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Chamba News: बारिश ने उम्मीदें सींचीं, खाद के संकट ने सुखा दिया भरोसा
Fri, 03 Jul 2026 10:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 03 Jul 2026 10:44 PM IST
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यूरिया की कमी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, बोले- भंडारण केंद्रों से लौट रहे खाली हाथ
एनपीके खाद की पहले ही चल रही है किल्लत, मक्की की फसल के लिए जरूरी है खाद
जिले से भेजी गई है 30 हजार बैग की मांग, केवल 1200 बैग ही आने से किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। खेतों की हरियाली इस बार किसानों के चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सकी। बारिश ने फसल को रफ्तार दी लेकिन यूरिया की कमी ने उम्मीदों की जड़ों को ही कमजोर करना शुरू कर दिया। हालात ऐसे हैं कि खेत खाद मांग रहे हैं और किसान भंडारण केंद्रों पर सिर्फ इंतजार लेकर लौट रहे हैं।
अच्छी बारिश के बाद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मक्की की फसल तेजी से बढ़ रही है। इस बीच, एनपीके (12:32:16) की किल्लत के बीच अब यूरिया की भी भारी कमी सामने आई है। इससे खेती का पूरा चक्र प्रभावित होता दिख रहा है। खाद भंडारण केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की कतारें लग रही हैं। सीमित सप्लाई के कारण अधिकांश किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
इस बार करीब 30 हजार यूरिया खाद के बैग की मांग के मुकाबले केवल 1200 बैग ही पहुंचे हैं। इससे जरूरत का बड़ा अंतर पैदा हो गया है। खाद वितरण केंद्रों पर हालात ऐसे हैं कि स्टॉक आते ही खत्म हो जा रहा है। कर्मचारियों से किसानों को यही जवाब मिल रहा है कि नई सप्लाई का इंतजार है।
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एक तरफ कृषि विभाग भी किसानों को मक्की की फसल में यूरिया खाद डालने की सलाह दे रहा है तो दूसरी तरफ बीते दो माह से इसकी खेप ही नहीं पहुंच पाई है। एनपीके खाद भी तीन माह से नहीं मिल रही है। इससे किसान परेशान रहे। यूरिया खाद का 45 किलोग्राम के एक बैग की कीमत 270 रुपये है। अगर समय पर यूरिया खाद की खेप नहीं पहुंची तो किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ सकती है। उधर, खाद भंडारण केंद्र के प्रभारी गगन कुमार ने बताया कि यूरिया की मांग भेजी है। अभी पूरी सप्लाई नहीं आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही नई खेप पहुंचने पर स्थिति सामान्य हो जाएगी।
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एनपीके खाद की पहले ही चल रही है किल्लत, मक्की की फसल के लिए जरूरी है खाद
जिले से भेजी गई है 30 हजार बैग की मांग, केवल 1200 बैग ही आने से किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। खेतों की हरियाली इस बार किसानों के चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सकी। बारिश ने फसल को रफ्तार दी लेकिन यूरिया की कमी ने उम्मीदों की जड़ों को ही कमजोर करना शुरू कर दिया। हालात ऐसे हैं कि खेत खाद मांग रहे हैं और किसान भंडारण केंद्रों पर सिर्फ इंतजार लेकर लौट रहे हैं।
अच्छी बारिश के बाद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मक्की की फसल तेजी से बढ़ रही है। इस बीच, एनपीके (12:32:16) की किल्लत के बीच अब यूरिया की भी भारी कमी सामने आई है। इससे खेती का पूरा चक्र प्रभावित होता दिख रहा है। खाद भंडारण केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की कतारें लग रही हैं। सीमित सप्लाई के कारण अधिकांश किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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इस बार करीब 30 हजार यूरिया खाद के बैग की मांग के मुकाबले केवल 1200 बैग ही पहुंचे हैं। इससे जरूरत का बड़ा अंतर पैदा हो गया है। खाद वितरण केंद्रों पर हालात ऐसे हैं कि स्टॉक आते ही खत्म हो जा रहा है। कर्मचारियों से किसानों को यही जवाब मिल रहा है कि नई सप्लाई का इंतजार है।
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एक तरफ कृषि विभाग भी किसानों को मक्की की फसल में यूरिया खाद डालने की सलाह दे रहा है तो दूसरी तरफ बीते दो माह से इसकी खेप ही नहीं पहुंच पाई है। एनपीके खाद भी तीन माह से नहीं मिल रही है। इससे किसान परेशान रहे। यूरिया खाद का 45 किलोग्राम के एक बैग की कीमत 270 रुपये है। अगर समय पर यूरिया खाद की खेप नहीं पहुंची तो किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ सकती है। उधर, खाद भंडारण केंद्र के प्रभारी गगन कुमार ने बताया कि यूरिया की मांग भेजी है। अभी पूरी सप्लाई नहीं आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही नई खेप पहुंचने पर स्थिति सामान्य हो जाएगी।