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Chamba News: रावी में बहकर आई लकड़ी अवैध कटान की नहीं
Tue, 09 Sep 2025 09:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 09 Sep 2025 09:54 PM IST
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चंबा। वन विभाग ने जांच कर स्पष्ट किया है कि रावी नदी में बहकर आई लकड़ी अवैध कटान की नहीं है। इस लकड़ी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाओं और सवालों का बाजार गर्म था। वायरल हुए वीडियो में यह दावा किया जा रहा था कि लकड़ी जंगलों में अवैध कटान से काटी गई है और बाढ़ के बहाव के साथ नदी में पहुंच गई। मामले ने तूल पकड़ा तो वन विभाग ने मंगलवार को शीतला पुल के पास संयुक्त निरीक्षण किया।
निरीक्षण दल में मुख्य अरण्यपाल राकेश ठाकुर, वन अधिकारियों के अलावा वार्ड पार्षद, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य लोग शामिल रहे। जांच के दौरान पाया कि तट पर जमा हुई लकड़ियों में एक भी स्लीपरनुमा टुकड़ा नहीं है। सभी लकड़ी जड़ों समेत उखड़े पेड़ों की है, जो भूस्खलन और तेज़ बहाव के चलते नदी में बहकर यहां पहुंचे।
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह लकड़ी प्राकृतिक आपदा का नतीजा है, अवैध कटान से इसका कोई लेना-देना नहीं है। विभाग ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों और लोगों को सख्त चेतावनी दी कि बिना अनुमति कोई भी इस लकड़ी को न उठाएं। सभी तरह की लकड़ी की निशानदेही कर दी गई है और आने वाले दिनों में विभाग इसे नीलामी के लिए जारी कर सकता है। मुख्य अरण्यपाल राकेश ठाकुर ने कहा कि निरीक्षण में साफ हो गया है कि लकड़ी अवैध रूप से काटी गई नहीं है। यह पूरी तरह जड़ों समेत उखड़े पेड़ों की है। इस वजह से अवैध कटान की शंका पूरी तरह खत्म हो गई है। उल्लेखनीय है कि हर साल बरसात के मौसम में बाढ़ और भूस्खलन के चलते नदी-नालों में पेड़ उखड़कर बह जाते हैं और किनारे पर जमा हो जाते हैं। इस बार भी वही स्थिति बनी,लेकिन सोशल मीडिया पर इसे अवैध कटान से जोड़कर अफवाह फैला दी गई थी।
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निरीक्षण दल में मुख्य अरण्यपाल राकेश ठाकुर, वन अधिकारियों के अलावा वार्ड पार्षद, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य लोग शामिल रहे। जांच के दौरान पाया कि तट पर जमा हुई लकड़ियों में एक भी स्लीपरनुमा टुकड़ा नहीं है। सभी लकड़ी जड़ों समेत उखड़े पेड़ों की है, जो भूस्खलन और तेज़ बहाव के चलते नदी में बहकर यहां पहुंचे।
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वन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह लकड़ी प्राकृतिक आपदा का नतीजा है, अवैध कटान से इसका कोई लेना-देना नहीं है। विभाग ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों और लोगों को सख्त चेतावनी दी कि बिना अनुमति कोई भी इस लकड़ी को न उठाएं। सभी तरह की लकड़ी की निशानदेही कर दी गई है और आने वाले दिनों में विभाग इसे नीलामी के लिए जारी कर सकता है। मुख्य अरण्यपाल राकेश ठाकुर ने कहा कि निरीक्षण में साफ हो गया है कि लकड़ी अवैध रूप से काटी गई नहीं है। यह पूरी तरह जड़ों समेत उखड़े पेड़ों की है। इस वजह से अवैध कटान की शंका पूरी तरह खत्म हो गई है। उल्लेखनीय है कि हर साल बरसात के मौसम में बाढ़ और भूस्खलन के चलते नदी-नालों में पेड़ उखड़कर बह जाते हैं और किनारे पर जमा हो जाते हैं। इस बार भी वही स्थिति बनी,लेकिन सोशल मीडिया पर इसे अवैध कटान से जोड़कर अफवाह फैला दी गई थी।
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