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Chamba News: सड़क से कोसों दूर चुराह की चरड़ा पंचायत के दो गांव
Thu, 15 Feb 2024 10:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 15 Feb 2024 10:56 PM IST
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चंबा के ज्यूरी गांव में सड़क सुविधा न होने के चलते मरीज को पीठ पर उठाकर ले जाते परिजन।संवाद
नकरोड़ (चंबा)। विधानसभा क्षेत्र चुराह की चरड़ा पंचायत के दो गांवों के लोग सड़क सुविधा से कोसों दूर हैं।
इन गांवों के लोगों को आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। सरकार और प्रशासन का दरवाजा खटखटाने के बाद भी ग्रामीण सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। पंचायत के ज्युरी और गुवाड़ी गांवों के लोगों को रोजाना 25 किलोमीटर का सफर पैदल करना पड़ता है। विद्यार्थी दो घंटा पैदल चलने के बाद स्कूल पहुंचते हैं। छुट्टी के बाद घर पहुंचने में रात हो जाती है। इससे अभिभावकों को बच्चों की चिंता सताती रहती है। सबसे ज्यादा परेशानी उस समय होती है, जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार हो जाए। सबसे पहले बीमार को पालकी या पीठ पर उठाकर 25 किलोमीटर तक पैदल मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इसके बाद निजी वाहन या एंबुलेंस से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जाता है। कई बार गंभीर हालत में मरीज की अस्पताल पहुंचने से पहले बीच रास्ते में ही मौत हो जाती है।
साई, मानो, फजलदीन, रफीक, लाली, फकीर, नाजिर और प्यारदीन ने बताया कि चुनाव के समय गांव को सड़क से जोड़ने को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। चुनाव होने के बाद कोई नेता इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करता। यही कारण है कि आज तक उनके गांव सड़क से वंचित हैं। सड़क नहीं होने से गांवों में विकास की गति कछुआ चाल की तरह है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनके गांव को सड़क से जोड़ा जाए। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंदर कुमार ने बताया कि इन गांव को सड़क से जोड़ने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
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इन गांवों के लोगों को आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। सरकार और प्रशासन का दरवाजा खटखटाने के बाद भी ग्रामीण सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। पंचायत के ज्युरी और गुवाड़ी गांवों के लोगों को रोजाना 25 किलोमीटर का सफर पैदल करना पड़ता है। विद्यार्थी दो घंटा पैदल चलने के बाद स्कूल पहुंचते हैं। छुट्टी के बाद घर पहुंचने में रात हो जाती है। इससे अभिभावकों को बच्चों की चिंता सताती रहती है। सबसे ज्यादा परेशानी उस समय होती है, जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार हो जाए। सबसे पहले बीमार को पालकी या पीठ पर उठाकर 25 किलोमीटर तक पैदल मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इसके बाद निजी वाहन या एंबुलेंस से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जाता है। कई बार गंभीर हालत में मरीज की अस्पताल पहुंचने से पहले बीच रास्ते में ही मौत हो जाती है।
साई, मानो, फजलदीन, रफीक, लाली, फकीर, नाजिर और प्यारदीन ने बताया कि चुनाव के समय गांव को सड़क से जोड़ने को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। चुनाव होने के बाद कोई नेता इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करता। यही कारण है कि आज तक उनके गांव सड़क से वंचित हैं। सड़क नहीं होने से गांवों में विकास की गति कछुआ चाल की तरह है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनके गांव को सड़क से जोड़ा जाए। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंदर कुमार ने बताया कि इन गांव को सड़क से जोड़ने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
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