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Chamba News: रेबीज के बचाव और कारणों पर दिया प्रशिक्षण
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स्वास्थ्य विभाग के सभागार में हुआ कार्यक्रम
उपचार और टीकाकरण के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों के लिए शहर में स्वास्थ्य विभाग के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में रेबीज से बचाव एवं उपचार संबंधी सेवाओं को प्रभावी बनाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने कार्यक्षेत्र में करने के साथ ही आम जनता को रेबीज के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता को मजबूत करना और रेबीज की रोकथाम, समय पर पहचान और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुहैल अहमद ने प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को रेबीज रोग की रोकथाम, कुत्ते एवं अन्य संदिग्ध जानवरों के काटने पर आवश्यक चिकित्सा प्रबंधन तथा समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने जानवर के काटने की स्थिति में घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोने, बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में पहुंचने और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकतानुसार रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन लगवाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए।
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उपचार और टीकाकरण के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों के लिए शहर में स्वास्थ्य विभाग के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में रेबीज से बचाव एवं उपचार संबंधी सेवाओं को प्रभावी बनाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने कार्यक्षेत्र में करने के साथ ही आम जनता को रेबीज के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता को मजबूत करना और रेबीज की रोकथाम, समय पर पहचान और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुहैल अहमद ने प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को रेबीज रोग की रोकथाम, कुत्ते एवं अन्य संदिग्ध जानवरों के काटने पर आवश्यक चिकित्सा प्रबंधन तथा समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने जानवर के काटने की स्थिति में घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोने, बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में पहुंचने और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकतानुसार रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन लगवाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए।
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