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Chamba News: आवासीय आयुक्त तक पहुंचा मिंधल प्रजामंडल का विवाद
Tue, 09 Sep 2025 09:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 09 Sep 2025 09:54 PM IST
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पांगी (चंबा)। उपमंडल पांगी के ग्रांम पंचायत मिंधल के प्रजामंडल का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब यह मामला गांव से आवासीय आयुक्त पांगी तक पहुंच गया है। इस संबंध में मिंधल पंचायत के पूर्व प्रधान प्रताप सिंह ने मिंधल प्रजा मंडल के कामकाज से जुड़ा एक शिकायत पत्र सौंपा। उसके बाद मंगलवार को आवासीय आयुक्त पांगी ने प्रजामंडल मिंधल के 11 सदस्यों को किलाड़ बुलाया। पांगी में जहां सरकारी तंत्र की पहुंच सीमित होती है तो वहां ग्रामीण अकसर अपनी समस्याओं को सुलझाने और गांव के नियमों को बनाने के लिए खुद ही संस्थाएं बना लेते हैं। प्रजा मंडल ऐसी ही एक संस्था है। हालांकि अब प्रशासन के आदेशों के बाद इसे पंजीकृत करना जरूरी है। प्रजामंडल का मकसद गांव में व्यवस्था बनाए रखना और ग्रामीणों के हितों की मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब मिंधल प्रजामंडल ने अपने 64 सदस्यों में से सात को निष्कासित कर दिया। निष्कासन के बाद इन सदस्यों को दोबारा प्रजा मंडल में शामिल होने के लिए 15 से 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने को कहा। मिंधल के पूर्व पंचायत प्रधान प्रताप सिंह ने इस मामले को अब प्रशासन तक पहुंचाया। उन्होंने आवासीय आयुक्त पांगी को एक शिकायत पत्र सौंपा। प्रताप सिंह का आरोप लगाया कि प्रजामंडल उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रहा है। मिंधल प्रजामंडल सरकारी कागजों में पंजीकृत नहीं है। इसका मतलब है कि यह एक आधिकारिक संस्था नहीं है और इसके पास मनमर्जी से नियम बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जब कोई संस्था पंजीकृत नहीं होती तो उसके पास कोई तय बायलॉज नहीं होते। प्रजामंडल अपनी मर्जी से नियम बना रहा है और उन्हें लागू कर रहा है। उधर, आवासीय आयुक्त रमन घरसंगी ने बताया कि अगर मिंधल प्रजामंडल बिना पंजीकरण के गांव में मनमर्जी के नियम बना रहा है और वे नियम सरकारी बायलॉज के आधार पर नहीं हुए तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। 15 सितंबर को प्रजामंडल मिंधल के बायलाॅज के कागज मंगवाए हैं। उसके बाद ही आगामी कार्रवाई होगी।
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इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब मिंधल प्रजामंडल ने अपने 64 सदस्यों में से सात को निष्कासित कर दिया। निष्कासन के बाद इन सदस्यों को दोबारा प्रजा मंडल में शामिल होने के लिए 15 से 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने को कहा। मिंधल के पूर्व पंचायत प्रधान प्रताप सिंह ने इस मामले को अब प्रशासन तक पहुंचाया। उन्होंने आवासीय आयुक्त पांगी को एक शिकायत पत्र सौंपा। प्रताप सिंह का आरोप लगाया कि प्रजामंडल उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रहा है। मिंधल प्रजामंडल सरकारी कागजों में पंजीकृत नहीं है। इसका मतलब है कि यह एक आधिकारिक संस्था नहीं है और इसके पास मनमर्जी से नियम बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जब कोई संस्था पंजीकृत नहीं होती तो उसके पास कोई तय बायलॉज नहीं होते। प्रजामंडल अपनी मर्जी से नियम बना रहा है और उन्हें लागू कर रहा है। उधर, आवासीय आयुक्त रमन घरसंगी ने बताया कि अगर मिंधल प्रजामंडल बिना पंजीकरण के गांव में मनमर्जी के नियम बना रहा है और वे नियम सरकारी बायलॉज के आधार पर नहीं हुए तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। 15 सितंबर को प्रजामंडल मिंधल के बायलाॅज के कागज मंगवाए हैं। उसके बाद ही आगामी कार्रवाई होगी।
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