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Chamba News: सड़कों पर लावारिस पशु, पंचायत प्रतिनिधियों की आंखें बंद
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चंबा के जमुहार मार्ग पर सड़क के बीच खड़े लावारिस पशु से बचकर निकलता कार चालक।
चंबा। जिले की सड़कों पर लावारिस मवेशी डेरा जमाए बैठे हैं और पंचायत प्रतिनिधियों की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। पशुपालक टैग निकालकर पशुओं को लावारिस छोड़ रहे हैं। हैरत की बात है कि न तो पंचायत स्तर पर इसके लिए कोई प्रयास किए जा सके हैं और न ही इस संदर्भ में पशुपालन विभाग सख्ती कर पाया है। नतीजतन, आज तक एक अदद मवेशी पालक का पता लगाकर उसे दंडित करते हुए उसका चालान तक नहीं किया जा सका है। हालांकि, पंचायत प्रतिनिधियों और पार्षदों के लिए मवेशी पालकों का पता लगाने समेत जुर्माने तक का प्रावधान किया गया है। वहीं, पंचायतीराज विभाग के अधिकारी भी अब तक इस प्रकार का कोई मामला सामने न आने की बात कहकर अपना पक्ष रख रहे हैं। वर्ष 2018-19 में मवेशियों को टैग लगाने की मुहिम शुरू हुई। तब से लेकर अब तक जिले में ढाई लाख पशुओं को टैग लगाए जा चुके हैं। एक साल में लगभग 25 टैग लगे घूम रहे लावारिस मवेशियों की शिकायतें पशुपालन विभाग के पास पहुंच चुकी हैं। इनकी पहचान कर उनके मालिकों तक पहुंचाया गया है।
पंचायत में अधिकतर लावारिस मवेशी ही घूम रहे हैं लेकिन, कुछ माह पहले टैग लगे मवेशी के घूमने का मामला सामने आया था। इसकी पहचान करके मवेशी मालिक के पास पहुंचाया गया था। - अनुराधा, प्रधान कामला।
लावारिस मवेशियों के लिए गोसदन का निर्माण कार्य चल रहा है। अगर, कोई टैग लगे मवेशी लावारिस घूमता पाया गया तो मवेशी मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -अनिल, प्रधान सिहुंता।
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कुछ लोग अपने मवेशियों के टैग निकालकर लावारिस छोड़ जाते हैं लेकिन, उनकी पहचान करना काफी मुश्किल है। अगर ऐसा कोई मामला आता है तो वे पशुपालन विभाग के पास शिकायत करेंगे। -बबली, प्रधान टिकरीगढ़
लावारिस मवेशियों की तादाद तो प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। गाय के दूध न देने पर लोग उन्हें सड़कों पर छोड़ जाते हैं। ऐसे में लोगों को भी इनसे भय रहता है। निर्मला देवी, प्रधान पल्यूर।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. मुंशी कपूर का कहना है कि आठ साल पहले पशुओं को टैग लगाने की योजना शुरू हुई है। एक माह में तीन से चार टैग लगे मवेशियों को लावारिस छोड़ने की शिकायतें आती हैं। पहचान करके मवेशियों को उनके मालिक के पास पहुंचा दिया जाता है।
जिला पंचायत अधिकारी चंबा मनीष कुमार ने बताया कि गोवंश सड़कों पर छोड़ने वालों पर नकेल कसने को पंचायत प्रतिनिधियों को शक्तियां दी गई हैं। अब तक जिले में भी मवेशी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करवा कर उसे जुर्माना नहीं हुआ है। बताया कि लावारिस मवेशियों के लिए गोसदनों का निर्माण हुआ है और हो भी रहा है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने बताया कि पशुओं के साथ क्रूरता के लिए तो कानून में व्यवस्था की गई है। बरहरहाल, जिले में लावारिस मवेशियों की ओर से दुर्घटना या हादसे की वजह बनने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
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पंचायत में अधिकतर लावारिस मवेशी ही घूम रहे हैं लेकिन, कुछ माह पहले टैग लगे मवेशी के घूमने का मामला सामने आया था। इसकी पहचान करके मवेशी मालिक के पास पहुंचाया गया था। - अनुराधा, प्रधान कामला।
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लावारिस मवेशियों के लिए गोसदन का निर्माण कार्य चल रहा है। अगर, कोई टैग लगे मवेशी लावारिस घूमता पाया गया तो मवेशी मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -अनिल, प्रधान सिहुंता।
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कुछ लोग अपने मवेशियों के टैग निकालकर लावारिस छोड़ जाते हैं लेकिन, उनकी पहचान करना काफी मुश्किल है। अगर ऐसा कोई मामला आता है तो वे पशुपालन विभाग के पास शिकायत करेंगे। -बबली, प्रधान टिकरीगढ़
लावारिस मवेशियों की तादाद तो प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। गाय के दूध न देने पर लोग उन्हें सड़कों पर छोड़ जाते हैं। ऐसे में लोगों को भी इनसे भय रहता है। निर्मला देवी, प्रधान पल्यूर।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. मुंशी कपूर का कहना है कि आठ साल पहले पशुओं को टैग लगाने की योजना शुरू हुई है। एक माह में तीन से चार टैग लगे मवेशियों को लावारिस छोड़ने की शिकायतें आती हैं। पहचान करके मवेशियों को उनके मालिक के पास पहुंचा दिया जाता है।
जिला पंचायत अधिकारी चंबा मनीष कुमार ने बताया कि गोवंश सड़कों पर छोड़ने वालों पर नकेल कसने को पंचायत प्रतिनिधियों को शक्तियां दी गई हैं। अब तक जिले में भी मवेशी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करवा कर उसे जुर्माना नहीं हुआ है। बताया कि लावारिस मवेशियों के लिए गोसदनों का निर्माण हुआ है और हो भी रहा है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने बताया कि पशुओं के साथ क्रूरता के लिए तो कानून में व्यवस्था की गई है। बरहरहाल, जिले में लावारिस मवेशियों की ओर से दुर्घटना या हादसे की वजह बनने का कोई मामला सामने नहीं आया है।