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बिजली गुल, बीच में बंद करना पड़ा डायलिसिस
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मेडिकल कॉलेज चंबा की डायलिसिस यूनिट में उपचाराधीन मरीज।
- फोटो : Chamba
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डायलिसिस केंद्र में शुक्रवार को आधा दर्जन मरीजों को बिना डायलिसिस करवाए घर लौटना पड़ा। कुछ मरीजों का डायलिसिस बीच में ही बंद करना पड़ा क्योंकि, सुबह साढ़े दस बजे के समय अचानक अस्पताल में बिजली गुल हो गई।
दोपहर तक बिजली की आपूर्ति बहाल न होने की वजह से मरीजों को बिना डायलिसिस करवाए घरों को लौटना पड़ा। हालांकि, बिजली की बहाली के लिए काफी देर तक मरीज और उनके तीमारदार केंद्र के बाहर इंतजार करते रहे। जब काफी देर बाद बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो संबंधित केंद्र के चिकित्सक ने उन्हें घर जाने की सलाह दी। इससे पहले भी बिजली गुल होने से मरीजों को बिना डायलिसिस करवाए घरों को लौटना पड़ा था। मरीज और तीमारदार इस केंद्र को जेनरेटर सुविधा से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। ऐसा होने से बिजली आपूर्ति ठप होने पर मरीजों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि डायलिसिस केंद्र में बिजली गुल होने से मरीजों को परेशानी हुई है। समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए उचित प्रबंध किए जा रहे हैं। इससे भविष्य में मरीजों को ऐसी समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।
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पहले भी हो चुकी है समस्या, वैकल्पिक व्यवस्था हो
नैनीखड्ड निवासी सुरेश कुमारी ने बताया कि कुछ दिन पहले भी वह अपने मरीज को लेकर चंबा मेडिकल कॉलेज आई थीं। लेकिन, बीच में बिजली चले जाने से डायलिसिस नहीं हो पाया। इससे मरीज की सेहत बिगड़ सकती है और मरीज की जान को खतरा पैदा हो सकता है। जिला प्रशासन और प्रबंधन को इस दिशा में उचित कदम उठाने चाहिए।
कंदला निवासी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि डायलिसिस करवाने वाला मरीज पहले ही परेशान होता है। गंभीर रूप से बीमार रोगी डायलिसिस करवाने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में बीच में बिजली गुल हो जाने पर मरीजों को वापस लौटा दिया जाता है। ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।
कियानी निवासी तनु कुमारी ने बताया कि डायलिसिस के लिए मरीज को चंबा अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी परेशानी होती है। ऐसे में अगर बिजली गुल होने पर डायलिसिस न हो तो मरीज के साथ तीमारदारों को भी परेशानी होती है। केंद्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए जेनरेटर की सुविधा होनी चाहिए।
सिढकुंड निवासी दीनानाथ ने बताया कि किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीज डायलिसिस करवाने के लिए अस्पताल जाते हैं। समय पर डायलिसिस न होने पर उनकी तबीयत बिगड़ भी सकती है। इसलिए प्रशासन और प्रबंधन को यहां जेनरेटर लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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दोपहर तक बिजली की आपूर्ति बहाल न होने की वजह से मरीजों को बिना डायलिसिस करवाए घरों को लौटना पड़ा। हालांकि, बिजली की बहाली के लिए काफी देर तक मरीज और उनके तीमारदार केंद्र के बाहर इंतजार करते रहे। जब काफी देर बाद बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो संबंधित केंद्र के चिकित्सक ने उन्हें घर जाने की सलाह दी। इससे पहले भी बिजली गुल होने से मरीजों को बिना डायलिसिस करवाए घरों को लौटना पड़ा था। मरीज और तीमारदार इस केंद्र को जेनरेटर सुविधा से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। ऐसा होने से बिजली आपूर्ति ठप होने पर मरीजों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि डायलिसिस केंद्र में बिजली गुल होने से मरीजों को परेशानी हुई है। समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए उचित प्रबंध किए जा रहे हैं। इससे भविष्य में मरीजों को ऐसी समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।
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पहले भी हो चुकी है समस्या, वैकल्पिक व्यवस्था हो
नैनीखड्ड निवासी सुरेश कुमारी ने बताया कि कुछ दिन पहले भी वह अपने मरीज को लेकर चंबा मेडिकल कॉलेज आई थीं। लेकिन, बीच में बिजली चले जाने से डायलिसिस नहीं हो पाया। इससे मरीज की सेहत बिगड़ सकती है और मरीज की जान को खतरा पैदा हो सकता है। जिला प्रशासन और प्रबंधन को इस दिशा में उचित कदम उठाने चाहिए।
कंदला निवासी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि डायलिसिस करवाने वाला मरीज पहले ही परेशान होता है। गंभीर रूप से बीमार रोगी डायलिसिस करवाने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में बीच में बिजली गुल हो जाने पर मरीजों को वापस लौटा दिया जाता है। ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।
कियानी निवासी तनु कुमारी ने बताया कि डायलिसिस के लिए मरीज को चंबा अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी परेशानी होती है। ऐसे में अगर बिजली गुल होने पर डायलिसिस न हो तो मरीज के साथ तीमारदारों को भी परेशानी होती है। केंद्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए जेनरेटर की सुविधा होनी चाहिए।
सिढकुंड निवासी दीनानाथ ने बताया कि किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीज डायलिसिस करवाने के लिए अस्पताल जाते हैं। समय पर डायलिसिस न होने पर उनकी तबीयत बिगड़ भी सकती है। इसलिए प्रशासन और प्रबंधन को यहां जेनरेटर लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए।