{"_id":"691cac5aa6830cf7450fac9f","slug":"nursing-institute-to-refund-rs-66000-tuition-fee-chamba-news-c-88-1-ssml1004-166850-2025-11-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: नर्सिंग संस्थान को लौटानी होगी 66,000 रुपये ट्यूशन फीस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: नर्सिंग संस्थान को लौटानी होगी 66,000 रुपये ट्यूशन फीस
Tue, 18 Nov 2025 10:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 18 Nov 2025 10:56 PM IST
विज्ञापन
चंबा। जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. पार्थ जैन की अदालत ने जीएनएम कोर्स की एक छात्रा से ट्यूशन फीस के रूप में वसूले गए 66,000 रुपये संबंधित नर्सिंग संस्थान को लौटाने के आदेश जारी किए हैं। बीमारी के कारण संस्थान में न आने पर छात्रा का नाम संस्थान ने काट दिया था और उसे परीक्षा से वंचित रखा था। अब अदालत ने संस्थान को ट्यूशन फीस लौटने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार अंजलि देवी निवासी नगेला, बाथरी, तहसील डलहौजी ने बताया कि उसने एक निजी संस्थान में शैक्षणिक सत्र 2010-11 में जीएनएम का साढ़े तीन साल का कोर्स करने के लिए दाखिला लिया। उसने पहले साल का कोर्स पूरा कर लिया और परीक्षा भी दी। सत्र 2011-12 के लिए दूसरे वर्ष में उसने फिर से दाखिला लिया और नवंबर 2011 तक कक्षाओं में भाग लिया। इस दौरान उसने शैक्षणिक सत्र 2011-12 के लिए जेएनएम पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण के लिए 66,000 रुपये की ट्यूशन फीस जमा करवाई।
ट्यूशन फीस उनके पिता द्वारा पंजाब नेशनल बैंक डलहौजी शाखा चंबा से ऋण लेकर भरी गई थी। उसके बाद वह गंभीर रूप से बीमार हो गई और सत्र में शामिल नहीं हो सकी। जिस पर संस्थान न उनका नाम काट दिया और परीक्षा में बैठने नहीं दिया। संस्थान प्रबंधन को उनके पिता ने बीमारी के बारे में सूचित किया और उनसे ट्यूशन फीस वापस करने का आग्रह किया, लेकिन संस्थान ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद यह मामला चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान शिमला के निदेशक के संज्ञान में भी लाया गया।
विज्ञापन
निदेशक की ओर से संस्थान प्रबंधन को 11 जुलाई 2012 को पूरी फीस वापस करने के निर्देश दिया गया। बावजूद इसके संस्थान की ओर से फीस वापस नहीं की गई। जिस पर उनकी ओर से संस्थान प्रबंधन को एक कानूनी नोटिस जारी किया गया। दसका भी प्रबंधन ने कोई जबाव नहीं दिया। आखिरकार मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुआ। इसके तहत सबूतों और गवाहों के बयानों के बाद अब न्यायालय ने संस्थान प्रबंधन को ट्यूशन फीस वापस करने के निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार अंजलि देवी निवासी नगेला, बाथरी, तहसील डलहौजी ने बताया कि उसने एक निजी संस्थान में शैक्षणिक सत्र 2010-11 में जीएनएम का साढ़े तीन साल का कोर्स करने के लिए दाखिला लिया। उसने पहले साल का कोर्स पूरा कर लिया और परीक्षा भी दी। सत्र 2011-12 के लिए दूसरे वर्ष में उसने फिर से दाखिला लिया और नवंबर 2011 तक कक्षाओं में भाग लिया। इस दौरान उसने शैक्षणिक सत्र 2011-12 के लिए जेएनएम पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण के लिए 66,000 रुपये की ट्यूशन फीस जमा करवाई।
विज्ञापन
ट्यूशन फीस उनके पिता द्वारा पंजाब नेशनल बैंक डलहौजी शाखा चंबा से ऋण लेकर भरी गई थी। उसके बाद वह गंभीर रूप से बीमार हो गई और सत्र में शामिल नहीं हो सकी। जिस पर संस्थान न उनका नाम काट दिया और परीक्षा में बैठने नहीं दिया। संस्थान प्रबंधन को उनके पिता ने बीमारी के बारे में सूचित किया और उनसे ट्यूशन फीस वापस करने का आग्रह किया, लेकिन संस्थान ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद यह मामला चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान शिमला के निदेशक के संज्ञान में भी लाया गया।
विज्ञापन
निदेशक की ओर से संस्थान प्रबंधन को 11 जुलाई 2012 को पूरी फीस वापस करने के निर्देश दिया गया। बावजूद इसके संस्थान की ओर से फीस वापस नहीं की गई। जिस पर उनकी ओर से संस्थान प्रबंधन को एक कानूनी नोटिस जारी किया गया। दसका भी प्रबंधन ने कोई जबाव नहीं दिया। आखिरकार मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुआ। इसके तहत सबूतों और गवाहों के बयानों के बाद अब न्यायालय ने संस्थान प्रबंधन को ट्यूशन फीस वापस करने के निर्देश जारी किए हैं।