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Chamba News: पानी की हर बूंद से बीमारी फैलने का डर
Sat, 25 Apr 2026 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:01 PM IST
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चंबा नए बस स्टैंड में लगाई टंकी में भरी गंदगी: संवाद
चंबा बस अड्डे में लगी टंकिंयों में भरा कचरा, कइयों के ढक्कन भी हो चुके हैं गायब
टंकिंयों में साफ नजर आ रहा कचरा, प्लास्टिक और गंदगी, दूषित पानी पी रहे यात्री
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सफर की शुरुआत जहां सुकून से होनी चाहिए, वहां चंबा बस स्टैंड में एक घूंट पानी ही सबसे बड़ा जोखिम बन गया है। टंकियों में भरा पानी नहीं, लापरवाही का जमा जहर दिखता है। टंकिंयों खुले ढक्कन, पानी में तैरती गंदगी और उस पर खामोश जिम्मेदारियां। यहां प्यास बुझाना मजबूरी है लेकिन हर घूंट के साथ बीमारी का डर भी घुला हुआ है। यह सिर्फ बदहाल व्यवस्था नहीं, बल्कि रोज गुजरने वाले सैकड़ों यात्रियों की सेहत के साथ चलता हुआ एक अनदेखा खतरा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। बस स्टैंड चंबा में पेयजल व्यवस्था लोगों को बीमार कर सकती है। नए बस अड्डे में यात्रियों के लिए उपलब्ध पेयजल व्यवस्था बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। यहां लगी पानी की टंकियां लंबे समय से खुली हैं। कइयों के ढक्कन गायब हैं। भीतर कचरा, प्लास्टिक और गंदगी साफ नजर आ रही है। परिवहन निगम की अनदेखी के चलते रोजाना सैकड़ों यात्री दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बस स्टैंड की इन टंकियों की नियमित सफाई वर्षों से नहीं की गई है। नतीजतन इनमें भरा पानी अब पीने योग्य नहीं रहा है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है, जब बंदर इन खुली टंकियों में उतरकर नहाते देखे जाते हैं। बावजूद इसके न तो टंकियों को ढकने की व्यवस्था की गई है और न ही किसी प्रकार की स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
बस स्टैंड पर पहुंचने वाले यात्रियों को मजबूरी में यही दूषित पानी पीना पड़ता है। इससे पेट संबंधी बीमारियों, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद परिवहन निगम की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
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यात्रियों में रीना कुमारी, सीमा देवी, कौशल्या देवी, मनु कुमार, आशीष कुमार और रजत कुमार ने कहा कि कि यह परिवहन निगम की सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि यात्रियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। बस स्टैंड की सभी पानी की टंकियों की तुरंत सफाई करवाई जाए, उन्हें पूरी तरह ढका जाए और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल मिल सके और ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
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टायफाइड, हेपेटाइटिस का रहता है डर : डॉ. जालम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि दूषित पानी पीने से टायफाइड, हेपेटाइटिस (पीलिया) और पोलियो जैसा संक्रमण फैल सकता हैं। इसके अलावा गंदे पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस के कारण हैजा, दस्त, डायरिया, और गंभीर उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं होती हैं। लंबे समय तक दूषित पानी पीने से लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि दूषित पानी बच्चे, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होता है।
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एचआरटीसी के डीडीएम शुगल सिंह ने कहा कि मामला ध्यान में लाया गया है। टंकियों की सफाई करवाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे ताकि लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।
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टंकिंयों में साफ नजर आ रहा कचरा, प्लास्टिक और गंदगी, दूषित पानी पी रहे यात्री
सफर की शुरुआत जहां सुकून से होनी चाहिए, वहां चंबा बस स्टैंड में एक घूंट पानी ही सबसे बड़ा जोखिम बन गया है। टंकियों में भरा पानी नहीं, लापरवाही का जमा जहर दिखता है। टंकिंयों खुले ढक्कन, पानी में तैरती गंदगी और उस पर खामोश जिम्मेदारियां। यहां प्यास बुझाना मजबूरी है लेकिन हर घूंट के साथ बीमारी का डर भी घुला हुआ है। यह सिर्फ बदहाल व्यवस्था नहीं, बल्कि रोज गुजरने वाले सैकड़ों यात्रियों की सेहत के साथ चलता हुआ एक अनदेखा खतरा है।
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। बस स्टैंड चंबा में पेयजल व्यवस्था लोगों को बीमार कर सकती है। नए बस अड्डे में यात्रियों के लिए उपलब्ध पेयजल व्यवस्था बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। यहां लगी पानी की टंकियां लंबे समय से खुली हैं। कइयों के ढक्कन गायब हैं। भीतर कचरा, प्लास्टिक और गंदगी साफ नजर आ रही है। परिवहन निगम की अनदेखी के चलते रोजाना सैकड़ों यात्री दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बस स्टैंड की इन टंकियों की नियमित सफाई वर्षों से नहीं की गई है। नतीजतन इनमें भरा पानी अब पीने योग्य नहीं रहा है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है, जब बंदर इन खुली टंकियों में उतरकर नहाते देखे जाते हैं। बावजूद इसके न तो टंकियों को ढकने की व्यवस्था की गई है और न ही किसी प्रकार की स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
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बस स्टैंड पर पहुंचने वाले यात्रियों को मजबूरी में यही दूषित पानी पीना पड़ता है। इससे पेट संबंधी बीमारियों, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद परिवहन निगम की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
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यात्रियों में रीना कुमारी, सीमा देवी, कौशल्या देवी, मनु कुमार, आशीष कुमार और रजत कुमार ने कहा कि कि यह परिवहन निगम की सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि यात्रियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। बस स्टैंड की सभी पानी की टंकियों की तुरंत सफाई करवाई जाए, उन्हें पूरी तरह ढका जाए और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल मिल सके और ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
टायफाइड, हेपेटाइटिस का रहता है डर : डॉ. जालम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि दूषित पानी पीने से टायफाइड, हेपेटाइटिस (पीलिया) और पोलियो जैसा संक्रमण फैल सकता हैं। इसके अलावा गंदे पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस के कारण हैजा, दस्त, डायरिया, और गंभीर उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं होती हैं। लंबे समय तक दूषित पानी पीने से लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि दूषित पानी बच्चे, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होता है।
एचआरटीसी के डीडीएम शुगल सिंह ने कहा कि मामला ध्यान में लाया गया है। टंकियों की सफाई करवाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे ताकि लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।