{"_id":"6aad7311d76a8310ff0bd961","slug":"the-weather-changed-the-location-changed-and-the-gujjar-caravan-set-out-on-the-road-to-punjab-chamba-news-c-88-1-ssml1004-197096-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: मौसम बदला, ठिकाना बदला, पंजाब की राह पर निकला गुज्जर काफिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: मौसम बदला, ठिकाना बदला, पंजाब की राह पर निकला गुज्जर काफिला
Fri, 18 Sep 2026 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:51 PM IST
विज्ञापन
भैंसों के साथ पहाड़ से मैदान की ओर बढ़े परिवार, सर्दियों का डेरा अब पंजाब में
पीढ़ियों से मौसम के साथ चल रही परंपरा, गर्मियों में फिर चुराह में बसेगा डेरा
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। पहाड़ों में मौसम बदला तो गुज्जर परिवारों ने भी अपना ठिकाना बदल लिया। चुराह की ऊंची पहाड़ियों से भैंसों के साथ गुज्जर परिवारों का काफिला अब पंजाब के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ चला है।
सर्दियों में ठंड से बचने और पशुधन के लिए अनुकूल वातावरण की तलाश में शुरू हुआ यह मौसमी सफर पीढ़ियों से चला आ रहा है।
गर्मियों में चुराह की पहाड़ियों में डेरा डालकर परिवार भैंसों को चराते हैं। हरे चरागाहों के बीच कई महीने बिताने के बाद जैसे ही मौसम करवट लेता है, परिवार अपने पशुधन के साथ मैदानी क्षेत्रों की ओर निकल पड़ते हैं। सफर के दौरान रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर पड़ाव डाला जाता है।
पहाड़ी रास्तों पर भैंसों के साथ आगे बढ़ता यह काफिला गुज्जर समुदाय की उस जीवनशैली की तस्वीर पेश करता है, जिसमें मौसम ही अगले ठिकाने का फैसला करता है। न कोई स्थायी डेरा और न एक जगह टिकने की मजबूरी, पशुधन के साथ हर मौसम में नई राह और नया ठिकाना।
विज्ञापन
सर्दियां मैदानी इलाकों में बिताने के बाद मौसम अनुकूल होते ही यही परिवार फिर चुराह की पहाड़ियों में लौटेंगे। बदलते दौर के बीच प्रकृति, पशुधन और परंपरा से जुड़ा यह मौसमी सफर आज भी गुज्जर समुदाय की पहचान बना हुआ है।
विज्ञापन
पीढ़ियों से मौसम के साथ चल रही परंपरा, गर्मियों में फिर चुराह में बसेगा डेरा
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। पहाड़ों में मौसम बदला तो गुज्जर परिवारों ने भी अपना ठिकाना बदल लिया। चुराह की ऊंची पहाड़ियों से भैंसों के साथ गुज्जर परिवारों का काफिला अब पंजाब के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ चला है।
सर्दियों में ठंड से बचने और पशुधन के लिए अनुकूल वातावरण की तलाश में शुरू हुआ यह मौसमी सफर पीढ़ियों से चला आ रहा है।
गर्मियों में चुराह की पहाड़ियों में डेरा डालकर परिवार भैंसों को चराते हैं। हरे चरागाहों के बीच कई महीने बिताने के बाद जैसे ही मौसम करवट लेता है, परिवार अपने पशुधन के साथ मैदानी क्षेत्रों की ओर निकल पड़ते हैं। सफर के दौरान रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर पड़ाव डाला जाता है।
विज्ञापन
पहाड़ी रास्तों पर भैंसों के साथ आगे बढ़ता यह काफिला गुज्जर समुदाय की उस जीवनशैली की तस्वीर पेश करता है, जिसमें मौसम ही अगले ठिकाने का फैसला करता है। न कोई स्थायी डेरा और न एक जगह टिकने की मजबूरी, पशुधन के साथ हर मौसम में नई राह और नया ठिकाना।
विज्ञापन
सर्दियां मैदानी इलाकों में बिताने के बाद मौसम अनुकूल होते ही यही परिवार फिर चुराह की पहाड़ियों में लौटेंगे। बदलते दौर के बीच प्रकृति, पशुधन और परंपरा से जुड़ा यह मौसमी सफर आज भी गुज्जर समुदाय की पहचान बना हुआ है।