{"_id":"64b42ed891dbe9b8a907fd29","slug":"will-not-fall-from-the-hill-on-the-road-stones-will-get-trapped-in-the-iron-trap-chamba-news-c-88-1-ssml1006-3252-2023-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: पहाड़ी से सड़क पर नहीं गिरेंगे, लोहे के जाल में फंस जाएंगे पत्थर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: पहाड़ी से सड़क पर नहीं गिरेंगे, लोहे के जाल में फंस जाएंगे पत्थर
विज्ञापन
चंबा। मकड़े के जाल की तकनीक से बनाए जाने वाला लोहे का जाल अब मैहला और परेल की पहाड़ियों से भूस्खलन को रोकेगा। यह तकनीक अभी तक जर्मनी में ही अपनाई जा रही थी लेकिन अब इस तकनीक को चंबा जिले में भी अपनाया जा रहा है। पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर मैहला और परेल की पहाड़ियों पर लोहे का जाल बुना जाएगा।
जब भी पहाड़ी से कोई पत्थर गिरेगा तो वह सड़क पर गिरने के बजाय इसी जाल में फंस जाएगा। इस जाल को बुनने के लिए जो तकनीक इस्तेमाल होगी उसे जर्मनी के एक्सपर्ट आकर चंबा के इंजीनियरों को समझाएंगे। इसके लिए जल्द जर्मनी के इंजीनियरों की टीम चंबा पहुंच सकती है। चंबा-भरमौर एनएच पर मैहला में पहाड़ी से रोजाना पत्थर गिरते रहते हैं। इसी तरह चंबा-पठानकोट एनएच पर परेल घार में भी पत्थर गिरते रहते हैं। पत्थर गिरने की वजह से कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके हैं। इसके अलावा कई राहगीर भी चोटिल हुए हैं। इसी समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए एनएच प्राधिकरण ने जर्मन तकनीक से पहाड़ी से होने वाले भूस्खलन को रोकने की योजना बनाई। इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए प्राधिकरण ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा। सरकार की तरफ से प्राधिकरण को मंजूरी मिल चुकी है। अब प्राधिकरण इस कार्य को अंतिम रूप देने के लिए शेष औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है।
मैहला के पास पहाड़ी पर जो लोहे का मकड़ जाल बुना जाएगा उसके ऊपर लगभग डेढ़ करोड़ की राशि खर्च होने का अनुमान है। परेल घार में पहाड़ी का दायरा काफी बड़ा है। इस पहाड़ी पर जो जाल बुना जाएगा उस पर आने वाली लागत का अनुमान तैयार किया जा रहा है। दो मैहला से दोगुना भी हो सकता है। फिलहाल जिले में पहाड़ी से पत्थरों को नीचे गिरने से रोकने वाली यह पहली तकनीक होगी। इस योजना को सिर चढ़ाने के लिए प्राधिकरण योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है। एनएच के अधिशासी अभियंता संजीव महाजन ने बताया कि जर्मन तकनीक से लोहे का मकड़ जाल बुनकर मैहला और परेल घार से गिरने वाले पत्थरों को रोका जाएगा। यह तकनीक आने वाले समय में चालकों और राहगीरों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी क्योंकि पहाड़ी के पत्थरों से उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जब भी पहाड़ी से कोई पत्थर गिरेगा तो वह सड़क पर गिरने के बजाय इसी जाल में फंस जाएगा। इस जाल को बुनने के लिए जो तकनीक इस्तेमाल होगी उसे जर्मनी के एक्सपर्ट आकर चंबा के इंजीनियरों को समझाएंगे। इसके लिए जल्द जर्मनी के इंजीनियरों की टीम चंबा पहुंच सकती है। चंबा-भरमौर एनएच पर मैहला में पहाड़ी से रोजाना पत्थर गिरते रहते हैं। इसी तरह चंबा-पठानकोट एनएच पर परेल घार में भी पत्थर गिरते रहते हैं। पत्थर गिरने की वजह से कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके हैं। इसके अलावा कई राहगीर भी चोटिल हुए हैं। इसी समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए एनएच प्राधिकरण ने जर्मन तकनीक से पहाड़ी से होने वाले भूस्खलन को रोकने की योजना बनाई। इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए प्राधिकरण ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा। सरकार की तरफ से प्राधिकरण को मंजूरी मिल चुकी है। अब प्राधिकरण इस कार्य को अंतिम रूप देने के लिए शेष औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है।
विज्ञापन
मैहला के पास पहाड़ी पर जो लोहे का मकड़ जाल बुना जाएगा उसके ऊपर लगभग डेढ़ करोड़ की राशि खर्च होने का अनुमान है। परेल घार में पहाड़ी का दायरा काफी बड़ा है। इस पहाड़ी पर जो जाल बुना जाएगा उस पर आने वाली लागत का अनुमान तैयार किया जा रहा है। दो मैहला से दोगुना भी हो सकता है। फिलहाल जिले में पहाड़ी से पत्थरों को नीचे गिरने से रोकने वाली यह पहली तकनीक होगी। इस योजना को सिर चढ़ाने के लिए प्राधिकरण योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है। एनएच के अधिशासी अभियंता संजीव महाजन ने बताया कि जर्मन तकनीक से लोहे का मकड़ जाल बुनकर मैहला और परेल घार से गिरने वाले पत्थरों को रोका जाएगा। यह तकनीक आने वाले समय में चालकों और राहगीरों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी क्योंकि पहाड़ी के पत्थरों से उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं रहेगी।
विज्ञापन