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जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ रहा ज्यूरी नाला

Sat, 24 Sep 2022 09:33 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Sep 2022 09:33 PM IST
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People crossing the jury drain risking their lives
पेड़ के तने के सहारे नाले को पार करते ज्यूरी गांव के लोग।संवाद - फोटो : Chamba
चुराह (चंबा)। ग्राम पंचायत चरड़ा के ज्यूरी गांव के लोग दस साल से जान जोखिम में डालकर ज्यूरी नाले के बीच से आवाजाही कर रहे हैं। बरसात होने पर पानी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थिति में ग्रामीणों को वाया गुवाड़ी होकर आवाजाही करनी पड़ती है।
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इस दौरान ग्रामीण दो घंटे तक पैदल चलते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। उन्हें चरड़ा स्कूल तक पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है। तीन दिन पहले ग्रामीणों ने स्वयं नाले पर पुल का जुगाड़ करने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने जंगल में गिरे हुए पेड़ को उठाकर नाले के आरपार रख दिया। इस पेड़ के ऊपर से अभी ग्रामीणों ने आवाजाही शुुरू ही की थी कि कुछ ही देर में नाले का जलस्तर इतना बढ़ गया कि अपने साथ उस पेड़ को भी बहा ले गया। अब ग्रामीणों को वाया गुवाड़ी गांव से होकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
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ग्रामीणों जमालदीन, फकरदीन, फतेहमुहम्मद, याकूब अली, सांही और लाल सेन ने बताया कि ज्यूरी चुराह विधानसभा क्षेत्र का सबसे दुर्गम गांव है। यहां 80 परिवार अपना गुजर बसर करते हैं। इन परिवारों को अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए ज्यूरी नाले को पार कर चरड़ा या तीसा पहुंचना पड़ता है लेकिन बरसात के दिनों में यह नाला नदी के रूप में तबदील हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि दस साल पहले नाले के ऊपर लकड़ी का पुल बना था जो नाले में आई बाढ़ में बह गया। तब से लेकर आज तक यहां नया पुल नहीं बनाया जा सका। यही कारण है कि आज भी ज्यूरी गांव के लोग जान जोखिम में डालकर नाले के रास्ते आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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चरड़ा पंचायत की प्रधान केतकी देवी ने बताया कि नाले पर मनरेगा के तहत पुल बनाने का प्रस्ताव पास किया गया था लेकिन नाले की लंबाई अधिक होने के कारण इसे सिरे नहीं चढ़ाया जा सका। हाइड्रो प्रोजेक्ट के सहयोग से नाले पर पुल बनाने की व्यवस्था की जा रही है।
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