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मैराथन में आशिमा राणा, देवेंद्र, गरजी शर्मा व अनीश ने पाया पहला स्थान
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िमंजर मेले में मैराथन में भाग लेते लोग।
- फोटो : Chamba
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चंबा। मिंजर महोत्सव के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से मैराथन का आयोजन करवाया गया। इसमें भारी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। मैराथन का आयोजन रविवार को सुबह सात बजे हुआ। मिलेनियम गेट से मैराथन को पुलिस अधीक्षक डॉक्टर मोनिका ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मैराथन में युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिला। विजेता रहने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
लड़कियों में 15 वर्ष से कम आयु वर्ग में आशिमा राणा ने पहला, ईशा ने दूसरा, जबकि मुस्कान ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसी वर्ग में लड़कों की प्रतियोगिता में देवेंद्र ने पहला, कर्ण ने दूसरा, जबकि सुमित ने तीसरा स्थान हासिल किया। 15 वर्ष से अधिक आयु वाली लड़की की प्रतियोगिता में गरजी शर्मा ने पहला स्थान हासिल किया। जबकि, सुनीता ने दूसरा और मनीषा ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसी वर्ग में लड़कों की प्रतियोगिता में अनीश ने पहला, राम सिंह ने दूसरा और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने तीसरा स्थान हासिल किया। पुलिस अधीक्षक डॉक्टर मोनिका ने मैराथन में रहे विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और इनामी राशि देकर सम्मानित किया। साथ ही युवाओं का मार्गदर्शन भी किया।
पुलिस से ही उलझ पड़े स्थानीय लोग
मैराथन के दौरान पुलिस और यातायात पुलिस के जवान निर्धारित ट्रैक को धावकों की आवाजाही के लिए खाली करवाने में जुटे रहे। बावजूद इसके कुछेक स्थानीय लोग मैराथन को दरकिनार कर वहां से अपने वाहन ले जाने के लिए तैनात पुलिस जवानों के साथ ही बहसबाजी करने से पीछे नहीं रहे। खैर, पुलिस जवानों ने जैसे-तैसे इन लोगों को उनके वाहन निर्धारित ट्रैक के किनारों पर खड़े करवाए।
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लावारिस पशु बने परेशानी का सबब
निर्धारित ट्रैक पर लावारिस मवेशियों ने यातायात पुलिस जवानों की परेशानियां बढ़ाने का ही काम किया। बार-बार सड़क पर पहुंचने वाले इन लावारिस मवेशियों के चलते पुलिस जवानों को उन्हें खदेड़ने में परेशानियां उठानी पड़ीं। मैराथन के दौरान धावकों के स्वास्थ्य को देखते हुए उनके पीछे एंबुलेंस भी चलाई गई थी जिसका मकसद यदाकदा बीमार होने पर धावकों को उठा कर समयानुसार एंबुलेंस के जरिए स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा सकें। बहरहाल, मैराथन के दौरान वापसी के समय एक दर्जन के करीब धावकों को एंबुलेंस में बैठा कर लाया गया। इसका कारण धावकों की सांस फूलना और पेट दर्द होना मुख्य कारण रहे।
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लड़कियों में 15 वर्ष से कम आयु वर्ग में आशिमा राणा ने पहला, ईशा ने दूसरा, जबकि मुस्कान ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसी वर्ग में लड़कों की प्रतियोगिता में देवेंद्र ने पहला, कर्ण ने दूसरा, जबकि सुमित ने तीसरा स्थान हासिल किया। 15 वर्ष से अधिक आयु वाली लड़की की प्रतियोगिता में गरजी शर्मा ने पहला स्थान हासिल किया। जबकि, सुनीता ने दूसरा और मनीषा ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसी वर्ग में लड़कों की प्रतियोगिता में अनीश ने पहला, राम सिंह ने दूसरा और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने तीसरा स्थान हासिल किया। पुलिस अधीक्षक डॉक्टर मोनिका ने मैराथन में रहे विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और इनामी राशि देकर सम्मानित किया। साथ ही युवाओं का मार्गदर्शन भी किया।
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पुलिस से ही उलझ पड़े स्थानीय लोग
मैराथन के दौरान पुलिस और यातायात पुलिस के जवान निर्धारित ट्रैक को धावकों की आवाजाही के लिए खाली करवाने में जुटे रहे। बावजूद इसके कुछेक स्थानीय लोग मैराथन को दरकिनार कर वहां से अपने वाहन ले जाने के लिए तैनात पुलिस जवानों के साथ ही बहसबाजी करने से पीछे नहीं रहे। खैर, पुलिस जवानों ने जैसे-तैसे इन लोगों को उनके वाहन निर्धारित ट्रैक के किनारों पर खड़े करवाए।
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लावारिस पशु बने परेशानी का सबब
निर्धारित ट्रैक पर लावारिस मवेशियों ने यातायात पुलिस जवानों की परेशानियां बढ़ाने का ही काम किया। बार-बार सड़क पर पहुंचने वाले इन लावारिस मवेशियों के चलते पुलिस जवानों को उन्हें खदेड़ने में परेशानियां उठानी पड़ीं। मैराथन के दौरान धावकों के स्वास्थ्य को देखते हुए उनके पीछे एंबुलेंस भी चलाई गई थी जिसका मकसद यदाकदा बीमार होने पर धावकों को उठा कर समयानुसार एंबुलेंस के जरिए स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा सकें। बहरहाल, मैराथन के दौरान वापसी के समय एक दर्जन के करीब धावकों को एंबुलेंस में बैठा कर लाया गया। इसका कारण धावकों की सांस फूलना और पेट दर्द होना मुख्य कारण रहे।