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परेल में रावी नदी पर दो महीने में बनेगा स्टील का पुल
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निर्माणाधीन परेल पुल।
- फोटो : Chamba
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चंबा। चंबा-पठानकोट एनएच पर परेल के पास रावी नदी पर स्टील का पुल दो महीने में तैयार हो जाएगा। पुल का 70 प्रतिशत काम हो चुका है। पुल बनने से मेडिकल कॉलेज चंबा का नया भवन सीधे एनएच से जुड़ जाएगा। इससे करीब 125 पंचायतों के लोगों का लाभ मिलेगा।
पुल बनने के बाद मरीज को यदि टांडा रेफर किया जाता है तो उसे वाया बालू जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरोल से सीधे परेल होते हुए रोगी वाहन टांडा या पठानकोट की तरफ जा सकेंगे। पुल से तीन विधानसभा क्षेत्रों चंबा, डलहौजी और चुराह की 125 पंचायतों के हजारों की आबादी को पुल का लाभ मिलेगा। साथ ही उनका सफर भी सुगम होगा।
ये लोग भी सरोल से सीधे पठानकोट या अन्य जिलों की तरफ सफर कर पाएंगे। उन्हें तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा। सबसे ज्यादा फायदा ग्राम पंचायत सरोल, हरीपुर, उदयपुर, राजपुरा और साथ लगती अन्य पंचायतों को होगा। इन पंचायतों के लोगों को उदयपुर और सरोल आने जाने के लिए वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। पुल बनने से इन पंचायतों की आपस में दूरी आधा किलोमीटर से भी कम रह जाएगी।
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95 मीटर पुल पर दस करोड़ हो रहे खर्च
95 मीटर लंबे पुल के निर्माण पर आठ से दस करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। लोनिवि ने ठेकेदार को अप्रैल में पुल तैयार करने के आदेश दिए हैं। पुल का 25 मीटर भाग आरसीसी और 70 मीटर भाग स्टील ट्रस्ट से बनाया गया है। पुल की मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। पुल को छोटे- बड़े वाहनों की आवाजाही के अनुसार बनाया गया है। डलहौजी, भनौता, चनेड़, द्रड्डा, बाथरी, नैनीखड्ड, बनीखेत, गोली, परेल और दर्जनों पंचायत के लोग इस पुल के जरिये चंद मिनटों में सरोल में बन रहे नए मेडिकल कॉलेज में पहुंच पाएंगे। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
बागवानों-किसानों को भी मिलेगी राहत
विधानसभा क्षेत्र चुराह और डलहौजी के सलूणी, किहार, मेड़ा, भांदल, सनूंह, संघणी, डियूर समेत सिढ़कुंड, हरीपुर, सरोल, माणी, मसरूंड, गैला, राजपुरा, कियाणी, राजनगर और अन्य पंचायतों के किसान-बागवान नगदी फसलों को बेचने के लिए पुल के ऊपर से पठानकोट की मंडी में आसानी से जा पाएंगे। पुल ध्वस्त होने के बाद किसानों को फसल पठानकोट की मंडी तक पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही थी। सरोल पहुंचने के बाद किसानों को पहले बालू जाना पड़ता था। उसके बाद परेल से होते हुए पठानकोट जाना पड़ता था। अब किसान सरोल से सीधे पुल के रास्ते पठानकोट को निकल पाएंगे। बता दें कि हर वर्ष विस क्षेत्र चुराह, डलहौजी और चंबा से हजारों रुपये की नगदी फसलों और फलों को बाहरी मंडियों में किसान-बागवान बेचने के लिए लेकर जाते हैं।
2017 में गिरा था पुल
अशोक कुमार, शशि कुमार, रमेश चंद, किशोर, अमर चंद, टेक चंद, सुरेंद्र, भाग सिंह, योगराज और नरेंद्र ने बताया कि परेल में रावी नदी पर बना पुल 19 अक्तूबर, 2017 को गिर गया था। पुल टूटने से लोग परेशान थे। इससे उनके कामकाज पर भी काफी असर पड़ा था। सिद्धपुरा के कई लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए परेल, उदयपुर, भनौता, चनेड़, सरू, कोहलड़ी, साच, सुल्तानपुर जाते हैं। उनको वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा था। ऐसे में नया पुल बनने से उन सभी लोगों को अपनी आजीविका कमाने में आसानी मिलेगी।