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बच्चों को मानसिक रोगी बना रहीं अभिभावकों की उम्मीदें : डाॅ. नीरज
Thu, 02 May 2024 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 02 May 2024 10:50 PM IST
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चंबा। अभिभावक अपने बच्चे को उसके कौशल से विपरीत क्षेत्र में पढ़ाई करने को धकेल कर उन्हें मानसिक रोगी बना रहे हैं। इस तरह के मामले देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।
मनाेरोग विशेष के अनुसार वह बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहते हैं, जबकि बच्चा अपने कौशल के अनुसार दूसरे क्षेत्र में भविष्य संवारना चाहता है, जिस क्षेत्र में उसकी रुचि है। जब ऐसे बच्चों को उनके अभिभावक जबरदस्ती कर ऐसे क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए विवश कर देते हैं। हालांकि, बच्चे की उस क्षेत्र में पढ़ाई करने की जरा भी रुचि नहीं होती। इस वजह से कई बच्चे उस क्षेत्र में असफल होकर या असफल होने के डर से आत्महत्या करने जैसे कदम उठा लेते हैं। इस तरह के कई मामले प्रदेश और जिला चंबा में भी सामने आ चुके हैं।
चंबा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीरज शर्मा ने बताया कि बच्चे की दिलचस्पी किस क्षेत्र में ज्यादा होती है, उसका पता बचपन के दौरान ही लग जाता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चे को किसी भी क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए भेजने से पहले उसकी राय अवश्य लेनी चाहिए, जिससे बच्चा अपनी मनपसंद अनुसार क्षेत्र में पढ़ाई कर सकें। आज के दौर में डॉक्टर या इंजीनियर बनकर ही भविष्य उज्ज्वल नहीं बन सकता। आज के माहौल में चित्रकार, संगीतकार, नृत्यकार, आईटी, कंप्यूटर हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर सहित कई अन्य ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बच्चा अपनी योग्यता के दम पर बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है, लेकिन अधिकतर अभिभावक अपने बच्चे को सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर ही बनाना चाहते हैं। इसके परिणामस्वरूप नौजवान पीढ़ी मानसिक तनाव की शिकार हो रही है। इस तनाव से बच्चों को बचाने के लिए अभिभावकों को अपनी पुरानी धारना को बदलना होगा।
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मनाेरोग विशेष के अनुसार वह बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहते हैं, जबकि बच्चा अपने कौशल के अनुसार दूसरे क्षेत्र में भविष्य संवारना चाहता है, जिस क्षेत्र में उसकी रुचि है। जब ऐसे बच्चों को उनके अभिभावक जबरदस्ती कर ऐसे क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए विवश कर देते हैं। हालांकि, बच्चे की उस क्षेत्र में पढ़ाई करने की जरा भी रुचि नहीं होती। इस वजह से कई बच्चे उस क्षेत्र में असफल होकर या असफल होने के डर से आत्महत्या करने जैसे कदम उठा लेते हैं। इस तरह के कई मामले प्रदेश और जिला चंबा में भी सामने आ चुके हैं।
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चंबा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीरज शर्मा ने बताया कि बच्चे की दिलचस्पी किस क्षेत्र में ज्यादा होती है, उसका पता बचपन के दौरान ही लग जाता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चे को किसी भी क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए भेजने से पहले उसकी राय अवश्य लेनी चाहिए, जिससे बच्चा अपनी मनपसंद अनुसार क्षेत्र में पढ़ाई कर सकें। आज के दौर में डॉक्टर या इंजीनियर बनकर ही भविष्य उज्ज्वल नहीं बन सकता। आज के माहौल में चित्रकार, संगीतकार, नृत्यकार, आईटी, कंप्यूटर हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर सहित कई अन्य ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बच्चा अपनी योग्यता के दम पर बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है, लेकिन अधिकतर अभिभावक अपने बच्चे को सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर ही बनाना चाहते हैं। इसके परिणामस्वरूप नौजवान पीढ़ी मानसिक तनाव की शिकार हो रही है। इस तनाव से बच्चों को बचाने के लिए अभिभावकों को अपनी पुरानी धारना को बदलना होगा।
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