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Chamba News: सरकारी चावल निजी दुकान में बेचने के आरोप में दो आरोपियों को राहत नहीं

Mon, 05 Oct 2026 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Mon, 05 Oct 2026 10:26 PM IST
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No relief for two accused charged with selling government-supplied rice at a private shop.
जिला खाद्य आपूर्ति विभाग पहले ही चावल आरोपियों को डिपो पहुंचाने को कर चुका था जारी
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न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) तीसा की अदालत में जमानत याचिका की खारिज

संवाद न्यूज एजेंसी

चंबा। सरकारी आपूर्ति के चावल निजी दुकान में बेचने के आरोप में नामजद दो आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) तीसा की अदालत ने धारा 239 दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत दाखिल बरी करने की याचिका खारिज कर दी। मामले में अभियुक्त नंबर एक के खिलाफ कार्यवाही 25 जुलाई 2022 को पहले ही रद्द की जा चुकी है।
अभियुक्त संख्या दो और तीन की ओर से दलील दी गई कि उनके कब्जे से बरामद चावल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने उचित मूल्य की दुकान में बिक्री के लिए विधिवत जारी किए थे। वे चावल संबंधित उचित मूल्य डिपो तक ले जा रहे थे। बचाव पक्ष ने दावा किया कि जांच के दौरान पुलिस के समक्ष आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन उन पर विचार नहीं किया गया। इसलिए आरोपियों को बरी करने की मांग की गई।
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अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी चावल को निजी दुकानों में बेचकर लाभ कमाने के उद्देश्य से ले जा रहे थे और उसे निर्धारित उचित मूल्य डिपो तक नहीं पहुंचा रहे थे। उनके खिलाफ आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध होने का भी दावा किया गया। अदालत ने धारा 173(2) सीआरपीसी के तहत पेश पुलिस रिपोर्ट का अवलोकन किया। इसमें सामने आया कि एचपी-73-2709 नंबर की बोलेरो पिकअप मुनव्वर की दुकान के बाहर खड़ी मिली थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने वाहन की जांच की तो उसमें चावल की 20 बोरियां बरामद हुईं। वाहन चालक मौके पर चावल से संबंधित लाइसेंस या परमिट प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की और दस्तावेज जुटाए। अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल प्रथमदृष्टया मामला देखा जाता है और साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन इस स्तर पर नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम प्रफुल्ल कुमार फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है। लिहाजा बरी करने की याचिका खारिज कर दी गई।
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