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बैंडबाजे और भोले के जयकारों के साथ निकली पवित्र छड़ी
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चंबा में छड़ी यात्रा के दौरान सदर विधायक पवन नैयर और महंत यतिंद्र गिरी के साथ अन्य महंत।संवाद
- फोटो : Chamba
चंबा। राधाष्टमी के उपलक्ष्य पर होने वाले बड़े शाही स्नान में शामिल होने के लिए दशनामी अखाड़ा से पवित्र छड़ी बैंडबाजे और शिव के जयकारों के साथ रवाना हुई। गृह रक्षक बैंड से शिव भजनों का मधुर गुणगान किया गया।
एडीएम चंबा अमित मेहरा, उपमंडल अधिकारी अरुण शर्मा, सदर विधायक पवन नैयर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष नीरज नैयर सहित अन्य प्रबुद्ध नागरिक इस घड़ी के गवाह बने। दशनामी अखाड़ा से महंत यतिंद्र गिरी ने शुक्रवार सुबह अखाड़े में स्थित पवित्र छड़ी की पूजा-अर्चना और हवन किया। इसके बाद भजनों का क्रम शुरू हो गया। दोपहर के समय दशनामी अखाड़ा में दोपहर को लंगर का आयोजन किया गया। सायंकालीन 5:00 बजे दशनामी अखाड़े से पवित्र छड़ी अपनी यात्रा पर रवाना हुई। महंत यतिंद्र गिरी ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद छड़ी का पहला पड़ाव राधाकृष्ण मंदिर जुलाहकड़ी में होगा। यहां रात भर भजन-कीर्तन का क्रम चलेगा। इसके बाद मैहला स्थित नागाबाबा आश्रम में विश्राम रहेगा।
तीसरे दिन दुर्गेठी उसके बाद भरमौर, हड़सर, धनछौ आदि पड़ावों से होते हुए छड़ी 1 सितंबर को पवित्र डल झील में पहुंचेगी। राधाष्टमी के उपलक्ष्य पर पवित्र डल झील में दशनामी अखाड़ा से लाई गई छड़ी डुबकी लगाने के बाद बड़ा शाही स्नान आरंभ होगा। चंबा स्थित दशनामी अखाड़ा में पहुंचने पर भंडारा लगाया जाएगा। इसके बाद साधु संत अपने-अपने निवास स्थानों के लिए रवाना होंगे। बताया कि छड़ी आदिकाल से दंड का प्रतीक रहती है। इसे शिव शक्ति का रूप माना गया है।
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एडीएम चंबा अमित मेहरा, उपमंडल अधिकारी अरुण शर्मा, सदर विधायक पवन नैयर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष नीरज नैयर सहित अन्य प्रबुद्ध नागरिक इस घड़ी के गवाह बने। दशनामी अखाड़ा से महंत यतिंद्र गिरी ने शुक्रवार सुबह अखाड़े में स्थित पवित्र छड़ी की पूजा-अर्चना और हवन किया। इसके बाद भजनों का क्रम शुरू हो गया। दोपहर के समय दशनामी अखाड़ा में दोपहर को लंगर का आयोजन किया गया। सायंकालीन 5:00 बजे दशनामी अखाड़े से पवित्र छड़ी अपनी यात्रा पर रवाना हुई। महंत यतिंद्र गिरी ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद छड़ी का पहला पड़ाव राधाकृष्ण मंदिर जुलाहकड़ी में होगा। यहां रात भर भजन-कीर्तन का क्रम चलेगा। इसके बाद मैहला स्थित नागाबाबा आश्रम में विश्राम रहेगा।
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तीसरे दिन दुर्गेठी उसके बाद भरमौर, हड़सर, धनछौ आदि पड़ावों से होते हुए छड़ी 1 सितंबर को पवित्र डल झील में पहुंचेगी। राधाष्टमी के उपलक्ष्य पर पवित्र डल झील में दशनामी अखाड़ा से लाई गई छड़ी डुबकी लगाने के बाद बड़ा शाही स्नान आरंभ होगा। चंबा स्थित दशनामी अखाड़ा में पहुंचने पर भंडारा लगाया जाएगा। इसके बाद साधु संत अपने-अपने निवास स्थानों के लिए रवाना होंगे। बताया कि छड़ी आदिकाल से दंड का प्रतीक रहती है। इसे शिव शक्ति का रूप माना गया है।
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