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होली अस्पताल में सिरदर्द की दवाई तक नहीं
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होली (चंबा)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली में सिरदर्द की दवा तक नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं ग्लव्ज और ग्लूकोज का भी अस्पताल में टोटा चला हुआ है। ग्रामीणों को मामूली बीमारी के इलाज के लिए 75 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय चंबा पहुंचना पड़ रहा है। इसके चलते लोगों में शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष है। ग्रामीणों ने कहा है कि इस प्रकार की अव्यवस्था से तो अच्छा है कि अस्पताल को बंद ही कर दिया जाए।
उपमंडल होली के तहत गरौंदा, बजोल, न्याग्रां, दियोल, कुलेठ, होली, कुठेड़, लांबू, साहं, क्वारसी, चन्हौता, गरोला और सियूर की 15 हजार की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए होली स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। बावजूद इसके अस्पताल में जरूरी दवाइयां और सामान की कमी मरीजों की परेशानियां बढ़ा रही है। अस्पताल में पेरासिटामोल, ग्लव्ज और ग्लूकोज तक नहीं हैं। रात के समय आने वाले मरीजों की दिक्कतों को देखते हुए तैनात चिकित्सीय स्टाफ अपने खर्चे पर दवाइयां उपलब्ध करवाने को मजबूर है।
ग्रामीणों रमेश कुमार, महेश चंद, प्रवीण कुमार, सनी कुमार, रमेश कुमार, उत्तम चंद, जयकरण, संजय कुमार का कहना है कि एक तरफ तो सरकार घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भरती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में सिरदर्द तक की दवा नहीं है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। खंड चिकित्सा अधिकारी से इसके बारे में जवाब तलब किया जाएगा।
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उपमंडल होली के तहत गरौंदा, बजोल, न्याग्रां, दियोल, कुलेठ, होली, कुठेड़, लांबू, साहं, क्वारसी, चन्हौता, गरोला और सियूर की 15 हजार की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए होली स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। बावजूद इसके अस्पताल में जरूरी दवाइयां और सामान की कमी मरीजों की परेशानियां बढ़ा रही है। अस्पताल में पेरासिटामोल, ग्लव्ज और ग्लूकोज तक नहीं हैं। रात के समय आने वाले मरीजों की दिक्कतों को देखते हुए तैनात चिकित्सीय स्टाफ अपने खर्चे पर दवाइयां उपलब्ध करवाने को मजबूर है।
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ग्रामीणों रमेश कुमार, महेश चंद, प्रवीण कुमार, सनी कुमार, रमेश कुमार, उत्तम चंद, जयकरण, संजय कुमार का कहना है कि एक तरफ तो सरकार घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भरती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में सिरदर्द तक की दवा नहीं है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। खंड चिकित्सा अधिकारी से इसके बारे में जवाब तलब किया जाएगा।