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Chamba News: एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए भटक रहे मरीज
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चंबा। रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों और तकनीशियन की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज में एक ही रेडियोलॉजिस्ट कार्य कर रहा है। इस कारण मरीजों के रूटीन के एमआरआई और सीटी स्कैन सेवाएं बंद हो चुकी हैं। सिर्फ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट के पास अल्ट्रासाउंड करने का भी कार्यभार है। उनका पूरा दिन गर्भवतियों सहित अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड करने में निकल जाता है। उन्हें एमआरआई और सीटी स्कैन करने के लिए समय ही नहीं मिल पाता। मरीजों को मजबूरन निजी सेंटरों में जाकर मनमाने दाम चुकाकर अपने टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
रोजाना 10 से 15 मरीजों को डॉक्टर सीटी और एमआरआई करवाने का परामर्श देते हैं। जब मरीज टेस्ट करवाने के लिए सेंटर में पहुंचते हैं तो वहां पर उन्हें मना कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों संजय शर्मा, हंसराज, केवल, सोनू, बावा खन्ना, जय सिंह, शम्मी कुमार और अजय कुमार ने बताया कि आकांक्षी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होनी चाहिए लेकिन सरकार ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है। मेडिकल कॉलेज में जो एमआरआई 1200 में होता है, मरीज को निजी सेंटर में उसके 3000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में एक रेडियोलाॅजिस्ट और एक तकनीशियन है। रेडियोलॉजी विभाग में कम से कम पांच से छह रेडियोलॉजिस्ट होने चाहिए। इतनी ही संख्या में तकनीशियन और स्पोर्टिंग स्टाफ भी होना चाहिए।
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चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. प्रदीप सिंह ने बताया कि सरकार से डॉक्टर और तकनीशियन की मांग की गई है। जल्द तैनाती होने की उम्मीद है।
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रोजाना 10 से 15 मरीजों को डॉक्टर सीटी और एमआरआई करवाने का परामर्श देते हैं। जब मरीज टेस्ट करवाने के लिए सेंटर में पहुंचते हैं तो वहां पर उन्हें मना कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों संजय शर्मा, हंसराज, केवल, सोनू, बावा खन्ना, जय सिंह, शम्मी कुमार और अजय कुमार ने बताया कि आकांक्षी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होनी चाहिए लेकिन सरकार ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है। मेडिकल कॉलेज में जो एमआरआई 1200 में होता है, मरीज को निजी सेंटर में उसके 3000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में एक रेडियोलाॅजिस्ट और एक तकनीशियन है। रेडियोलॉजी विभाग में कम से कम पांच से छह रेडियोलॉजिस्ट होने चाहिए। इतनी ही संख्या में तकनीशियन और स्पोर्टिंग स्टाफ भी होना चाहिए।
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चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. प्रदीप सिंह ने बताया कि सरकार से डॉक्टर और तकनीशियन की मांग की गई है। जल्द तैनाती होने की उम्मीद है।