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Chamba News: मां भरमाणी के दर्शन के बिना पूरी नहीं मानी जाती है मणिमहेश यात्रा

Sun, 01 Sep 2024 09:52 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sun, 01 Sep 2024 09:52 PM IST
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Manimahesh Yatra is not considered complete without the darshan of Mother Bharmani.
चंबा के भरमौर में हैलीटैक्सी के लिए हैलीपैड बुकिंग कांऊटर के बाहर बुकिंग करवाते श्रद्धालू।संवाद
भरमौर चंबा। भरमाणी माता के दर्शन के बिना मणिमहेश यात्रा पूरी नहीं हो सकती। यह वरदान स्वयं भगवान शंकर ने माता भरमाणी को दिया था। इसके चलते श्रद्धालु मणिमहेश रवाना होने से पहले भरमाणी माता के दर्शन करने जाते हैं। उसके बाद ही मणिमहेश के लिए अपनी यात्रा शुरू करते हैं।
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भरमाणी में स्थापित ब्रह्मकुंड में स्नान कर मणिमहेश की यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इसलिए श्रद्धालु मणिमहेश जाने से पूर्व भरमाणी माता के मंदिर में दर्शन करते हैं। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर से आने वाले श्रद्धालुओं के जत्थे अपना पहला पड़ाव भरमौर में डालते हैं, जिससे भरमाणी माता के दर्शन करके वे आगे की यात्रा पर निकल सकें। ऐसा माना जाता है कि यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु सच्ची आस्था के साथ माता भरमाणी से जो भी मांगते हैं, माता भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं। यह भी मान्यता है कि भरमाणी माता के दर्शन और ब्रह्म कुंड में स्नान करने के उपरांत मणिमहेश की चढ़ाई भी श्रद्धालुओं को परेशान नहीं करती
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मान्यता है कि पहले चौरासी परिसर पर माता भरमाणी का मंदिर था। यहां पुरुषों के लिए शाम के वक्त रुकना मना था। जब चौरासी सिद्ध प्रमुख नाथ मणिमहेश की तरफ जा रहे थे तो उन्हें चौरासी पर रात को ठहरने के लिए उपयुक्त स्थान मिला। अंधेरा होने लगा तो सिद्ध भक्ति में लीन हो गए। भरमााणी माता ने देखा कि रात का समय हो गया तो सिद्ध क्यों नहीं जा रहे हैं। वह क्रोध में आकर चौरासी सिद्धों की तरफ देखने लगी तो इनमें एक प्रमुख सिद्ध जो भगवान शंकर के रूप थे। उन्हें देखते ही भरमाणी माता उनके पास गई और क्षमा याचना करने लगीं। उन्होंने भगवान शंकर से कहा कि चौरासी परिसर पर पुरुष जाति का रुकना निषेध था, अब मैं यहां नहीं रहूंगी। तब मां भरमाणी भरमौर से ढाई किलोमीटर दूर डुगासार नामक स्थान पर चली गईं। यहां से चौरासी परिसर नहीं दिखता है। भरमाणी माता ने शिव शंकर से कहा कि पहले मेरा स्थान चौरासी था, अब मैं डुगासार चली गई हूं। ऐसे में मेरे स्थान पर कोई भक्त नहीं आएगा। भगवान शंकर ने भरमाणी माता को वरदान दिया कि मेरी यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाएगी, जब तक श्रद्धालु भरमाणी मां के दर्शन नहीं करेंगे।
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