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि परेल में स्टील ब्रिज का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चलाया गया है। दो महीनों में पुल बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद आस पास की पंचायतों को वाया बालू होकर आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी। पुल निर्माण में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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पुल बनने के बाद मरीज को यदि टांडा रेफर किया जाता है तो उसे वाया बालू जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरोल से सीधे परेल होते हुए रोगी वाहन टांडा या पठानकोट की तरफ जा सकेंगे। पुल से तीन विधानसभा क्षेत्रों चंबा, डलहौजी और चुराह की 125 पंचायतों के हजारों की आबादी को पुल का लाभ मिलेगा। साथ ही उनका सफर भी सुगम होगा।
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ये लोग भी सरोल से सीधे पठानकोट या अन्य जिलों की तरफ सफर कर पाएंगे। उन्हें तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा। सबसे ज्यादा फायदा ग्राम पंचायत सरोल, हरीपुर, उदयपुर, राजपुरा और साथ लगती अन्य पंचायतों को होगा। इन पंचायतों के लोगों को उदयपुर और सरोल आने जाने के लिए वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। पुल बनने से इन पंचायतों की आपस में दूरी आधा किलोमीटर से भी कम रह जाएगी।
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95 मीटर पुल पर दस करोड़ हो रहे खर्च
95 मीटर लंबे पुल के निर्माण पर आठ से दस करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। लोनिवि ने ठेकेदार को अप्रैल में पुल तैयार करने के आदेश दिए हैं। पुल का 25 मीटर भाग आरसीसी और 70 मीटर भाग स्टील ट्रस्ट से बनाया गया है। पुल की मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। पुल को छोटे- बड़े वाहनों की आवाजाही के अनुसार बनाया गया है। डलहौजी, भनौता, चनेड़, द्रड्डा, बाथरी, नैनीखड्ड, बनीखेत, गोली, परेल और दर्जनों पंचायत के लोग इस पुल के जरिये चंद मिनटों में सरोल में बन रहे नए मेडिकल कॉलेज में पहुंच पाएंगे। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
बागवानों-किसानों को भी मिलेगी राहत
विधानसभा क्षेत्र चुराह और डलहौजी के सलूणी, किहार, मेड़ा, भांदल, सनूंह, संघणी, डियूर समेत सिढ़कुंड, हरीपुर, सरोल, माणी, मसरूंड, गैला, राजपुरा, कियाणी, राजनगर और अन्य पंचायतों के किसान-बागवान नगदी फसलों को बेचने के लिए पुल के ऊपर से पठानकोट की मंडी में आसानी से जा पाएंगे। पुल ध्वस्त होने के बाद किसानों को फसल पठानकोट की मंडी तक पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही थी। सरोल पहुंचने के बाद किसानों को पहले बालू जाना पड़ता था। उसके बाद परेल से होते हुए पठानकोट जाना पड़ता था। अब किसान सरोल से सीधे पुल के रास्ते पठानकोट को निकल पाएंगे। बता दें कि हर वर्ष विस क्षेत्र चुराह, डलहौजी और चंबा से हजारों रुपये की नगदी फसलों और फलों को बाहरी मंडियों में किसान-बागवान बेचने के लिए लेकर जाते हैं।
2017 में गिरा था पुल
अशोक कुमार, शशि कुमार, रमेश चंद, किशोर, अमर चंद, टेक चंद, सुरेंद्र, भाग सिंह, योगराज और नरेंद्र ने बताया कि परेल में रावी नदी पर बना पुल 19 अक्तूबर, 2017 को गिर गया था। पुल टूटने से लोग परेशान थे। इससे उनके कामकाज पर भी काफी असर पड़ा था। सिद्धपुरा के कई लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए परेल, उदयपुर, भनौता, चनेड़, सरू, कोहलड़ी, साच, सुल्तानपुर जाते हैं। उनको वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा था। ऐसे में नया पुल बनने से उन सभी लोगों को अपनी आजीविका कमाने में आसानी मिलेगी।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि परेल में स्टील ब्रिज का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चलाया गया है। दो महीनों में पुल बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद आस पास की पंचायतों को वाया बालू होकर आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी। पुल निर्माण में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।