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Chamba News: घर बनाने से पहले भाड़े में ही खप जाती है मदद की राशि
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चंबा की चांजू पंचायत के गांव के लिए घोड़ो पर सामान ढोते लोग
चुराह (चंबा)। आजादी के 77 साल बाद भी चुराह विधानसभा क्षेत्र की चांजू पंचायत के आधा दर्जन गांव सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं।
चांजू पंचायत के रडू, माढी, सुंदरी, डिम्ह, भगोड़ी, फनौता और चैंजला गांवों में लोगों को सड़क सुविधा नसीब नहीं हो पाई है। इन गांवों में सड़क न होने के कारण मरीजों को पालकी या फिर खच्चरों के सहारे पांच किलोमीटर का दुर्गम पैदल रास्ता तय कर चांजू-बघेईगढ़ मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को घर बनाने के लिए धनराशि तो मिलती है, लेकिन सड़क न होने के कारण घरों की निर्माण सामग्री खच्चरों पर ढोने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों रमेश कुमार, दिलीप कुमार, कन्हैया राम, प्रकाश चंद, अशोक कुमार, प्रमोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, लोकिंद्र आदि ने बताया सड़क न होने के कारण निर्माण सामग्री लाने में इतना खर्च हो जाता है कि आवास योजना की राशि का बड़ा हिस्सा खच्चरों के भाड़े में ही चला जाता है। यही नहीं, बच्चों को स्कूल जाने के लिए जंगलों के बीच पांच किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को सुबह 6:00 बजे घर निकलना पड़ता है जिससे वे समय पर स्कूल पहुंच सकें। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द सड़क का निर्माण करवाया जाए।
चांजू पंचायत की प्रधान टेकू शर्मा ने प्रशासन से अपील की है कि इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर हरसंभव प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र शर्मा ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। जल्द कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेज कर सर्वे करवाया जाएगा।
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चांजू पंचायत के रडू, माढी, सुंदरी, डिम्ह, भगोड़ी, फनौता और चैंजला गांवों में लोगों को सड़क सुविधा नसीब नहीं हो पाई है। इन गांवों में सड़क न होने के कारण मरीजों को पालकी या फिर खच्चरों के सहारे पांच किलोमीटर का दुर्गम पैदल रास्ता तय कर चांजू-बघेईगढ़ मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को घर बनाने के लिए धनराशि तो मिलती है, लेकिन सड़क न होने के कारण घरों की निर्माण सामग्री खच्चरों पर ढोने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों रमेश कुमार, दिलीप कुमार, कन्हैया राम, प्रकाश चंद, अशोक कुमार, प्रमोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, लोकिंद्र आदि ने बताया सड़क न होने के कारण निर्माण सामग्री लाने में इतना खर्च हो जाता है कि आवास योजना की राशि का बड़ा हिस्सा खच्चरों के भाड़े में ही चला जाता है। यही नहीं, बच्चों को स्कूल जाने के लिए जंगलों के बीच पांच किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को सुबह 6:00 बजे घर निकलना पड़ता है जिससे वे समय पर स्कूल पहुंच सकें। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द सड़क का निर्माण करवाया जाए।
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चांजू पंचायत की प्रधान टेकू शर्मा ने प्रशासन से अपील की है कि इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर हरसंभव प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र शर्मा ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। जल्द कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेज कर सर्वे करवाया जाएगा।