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Chamba News: मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में 24 घंटे नहीं मिल रहीं सेवाएं
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में लैब तकनीशियनों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। सरकारी प्रयोगशाला में शाम 4:00 बजे के बाद ताला लटक जाता है।
मरीजों को दोपहर बाद अपने टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना पड़ता है। सरकारी प्रयोगशाला में दोपहर तक मरीजों के टेस्ट के लिए सैंपल लिए जाते हैं। उसके बाद उन सैंपल की जांच कर रिपोर्ट बनाई जाती है। इसके चलते मरीजों को अपने टेस्ट करवाने के लिए पूरी तरह से निजी लैब पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन चाहकर भी सरकारी प्रयोगशाला में मरीजों के 24 घंटे टेस्ट सुविधा शुरू नहीं करवा पा रहा है। चंबा मेडिकल कॉलेज में लैब तकनीशियनों के 96 पद स्वीकृत हैं। इनमें 85 पद खाली पड़े हैं। मात्र 11 पदों पर ही लैब तकनीशियनों की नियमित तैनाती की गई है। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज की सरकारी प्रयोगशाला मरीजों को 24 घंटे सुविधा नहीं दे पा रही है। हालांकि सरकार की तरफ से 25 लैब तकनीशियनों के पद आउट सोर्स प्रणाली के तहत भरे गए हैं, लेकिन सरकारी प्रयोगशाला को 24 घंटे चलाने के लिए लैब तकनीशियनों के सभी पद भरे जाना जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज में एमएलटी ग्रेड-दो के 48 पद स्वीकृत हैं। इसमें 42 खाली हैं। ब्लड बैंक तकनीशियन के स्वीकृत छह पद खाली हैं। लैब असिस्टेंट के 41 पदों में 36 खाली हैं। बायोकेमिस्ट का एक पद खाली है। इन पदों को भरने के लिए लैब तकनीशियन एसोसिएशन भी सरकार व विभाग से कई बार मांग कर चुकी है। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला की पौने छह लाख आबादी निर्भर करती है।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि लैब तकनीशियनों के रिक्त पदों के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। जल्द ही सरकार इन पदों पर तैनाती कर सकती है। आउट सोर्स के आधार पर इन पदों पर कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
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मरीजों को दोपहर बाद अपने टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना पड़ता है। सरकारी प्रयोगशाला में दोपहर तक मरीजों के टेस्ट के लिए सैंपल लिए जाते हैं। उसके बाद उन सैंपल की जांच कर रिपोर्ट बनाई जाती है। इसके चलते मरीजों को अपने टेस्ट करवाने के लिए पूरी तरह से निजी लैब पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन चाहकर भी सरकारी प्रयोगशाला में मरीजों के 24 घंटे टेस्ट सुविधा शुरू नहीं करवा पा रहा है। चंबा मेडिकल कॉलेज में लैब तकनीशियनों के 96 पद स्वीकृत हैं। इनमें 85 पद खाली पड़े हैं। मात्र 11 पदों पर ही लैब तकनीशियनों की नियमित तैनाती की गई है। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज की सरकारी प्रयोगशाला मरीजों को 24 घंटे सुविधा नहीं दे पा रही है। हालांकि सरकार की तरफ से 25 लैब तकनीशियनों के पद आउट सोर्स प्रणाली के तहत भरे गए हैं, लेकिन सरकारी प्रयोगशाला को 24 घंटे चलाने के लिए लैब तकनीशियनों के सभी पद भरे जाना जरूरी है।
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मेडिकल कॉलेज में एमएलटी ग्रेड-दो के 48 पद स्वीकृत हैं। इसमें 42 खाली हैं। ब्लड बैंक तकनीशियन के स्वीकृत छह पद खाली हैं। लैब असिस्टेंट के 41 पदों में 36 खाली हैं। बायोकेमिस्ट का एक पद खाली है। इन पदों को भरने के लिए लैब तकनीशियन एसोसिएशन भी सरकार व विभाग से कई बार मांग कर चुकी है। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला की पौने छह लाख आबादी निर्भर करती है।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि लैब तकनीशियनों के रिक्त पदों के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। जल्द ही सरकार इन पदों पर तैनाती कर सकती है। आउट सोर्स के आधार पर इन पदों पर कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।