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चामुंडा माता मंदिर देवीकोठी का कार्य रुकवाया
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तीसा (चंबा)। चुराह उपमंडल के तहत चामुंडा माता मंदिर देवीकोठी का कार्य रुकवा दिया गया है। उपायुक्त के निर्देशानुसार जिला भाषा अधिकारी ने यह कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर मंदिर के मूल ढांचे से हो रही छेड़छाड़ की शिकायत के बाद यह कदम उठाया गया है।
इतिहासकारों के अनुसार चुराह क्षेत्र की देवीकोठी पंचायत में मौजूद चामुंडा माता मंदिर देवीकोठी का निर्माण 1754 में हुआ था। इस मंदिर का गुरुदेव और झंडा नामक दो मिस्त्रियों ने पहाड़ी शैली में निर्माण किया। पूरी तरह से देवदार की लकड़ी से निर्मित इस मंदिर में काष्ठ कला का कार्य यहां आने वाले सभी लोगों को मुंह में अंगुली दबाने के लिए मजबूर कर देता है। 267 वर्ष बाद भी यह मंदिर आज भी अपनी निर्माण शैली के साथ अपने भित्ती चित्रों के लिए विश्वभर में पहचान बनाए हुए है।
जिला भाषा विभाग चंबा की ओर से चामुंडा माता मंदिर देवीकोठी के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। उसके तहत 25 लाख की राशि स्वीकृत हुई। पहली किस्त के रूप में 12.50 लाख की धनराशि भी जारी की गई लेकिन ऐतिहासिक धरोहर के साथ होने वाली छेड़छाड़ संबंधी शिकायत के कारण यह कार्य रुकवाया दिया गया।
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पद्मश्री विजय शर्मा ने बताया कि बीते वर्ष भी देवीकोठी स्थित चामुंडा देवी मंदिर परिसर में सीमेंट के पिलर को लगाने का मुद्दा उन्होंने उठाया था। उसके बाद भाषा विभाग के विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंच कर मंदिर के मूल ढांचे से छेड़छाड़ किए बगैर जीर्णोद्धार संबंधी कार्य करने के निर्देश दिए। निर्देशों के बाद कार्य बंद हो गया। ऐसे में बीते कुछ समय पूर्व मंदिर में भवन और सराय निर्माण की बात कह कर लकड़ी के पिलर तैयार करने का कार्य किया गया। बताया कि बिना किसी विशेषज्ञ के मंदिर जीर्णोद्धार के नाम पर लकड़ी के पिलर खड़े कर दिए गए जिससे सीधे तौर पर ऐतिहासिक धरोहर से छेड़छाड़ की गई। इसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1100 पर की। उसके बाद अब ये कार्य बंद करवाया गया है। कहा कि ऐतिहासिक धरोहर के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।
जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा ने बताया कि उपायुक्त चंबा के निर्देशानुसार मौके पर पहुंच कर कार्य को रुकवाया गया है।
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इतिहासकारों के अनुसार चुराह क्षेत्र की देवीकोठी पंचायत में मौजूद चामुंडा माता मंदिर देवीकोठी का निर्माण 1754 में हुआ था। इस मंदिर का गुरुदेव और झंडा नामक दो मिस्त्रियों ने पहाड़ी शैली में निर्माण किया। पूरी तरह से देवदार की लकड़ी से निर्मित इस मंदिर में काष्ठ कला का कार्य यहां आने वाले सभी लोगों को मुंह में अंगुली दबाने के लिए मजबूर कर देता है। 267 वर्ष बाद भी यह मंदिर आज भी अपनी निर्माण शैली के साथ अपने भित्ती चित्रों के लिए विश्वभर में पहचान बनाए हुए है।
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जिला भाषा विभाग चंबा की ओर से चामुंडा माता मंदिर देवीकोठी के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। उसके तहत 25 लाख की राशि स्वीकृत हुई। पहली किस्त के रूप में 12.50 लाख की धनराशि भी जारी की गई लेकिन ऐतिहासिक धरोहर के साथ होने वाली छेड़छाड़ संबंधी शिकायत के कारण यह कार्य रुकवाया दिया गया।
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पद्मश्री विजय शर्मा ने बताया कि बीते वर्ष भी देवीकोठी स्थित चामुंडा देवी मंदिर परिसर में सीमेंट के पिलर को लगाने का मुद्दा उन्होंने उठाया था। उसके बाद भाषा विभाग के विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंच कर मंदिर के मूल ढांचे से छेड़छाड़ किए बगैर जीर्णोद्धार संबंधी कार्य करने के निर्देश दिए। निर्देशों के बाद कार्य बंद हो गया। ऐसे में बीते कुछ समय पूर्व मंदिर में भवन और सराय निर्माण की बात कह कर लकड़ी के पिलर तैयार करने का कार्य किया गया। बताया कि बिना किसी विशेषज्ञ के मंदिर जीर्णोद्धार के नाम पर लकड़ी के पिलर खड़े कर दिए गए जिससे सीधे तौर पर ऐतिहासिक धरोहर से छेड़छाड़ की गई। इसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1100 पर की। उसके बाद अब ये कार्य बंद करवाया गया है। कहा कि ऐतिहासिक धरोहर के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।
जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा ने बताया कि उपायुक्त चंबा के निर्देशानुसार मौके पर पहुंच कर कार्य को रुकवाया गया है।