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Chamba News: बैंड-बाजों के धुन पर भव्य शोभायात्रा के साथ सूही मेले का आगाज
Thu, 11 Apr 2024 10:03 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 11 Apr 2024 10:03 PM IST
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पिंक पैलेस से सूही माता के चिंह को सूही मढ़ ले जाने से पूर्व पालकी में चिंह को रखने के बाद पूजा
चंबा। जिला स्तरीय तीन दिवसीय सूही मेला वीरवार से शुरू हो गया। बैंड-बाजे की धुन पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मेले का आगाज पंडित की बेटी भार्गवी भारद्वाज ने विधिवत पूजा-अर्चना कर किया।
परंपरा के अनुसार इससे पहले राजपरिवार की कन्या ही मेले का शुभारंभ करती रही है। फूलों से सजी पालकी में पिंक पैलेस में पूजा-अर्चना के बाद रानी सुनयना के चिह्न भव्य शोभायात्रा के साथ सूही माता मंदिर तक लाए गए। पालकी को कहारों ने कंधा दिया। रानी सुनयना के चिह्न सूही मढ़ में स्थापित किए गए। शोभायात्रा के दौरान गद्दी समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में घुरेई नृत्य किया। महिलाएं आया बसोआ हो माए लगिया सूईयां असां सूईयां देखण जाणा हो’ घुरेई का गायन करते हुए चल रही थीं। सूही मढ़ में एक बार फिर पंडित की बेटी से पूजा-अर्चना की गई। शोभा यात्रा के आगे कन्या पारंपरिक परिधान पहनकर चली। उसके पीछे माता की पालकी, गृह रक्षक बैंड और प्रशासनिक और नगर परिषद चंबा के अधिकारी-कर्मचारियों समेत चंबा की जनपद शामिल रही।
वीरवार सुबह 10:30 बजे सूही माता मंदिर में उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल, सदर के विधायक नीरज नैयर, नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैय्यर ने रानी सुनयना की पूजा अर्चनय्की। इसके बाद बैंड-बाजे की धुनों पर माता के चिह्न पिंक पैलेस से फूलों से सजी पालकी में सूही मढ़ के लिए ले जाए गए। पालकी के आगे गद्दी वेशभूषा में कन्या को चलाया गया। राजनौण में शोभायात्रा में शामिल लोगों ने प्राकृतिक जलस्रोत से पानी पीया और आगे बढ़े। विधिवत पूजा-अर्चना के साथ तीन दिवसीय मेले का आगाज हुआ। चौंतड़ा स्थित नौण के आसपास अस्थायी दुकानों में तरह-तरह के पकवान सजाए गए थे। खिलौनों की दुकानें भी सज गई थीं। शहर के सैकड़ों लोग शोभायात्रा में शामिल हुए।
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इसलिए मनाया जाता सूही जातर मेला
मान्यता है कि चंबा के लोगों की प्यास बुझाने के लिए राजघराने से रानी सुनयना ने बलिदान दिया था। मलूणा स्थित पहाड़ी में रानी को समाधि के लिए ले जाया गया। समाधि लेने से पहले रानी सुनयना ने इच्छा जताई थी कि मेरी याद में हर वर्ष मेला लगाया जाए। इसमें सिर्फ महिलाएं ही शामिल होंगी। राज परिवार से मेले में कोई भाग न ले। मेले के दौरान सिर्फ राज परिवार की कुंवारी कन्या ही पूजा करेगी। रानी की समाधि के बाद चंबा शहर में पानी की किल्लत खत्म हुई थी। इसके बाद नगर परिषद रानी सुनयना की याद में तीन दिवसीय जिला स्तरीय मेला करवाती है।
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परंपरा के अनुसार इससे पहले राजपरिवार की कन्या ही मेले का शुभारंभ करती रही है। फूलों से सजी पालकी में पिंक पैलेस में पूजा-अर्चना के बाद रानी सुनयना के चिह्न भव्य शोभायात्रा के साथ सूही माता मंदिर तक लाए गए। पालकी को कहारों ने कंधा दिया। रानी सुनयना के चिह्न सूही मढ़ में स्थापित किए गए। शोभायात्रा के दौरान गद्दी समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में घुरेई नृत्य किया। महिलाएं आया बसोआ हो माए लगिया सूईयां असां सूईयां देखण जाणा हो’ घुरेई का गायन करते हुए चल रही थीं। सूही मढ़ में एक बार फिर पंडित की बेटी से पूजा-अर्चना की गई। शोभा यात्रा के आगे कन्या पारंपरिक परिधान पहनकर चली। उसके पीछे माता की पालकी, गृह रक्षक बैंड और प्रशासनिक और नगर परिषद चंबा के अधिकारी-कर्मचारियों समेत चंबा की जनपद शामिल रही।
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वीरवार सुबह 10:30 बजे सूही माता मंदिर में उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल, सदर के विधायक नीरज नैयर, नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैय्यर ने रानी सुनयना की पूजा अर्चनय्की। इसके बाद बैंड-बाजे की धुनों पर माता के चिह्न पिंक पैलेस से फूलों से सजी पालकी में सूही मढ़ के लिए ले जाए गए। पालकी के आगे गद्दी वेशभूषा में कन्या को चलाया गया। राजनौण में शोभायात्रा में शामिल लोगों ने प्राकृतिक जलस्रोत से पानी पीया और आगे बढ़े। विधिवत पूजा-अर्चना के साथ तीन दिवसीय मेले का आगाज हुआ। चौंतड़ा स्थित नौण के आसपास अस्थायी दुकानों में तरह-तरह के पकवान सजाए गए थे। खिलौनों की दुकानें भी सज गई थीं। शहर के सैकड़ों लोग शोभायात्रा में शामिल हुए।
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इसलिए मनाया जाता सूही जातर मेला
मान्यता है कि चंबा के लोगों की प्यास बुझाने के लिए राजघराने से रानी सुनयना ने बलिदान दिया था। मलूणा स्थित पहाड़ी में रानी को समाधि के लिए ले जाया गया। समाधि लेने से पहले रानी सुनयना ने इच्छा जताई थी कि मेरी याद में हर वर्ष मेला लगाया जाए। इसमें सिर्फ महिलाएं ही शामिल होंगी। राज परिवार से मेले में कोई भाग न ले। मेले के दौरान सिर्फ राज परिवार की कुंवारी कन्या ही पूजा करेगी। रानी की समाधि के बाद चंबा शहर में पानी की किल्लत खत्म हुई थी। इसके बाद नगर परिषद रानी सुनयना की याद में तीन दिवसीय जिला स्तरीय मेला करवाती है।