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Chamba News: चंबा में हजारों बच्चे कुपोषण के शिकार, सर्वे में हुआ यह खुलासा
Fri, 16 Aug 2024 10:08 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 16 Aug 2024 10:08 PM IST
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पंकज सलारिया
चंबा। पिछड़ा जिला घोषित चंबा में पांच वर्ष से कम आयु के 2,042 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें अति कुपोषित 304 बच्चों की जिला बाल विकास विभाग विशेष निगरानी कर रहा है।
विभाग कुपोषित बच्चों को दोगुना खुराक दे रहा है। खुराक में अंडे, दलिया समेत अन्य खाद्य चीजें शामिल हैं। विभाग के पास 1,738 बच्चों की सूची है, जो मध्यम कुपोषण के शिकार हैं। इस बात की जानकारी हाल ही में मासिक सर्वे में हुई है। चंबा में कुपोषण से निपटने के लिए जिला महिला एवं बाल विकास विभाग मासिक सर्वे करवा रहा है।
चंबा के दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वास्थ्य कार्मिकों, आशा सहयोगियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उपचार केंद्र में उनकी जांच और पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण से बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण से मांसपेशियां ढीली होना अथवा सिकुड़ जाना, कार्य करने पर शीघ्र थकान आना, चिड़चिड़ापन, घबराहट होना, चेहरा नीरस, आंखें के चारों ओर काले घेरे बनना, शरीर का वजन कम होना और कमजोरी, नींद और पाचन क्रिया का गड़बड़ाना तथा खासकर हाथ-पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना कुपोषण के मुख्य कारण हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग चंबा के जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि सर्वे में चंबा में 2,042 बच्चों में कुपोषण के लक्षण हैं। विभाग अति कुपोषित बच्चों को दोगुना खुराक दे रहा है।
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चंबा। पिछड़ा जिला घोषित चंबा में पांच वर्ष से कम आयु के 2,042 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें अति कुपोषित 304 बच्चों की जिला बाल विकास विभाग विशेष निगरानी कर रहा है।
विभाग कुपोषित बच्चों को दोगुना खुराक दे रहा है। खुराक में अंडे, दलिया समेत अन्य खाद्य चीजें शामिल हैं। विभाग के पास 1,738 बच्चों की सूची है, जो मध्यम कुपोषण के शिकार हैं। इस बात की जानकारी हाल ही में मासिक सर्वे में हुई है। चंबा में कुपोषण से निपटने के लिए जिला महिला एवं बाल विकास विभाग मासिक सर्वे करवा रहा है।
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चंबा के दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वास्थ्य कार्मिकों, आशा सहयोगियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उपचार केंद्र में उनकी जांच और पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण से बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण से मांसपेशियां ढीली होना अथवा सिकुड़ जाना, कार्य करने पर शीघ्र थकान आना, चिड़चिड़ापन, घबराहट होना, चेहरा नीरस, आंखें के चारों ओर काले घेरे बनना, शरीर का वजन कम होना और कमजोरी, नींद और पाचन क्रिया का गड़बड़ाना तथा खासकर हाथ-पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना कुपोषण के मुख्य कारण हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग चंबा के जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि सर्वे में चंबा में 2,042 बच्चों में कुपोषण के लक्षण हैं। विभाग अति कुपोषित बच्चों को दोगुना खुराक दे रहा है।