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जीएमआर परियोजना में 1800 मजदूरों के वेतन का फैसला लटका
ब्यूरो, अमर उजाला, (चंबा)
Updated Fri, 04 Nov 2016 05:33 PM IST
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वेतन न मिलने से कामगारों में रोष।
- फोटो : अमर उजाला
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होली में निर्माणाधीन जीएमआर बिजली परियोजना में दो माह से वेतन को तरस रहे करीब 1800 मजदूरों के मेहनताने का फैसला लटक गया है।
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श्रम विभाग ने कंपनी को दो दिन की मोहलत दी थी लेकिन कंपनी इस अवधि में मजदूरों को भुगतान करने में नाकाम रही है और अब श्रम विभाग इस सारे मसले को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाने जा रहा है। श्रम विभाग इस पूरे मामले में जीएमआर व निर्माणकर्ता एजेंसी को भी आरोपी बनाने जा रहा है। करीब 80 करोड़ रुपये के इस भुगतान को लेकर जीएमआर और निर्माणकर्ता एजेंसी के बीच भी तनाव बना हुआ है।
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जीएमआर ने एजेंसी को पूरा भुगतान करने की बात कही है। लेकिन यह भुगतान मजदूरों व निचले तबके के ठेकेदारों तक नहीं पहुंचा है। गौरतलब है कि जीएमआर कंपनी के निर्माण कार्य में जुटे करीब 1800 कामगारों को सितंबर माह में वेतन का भुगतान नहीं किया गया था। कंपनी अगले माह भुगतान की बात कहकर अक्तूबर में भी मजदूरों से काम लेती रही। लेकिन इस बीच किसी भी मजदूर को भुगतान नहीं किया गया।
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दिवाली से कुछ दिन पहले मजूदरों ने हड़ताल का एलान कर दिया। जिसके दबाव में आकर निर्माणकर्ता एजेंसी ने सभी मजदूरों को 15 दिन के मेहनताने का भुगतान कर दिया। लेकिन मजदूर इस भुगतान से संतुष्ट नहीं हैं। जबकि दूसरी ओर श्रम विभाग ने भी इस भुगतान को गैर कानूनी करार दिया है। विभाग की मानें तो दो माह काम लेकर किसी भी मजदूर को 15 दिन का भुगतान नहीं किया जा सकता है। बहरहाल, होली में निर्माणधीन इस बिजली परियोजना पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। पूरी परियोजना को संभाल रहे 1800 मजदूर कभी भी हड़ताल पर जा सकते हैं।
जायज नहीं 15 दिन का भुगतान : श्रम विभाग
जिला श्रम अधिकारी राजकुमार शर्मा का कहना है कि जीएमआर कंपनी में श्रम कानूनों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दो दिन में मजदूरों का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कंपनी ऐसा करने में नाकाम रही। 15 दिन का भुगतान किसी भी कानून के दायरे में नहीं है। विभाग जीएमआर और निर्माणकर्ता एजेंसी दोनों के खिलाफ कोर्ट जाएगा।