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Chamba News: श्रम संहिता अधिसूचना के खिलाफ प्रदर्शन का एलान
Sun, 23 Nov 2025 12:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 23 Nov 2025 12:14 AM IST
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चंबा। केंद्र सरकार की श्रम संहिता अधिसूचना के खिलाफ ट्रेड यूनियनें 26 नवंबर को तीसा और चंबा में प्रदर्शन करेंगी।
सीटू जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने बताया कि इस अधिसूचना को जारी करके सरकार ने देश के मेहनतकश लोगों के साथ एक भ्रामक धोखा किया है।
बिहार चुनावों में जीत से उत्साहित केंद्र सरकार ने मीडिया रिपोर्टों और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के ट्वीट के अनुसार चार श्रम संहिताओं को प्रभावी बनाने के लिए खुद को अत्यधिक सशक्त महसूस किया है।
श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे पर 13 नवंबर को मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने तुरंत भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) बुलाने और श्रम संहिताओं को खत्म करने का आग्रह किया था। यहां तक कि वित्त मंत्रालय द्वारा 20 नवंबर को आयोजित बजट-पूर्व परामर्श बैठक में भी ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से श्रम संहिताओं को खत्म करने और आईएलसी बुलाने का आग्रह किया गया था, जो 2015 के बाद से आयोजित नहीं की गई है लेकिन सरकार हठपूर्वक अनुत्तरदायी बनी रही।
उन्होंने सरकार को गंभीर चेतावनी दी है कि भारत के कामकाजी लोग श्रम संहिताओं को वापस लिए जाने तक लड़ाई लड़ेंगे। केंद्र सरकार के लेबर कोड को लागू करने के फैसले के खिलाफ 24 नवंबर को कार्य स्थलों पर गेट मीटिंग, धरने, काली पट्टी पहन कर विरोध जताया जाएगा। 26 नवंबर को प्रदर्शन किया जाएगा।
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सीटू जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने बताया कि इस अधिसूचना को जारी करके सरकार ने देश के मेहनतकश लोगों के साथ एक भ्रामक धोखा किया है।
बिहार चुनावों में जीत से उत्साहित केंद्र सरकार ने मीडिया रिपोर्टों और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के ट्वीट के अनुसार चार श्रम संहिताओं को प्रभावी बनाने के लिए खुद को अत्यधिक सशक्त महसूस किया है।
श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे पर 13 नवंबर को मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने तुरंत भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) बुलाने और श्रम संहिताओं को खत्म करने का आग्रह किया था। यहां तक कि वित्त मंत्रालय द्वारा 20 नवंबर को आयोजित बजट-पूर्व परामर्श बैठक में भी ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से श्रम संहिताओं को खत्म करने और आईएलसी बुलाने का आग्रह किया गया था, जो 2015 के बाद से आयोजित नहीं की गई है लेकिन सरकार हठपूर्वक अनुत्तरदायी बनी रही।
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उन्होंने सरकार को गंभीर चेतावनी दी है कि भारत के कामकाजी लोग श्रम संहिताओं को वापस लिए जाने तक लड़ाई लड़ेंगे। केंद्र सरकार के लेबर कोड को लागू करने के फैसले के खिलाफ 24 नवंबर को कार्य स्थलों पर गेट मीटिंग, धरने, काली पट्टी पहन कर विरोध जताया जाएगा। 26 नवंबर को प्रदर्शन किया जाएगा।
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