प्रशासनिक सुधार ए शैनामोल ने हिमाचल की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर आयोजित सत्र को संबोधित किया और स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता व उभरती प्रौद्योगिकी से प्रेरित डिजिटल परिवर्तन एवं नवाचार पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सीपी वर्मा ने ‘ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार-राज्य एवं जिला स्तर’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया। डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।