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Chamba News: कंपाउंडर के सहारे चल रहा पीएचसी द्रड्डा
Tue, 09 Dec 2025 11:53 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 09 Dec 2025 11:53 PM IST
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चनेड़ (चंबा)। प्रदेश सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रही है, लेकिन आकांक्षी जिले में हालात बेहद खराब है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) द्रड्डा कंपाउंडर के सहारे चल रहा है। इसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सर्दी-जुकाम के लिए भी लोगों को चंबा मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मानें तो इस बारे में वे कई बार विभाग को अवगत करवा चुके है। अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है। संस्थान में स्टाफ नर्स सहित चिकित्सक और प्रयोगशाला सहायक के पद खाली हैं। इस बात को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्रड्डा के तहत द्रड्डा, चीलबंगला, पंजोह, कोहलड़ी की करीब चार हजार की आबादी निर्भर करती है।
प्रदेश सरकार की ओर से रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। इस बारे में वे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।
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खेम राज, स्थानीय निवासी
एक कंपाउंडर के सहारे ही व्यवस्था चलाई जा रही है। सरकार भरपूर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के दावे तो कर रही है। मगर हकीकत में हालात बेहद खराब है। सरकार जल्द सुध ले। काका मांडला, स्थानीय निवासी
इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत करीब चार पंचायतों की चार हजार से अधिक आबादी निर्भर करती है। इलाज के नाम पर उन्हें स्वास्थ्य संस्थान में कुछ नहीं मिल रहा है। इससे दिक्कतें हो रही हैं। रमेश कुमार, स्थानीय निवासी
ग्रामीणों को इलाज के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज या बाथरी का रुख करना पड़ रहा है। जो करीब 20 से 30 किलोमीटर दूर है। सरकार जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरें। पंकज मांडला, स्थानीय निवासी
यह मामला ध्यान में है। इस बारे में सरकार को अवगत करवाया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही सरकार उचित पहल करेगी। डॉ. जालम भारद्वाज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंबा
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सर्दी-जुकाम के लिए भी लोगों को चंबा मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मानें तो इस बारे में वे कई बार विभाग को अवगत करवा चुके है। अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है। संस्थान में स्टाफ नर्स सहित चिकित्सक और प्रयोगशाला सहायक के पद खाली हैं। इस बात को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्रड्डा के तहत द्रड्डा, चीलबंगला, पंजोह, कोहलड़ी की करीब चार हजार की आबादी निर्भर करती है।
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प्रदेश सरकार की ओर से रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। इस बारे में वे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।
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खेम राज, स्थानीय निवासी
एक कंपाउंडर के सहारे ही व्यवस्था चलाई जा रही है। सरकार भरपूर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के दावे तो कर रही है। मगर हकीकत में हालात बेहद खराब है। सरकार जल्द सुध ले। काका मांडला, स्थानीय निवासी
इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत करीब चार पंचायतों की चार हजार से अधिक आबादी निर्भर करती है। इलाज के नाम पर उन्हें स्वास्थ्य संस्थान में कुछ नहीं मिल रहा है। इससे दिक्कतें हो रही हैं। रमेश कुमार, स्थानीय निवासी
ग्रामीणों को इलाज के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज या बाथरी का रुख करना पड़ रहा है। जो करीब 20 से 30 किलोमीटर दूर है। सरकार जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरें। पंकज मांडला, स्थानीय निवासी
यह मामला ध्यान में है। इस बारे में सरकार को अवगत करवाया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही सरकार उचित पहल करेगी। डॉ. जालम भारद्वाज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंबा