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Chamba News: जंगल हो रहे खाली, ढूंढे नहीं मिलतीं जड़ी-बूटियां

Fri, 05 Dec 2025 10:14 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Fri, 05 Dec 2025 10:14 PM IST
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The forests are becoming empty, herbs are not found.
सिहुंता (चंबा)। सिहुंता के जंगलों में आग की घटनाओं ने बेशकीमती जड़ी-बूटियों और पौधों को खाक कर दिया है। गोरख मुंडी, पुनर्नवाहा, संखिरियां और इंद्रजौ समेत कई औषधीय पौधे, जो पीढ़ियों से घरेलू उपचार का आधार रहे, अब गायब हो चुके हैं।
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लोगों ने बताया कि पहले जंगलों से ही दवा मिल जाती थी। अब आधी से अधिक जड़ी-बूटियां मिलती ही नहीं हैं। यदि जंगलों का संरक्षण समय पर न किया गया तो आगामी समय में एक भी जड़ी बूटी जंगलों में देखने तक को नहीं मिलेगी।
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दुर्लभ जड़ी-बूटियों के खत्म होने से ग्रामीणों की पारंपरिक औषधीय व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। जहां पहले छोटे-मोटे रोगों का इलाज जंगल से मिलने वाली जड़ी-बूटियों से हो जाता था, अब लोगों को दूर शहरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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हमारे बुजुर्गों ने हमें जड़ी-बूटी का ज्ञान दिया था। अब जंगल खाली पड़ गया है। इलाज महंगा भी हो गया है और मुश्किल भी। विभाग को खरपतवार को खत्म करना चाहिए। कुलभूषण उपमन्यू, स्थानीय निवासी
जंगल जलता है, हम अपने दम पर बुझाते हैं। विभाग को फोन करो तो कहते हैं देखते हैं। इससे कैसे बचेगा जंगल, जंगलों में फलदार पेड़ों की संख्या कम होने से बंदर और जंगली जानवर भोजन की तलाश में गांवों की ओर बढ़ रहे हैं। जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं। राम प्रसाद, स्थानीय
जंगलों में तेजी से फैल रही बेकार झाड़ियां पेड़ों-पौधों को बढ़ने नहीं देतीं। वन विभाग पुराने तरह से घास, फलदार वृक्ष और औषधीय पौधों की रोपाई करें, ताकि वन्यजीवों को भोजन मिले और प्राकृतिक संतुलन वापस आए। पुरुषोत्म, स्थानीय निवासी
अगर फलदार पौधे और घास फिर से लगाए जाएंगे तो जानवरों को जंगल में भोजन मिलेगा और गांव सुरक्षित रहेंगे। साथ ही जड़ी-बूटियां भी नष्ट नहीं होगी। किसानों को इससे ज्यादा लाभ मिलेगा। वरुण भारती, स्थानीय निवासी


पिछले वर्ष ठिकरी पहरा लगाया था, जिससे आग की घटनाएं कम सामने आई हैं। विभाग की ओर से आगामी समय में भी इसी तरह का प्रयास किया जाएगा। साथ ही जंगलों में पेड़ और फलदार पौधे लगाने की योजना बनाई जाएगी। संजीव कुमार, वन परिक्षेत्र अधिकारी, डीएफओ
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