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Chamba News: मिंजर मेला देखने की थी तैयारी, परिवार की खुशियों को लगा ग्रहण
Wed, 29 Jul 2026 10:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 29 Jul 2026 10:56 AM IST
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चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले को देखने के लिए घर लौट रही कीर्ति को क्या पता था कि इस बार उसकी वापसी घर की चौखट तक नहीं बल्कि अंतिम यात्रा में होगी। मां सुदर्शना और छोटा भाई विशाल उसके स्वागत की तैयारियां कर चुके थे।
तीनों ने साथ मिलकर मिंजर मेला घूमने और खरीदारी करने की योजना बनाई थी लेकिन लाहड़ के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने परिवार की सारी खुशियां पलभर में छीन लीं। चंडीगढ़ से अपने चाचा के साथ कार में हंसी-खुशी घर के लिए निकली कीर्ति को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दूरी पर मौत उसका इंतजार कर रही है।
हादसे में उसकी और परिवार के चार अन्य सदस्यों की जान चली गई। जिस बेटी के स्वागत में घर के दरवाजे खुले थे, उसकी अर्थी घर पहुंची तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। कीर्ति बचपन से पढ़ाई में मेधावी थी। उसकी मां सुदर्शना, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, सीमित आय के बावजूद बेटी को पढ़ा-लिखाकर वकील बनाना चाहती थीं।
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उन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए बेटी की पढ़ाई जारी रखी। कीर्ति भी मां के सपनों को साकार करने के लिए पूरी लगन से पढ़ाई कर रही थी लेकिन एक पल में उसके सारे सपने अधूरे रह गए। इस परिवार पर दुखों का पहाड़ पहली बार नहीं टूटा था।
करीब आठ वर्ष पहले सड़क हादसे में कीर्ति के पिता केसर सिंह की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद मां ने अकेले ही बेटे-बेटी की परवरिश की। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बच्चों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। अब दूसरे हादसे ने उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद भी छीन ली।
घर पर छोटा भाई विशाल बहन के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। उसे विश्वास था कि बहन आएगी तो दोनों मिंजर मेले की रौनक साथ देखेंगे। लेकिन जिस घर में हंसी-खुशी गूंजने वाली थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां और यादें रह गई हैं। कीर्ति के अधूरे सपने और परिवार का यह असहनीय दर्द पूरे क्षेत्र को गमगीन कर गया।
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तीनों ने साथ मिलकर मिंजर मेला घूमने और खरीदारी करने की योजना बनाई थी लेकिन लाहड़ के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने परिवार की सारी खुशियां पलभर में छीन लीं। चंडीगढ़ से अपने चाचा के साथ कार में हंसी-खुशी घर के लिए निकली कीर्ति को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दूरी पर मौत उसका इंतजार कर रही है।
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हादसे में उसकी और परिवार के चार अन्य सदस्यों की जान चली गई। जिस बेटी के स्वागत में घर के दरवाजे खुले थे, उसकी अर्थी घर पहुंची तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। कीर्ति बचपन से पढ़ाई में मेधावी थी। उसकी मां सुदर्शना, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, सीमित आय के बावजूद बेटी को पढ़ा-लिखाकर वकील बनाना चाहती थीं।
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उन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए बेटी की पढ़ाई जारी रखी। कीर्ति भी मां के सपनों को साकार करने के लिए पूरी लगन से पढ़ाई कर रही थी लेकिन एक पल में उसके सारे सपने अधूरे रह गए। इस परिवार पर दुखों का पहाड़ पहली बार नहीं टूटा था।
करीब आठ वर्ष पहले सड़क हादसे में कीर्ति के पिता केसर सिंह की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद मां ने अकेले ही बेटे-बेटी की परवरिश की। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बच्चों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। अब दूसरे हादसे ने उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद भी छीन ली।
घर पर छोटा भाई विशाल बहन के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। उसे विश्वास था कि बहन आएगी तो दोनों मिंजर मेले की रौनक साथ देखेंगे। लेकिन जिस घर में हंसी-खुशी गूंजने वाली थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां और यादें रह गई हैं। कीर्ति के अधूरे सपने और परिवार का यह असहनीय दर्द पूरे क्षेत्र को गमगीन कर गया।