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बैठने को नहीं जगह, पढ़ाई के लिए हो रही मुश्किल
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सलूणी (चंबा)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डियुर में जमा एक और दो कक्षा के छात्र-छात्राएं अलग-अलग दिन पढ़ाई करने के लिए पहुंचते हैं। यह व्यवस्था स्कूल प्रबंधन ने इसलिए की है क्योंकि उनके पास इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाने के लिए पर्याप्त मात्रा में कमरे उपलब्ध नहीं हैं।
स्कूल के पुराने भवन को दो वर्ष पहले असुरक्षित घोषित करके तोड़ दिया गया था लेकिन आज दिन तक उसके स्थान पर नया भवन नहीं बन पाया। इसकी वजह से जमा एक और दो कक्षा में पढ़नेे वाले 400 विद्यार्थियों की पढ़ाई मात्र तीन कमरों में करवाई जा रही है। इसमें एक कमरा स्टाफ को दिया गया है। अब दो कमरों में विद्यार्थियों को बैठाना प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा है।
मौसम साफ होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई बरामदे में करवाई जाती है लेकिन बारिश होने पर विद्यार्थियों को घर भेज दिया जाता है। हैरानी इस बात की है कि इसको लेकर सरकार और शिक्षा विभाग अपनी आंखें मूंद कर बैठे हैं। सरकार के नेता कई बार डियुर का दौरा कर चुके हैं लेकिन आज दिन तक उन्होंने स्कूल की तरफ ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। स्थानीय लोगों ने कई बार उन्हें अवगत करवाया कि भवन न होने से बच्चों को परेशानी हो रही है लेकिन किसी भी नेता ने उनकी समस्या का समाधान नहीं किया। इसका खामियाजा विद्यार्थियों और अध्यापकों को भुगतना पड़ रहा है।
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-सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा देने के दावे कर रही है, लेकिन डियुर में सरकार के ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई करने के लिए परेशानी हो रही है। -चमारू राम
-दो साल पहले जब भवन गिराया गया था तो अभिभावकों को आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही नए कमरे बनाए जाएंगे, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। -होशियारा राम
-स्कूल प्रबंधन को कमरों की कमी के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए बारी-बारी बुलाना पड़ रहा है। क्योंकि एक साथ सभी बच्चों को बैठाने के लिए उनके पास कमरे नहीं है। -भीलो राम
-दो वर्षों में नए कमरों का निर्माण न होना सरकार और विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। जब पुराने कमरों को गिराया गया था, उसके तुरंत बाद नए कमरों का निर्माण शुरू होना चाहिए था। -रमेश कुमार
- कमरों की कमी के कारण समस्या आ रही है। छुट्टियां समाप्त होने के बाद दोबारा से सभी बच्चों की एक साथ रोजाना कक्षाएं लगाई जाएंगी। कहा कि नए कमरों का निर्माण कार्य चला है। जल्द ही ये कमरे भी तैयार हो जाएंगे। -सुरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य
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स्कूल के पुराने भवन को दो वर्ष पहले असुरक्षित घोषित करके तोड़ दिया गया था लेकिन आज दिन तक उसके स्थान पर नया भवन नहीं बन पाया। इसकी वजह से जमा एक और दो कक्षा में पढ़नेे वाले 400 विद्यार्थियों की पढ़ाई मात्र तीन कमरों में करवाई जा रही है। इसमें एक कमरा स्टाफ को दिया गया है। अब दो कमरों में विद्यार्थियों को बैठाना प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा है।
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मौसम साफ होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई बरामदे में करवाई जाती है लेकिन बारिश होने पर विद्यार्थियों को घर भेज दिया जाता है। हैरानी इस बात की है कि इसको लेकर सरकार और शिक्षा विभाग अपनी आंखें मूंद कर बैठे हैं। सरकार के नेता कई बार डियुर का दौरा कर चुके हैं लेकिन आज दिन तक उन्होंने स्कूल की तरफ ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। स्थानीय लोगों ने कई बार उन्हें अवगत करवाया कि भवन न होने से बच्चों को परेशानी हो रही है लेकिन किसी भी नेता ने उनकी समस्या का समाधान नहीं किया। इसका खामियाजा विद्यार्थियों और अध्यापकों को भुगतना पड़ रहा है।
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-सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा देने के दावे कर रही है, लेकिन डियुर में सरकार के ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई करने के लिए परेशानी हो रही है। -चमारू राम
-दो साल पहले जब भवन गिराया गया था तो अभिभावकों को आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही नए कमरे बनाए जाएंगे, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। -होशियारा राम
-स्कूल प्रबंधन को कमरों की कमी के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए बारी-बारी बुलाना पड़ रहा है। क्योंकि एक साथ सभी बच्चों को बैठाने के लिए उनके पास कमरे नहीं है। -भीलो राम
-दो वर्षों में नए कमरों का निर्माण न होना सरकार और विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। जब पुराने कमरों को गिराया गया था, उसके तुरंत बाद नए कमरों का निर्माण शुरू होना चाहिए था। -रमेश कुमार
- कमरों की कमी के कारण समस्या आ रही है। छुट्टियां समाप्त होने के बाद दोबारा से सभी बच्चों की एक साथ रोजाना कक्षाएं लगाई जाएंगी। कहा कि नए कमरों का निर्माण कार्य चला है। जल्द ही ये कमरे भी तैयार हो जाएंगे। -सुरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य